गर्मी की 6 आम दिक्कतें और उनका समाधान

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गर्मी (Summer) का मौसम शरीर और स्किन (Skin) दोनों पर भारी पड़ता है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है और गर्मी बर्दाश्त से बाहर होने लगती है, शरीर को खुद को ठंडा, सुरक्षित और संक्रमण से मुक्त रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। यही बात स्किन (Skin) पर भी लागू होती है। तो आइये जानते हैं गर्मियों की 6 आम समस्याओं (6 common problems) और उनके समाधान (Solutions) के बारे मे:

सनबर्नः गर्मियों की धूप बेहद तीखी होती है। यह आपकी त्वचा को छील सकती है जिससे त्वचा पर लाल रैशेज और निशान उभर सकते हैं जिनमें जलन महसूस होती है। ऐसा उन लोगों को ज्यादा होता है जिनकी स्किन सेंसिटिव होती है। इस स्थिति से खुद को बचाने का एक ही उपाय है, जहां तक हो सके धूप के सीधे संपर्क में आने से बचें। इसके साथ ही त्वचा पर नियमित रूप से सन्सक्रीन लगाना भी जरूरी है। अपने चेहरे, गर्दन और बाहों पर बाहर निकलने से 20 मिनट पहले कोई सनब्लॉक क्रीम अच्छी तरह से लगाएं। इतना ही नहीं, त्वचा की सुरक्षा बरकरार रहे इसके लिए हर 4 घंटे के अंतराल में सन्सक्रीन लगाएं। इसके साथ ही संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को दिन के समय में शरीर को जहां तक हो सके ढंकने वाले और कॉटन के कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है। अपनी त्वचा की गर्मी शांत करने के लिए शाम को एलो वेरा जेल का फेस पैक इस्तेमाल करें।

डीहाइड्रेशन: डीहाइड्रेशन का असर सिर्फ आपका शरीर ही नहीं बल्कि आपकी त्वचा को भी झेलना पड़ता है। लगातार पसीना आने से हमारे शरीर में पानी की कमी होती रहती है। इसकी पूर्ति के लिए अगर पर्याप्त मात्रा में लिक्विड न लिया जाए तो त्वचा रूखी, बेजान, इरिटेटेड और सनबर्न की चपेट में आने के अनुकूल बन जाएगी। आपके होंठ फटने लगेंगे और जगह-जगह रूखे पैचेज़ उभर सकते हैं। इससे बचाव के लिए खूब सारा पानी पीते रहें। हर समय अपने साथ पानी की एक बोतल रखें। हर आधे घंटे में एक बार पानी जरूर पिएं। गर्मियों में तरबूज जैसे फल शरीर और त्वचा के लिए बेहद उपयुक्त होते हैं क्योंकि इनमें खूब सारा पानी होता है। आप कुछ डीप हाइड्रेटिंग ट्रीटमेंट भी ले सकते हैं, जैसे कि हाइड्रेटिंग इलेक्टृोपोरेशन थेरेपी, ऑक्सिजन थेरेपी और जुवेडर्म रिफाइन।

मुंहांसे- पसीना हमारी त्वचा को धूल-मिट्टी और प्रदूषण के लिए चुंबक जैसा बना देता है, खासतौर से तब जब हम बाहर ज्यादा समय गुजारते हैं। गर्मी और गंदगी का यह मेल मुंहासों के पनपने के लिए उपयुक्त माहौल तैयार करता है। गंदगी से त्वचा के रोम छिद्र बंद हो जाते हैं और भीतर से गर्मी बढ़ने पर बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। मुंहांसों की समस्या को कम करने के लिए त्वचा को हमेशा साफ रखें। अपने साथ हमेशा एक फेसवॉश रखें और त्वचा को साफ रखने के लिए दिन में कम से कम तीन बार चेहरा धोएं। त्वचा के रोमछिद्र बंद न हों इसके लिए हर शाम कोई अच्छा स्किन क्लींजर लगाएं। एंटी बैक्टीरियल फेस वॉश का इस्तेमाल करें और रात में चेहरे पर मुल्तानी मिट्टी या चंदन पाउडर का लेप लगाएं। इससे आपकी त्वचा में ठंडक बरकरार रहेगी।

गर्मियों से रैशेज: गर्मियों के दिनों में तमाम कारणों से आपकी त्वचा इरिटेबल हो जाती है। गर्मी के साथ पसीना आना सबसे बड़ी समस्या होती है। कभी-कभी धूल-मिट्टी हमारे रोमछिद्रों में घुसकर इसमें रूकावट डालती है, ऐसे में पसीना सही ढंग से बाहर नहीं निकल पाता है और त्वचा पर खुजली वाले चकत्ते, छाले या कील-मुंहांसे हो जाते हैं। कपड़ों की रगड़ से त्वचा की हालत और खराब हो सकती है। अगर आपको पसीना आता है तो अपने आप साफ रखकर इस समस्या से बचा सकते हैं। दिन में दो बार नहाएं। खासतौर से रात के समय जरूर नहाएं। नहाने के लिए कोई एंटीबैक्टीरियल साबुन या बाथ जेल इस्तेमाल करें। जहां तक हो सके खुद को सूखा रखें। प्रभावित त्वचा पर बर्फ रगड़ें, इससे जलन कम होगी। अगर स्थिति में सुधार न आए तो डॉक्टर को दिखाएं।

बैक्टीरियल संक्रमणः गर्मी का मौसम बहुत तरह के बैक्टीरिया और वायरस के लिए अनुकूल होता है। बैक्टीरिया हर जगह होते हैं और आप इन्हें देख भी नहीं सकते। जो लोग पब्लिक टृांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाते हैं उन्हें बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा काफी ज्यादा होता है। यहां तक कि बस की सीट या खिड़कियां, जिन्हें आप हाथ लगाते हैं, पर भी बैक्टीरिया जमे हो सकते हैं। यही हाथ अगर हम अपने चेहरे पर लगाते हैं तो संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं। अपने हाथों को बार-बार धोने और साफ रखने की कोशिश करें। अपने साथ हैंडवॉश रखें और प्रत्येक कुछ घंटों के अंतराल में हाथों को धोएं। अगर ऐसा करना संभव न हो तो कोई हैंड सैनिटाइजर इस्तेमाल करें। और अपनी उंगलियों से चेहरे को बार-बार छूने की आदत छोड़ दें।
फोलिकल्टिस एक आम समस्या है जिसमें बालों के फोलिकल बैक्टीरिया की वजह से डैमेज हो जाते हैं और इन्फ्लेमेशन होता है। इससे बचाव के लिए ढीले कपड़े पहनें, ऐसे स्विमिंग पूल में जाने से बचें जो पूरी तरह साफ न रहता हो। शेविंग करते समय त्वचा को कटने से बचाएं।

टैनिंगः जब हम सूरज की यूवी किरणों के संपर्क में आते हैं, तब त्वचा का मेलनिन एक सुरक्षात्मक कवर बनाता है। इन मेलेनिन की वजह से ही गहरे धब्बे उभरते हैं। ये या तो पूरे चेहरे पर एक समान दिखाई देते हैं अथवा पैचेज़ के रूप में नजर आते हैं। इस स्थिति को हम स्किन डार्केनिंग, टैनिंग अथवा हाइपर पिगमेंटेशन कहते हैं। हर समय 30 एसपीएफ वाला सनस्क्रीन लगाना और इसे बार-बार लगाते रहना जरूरी होता है। साथ ही आंखों के नीचे काले घेरे होने से रोकने के लिए धूप के चश्मे लगाना भी जरूरी होता है। टैनिंग का असर खत्म करने के लिए लेजर स्किन रीजुविनेशन, केमिकल पील्स अथवा माइक्रोडर्माऐब्रेजन जैसे प्रॉसीजर कराएं। आपके त्वचा रोग विशेषज्ञ आपकी त्वचा के लिए उपयुक्त प्रॉसीजर बता सकते हैं।

डॉ. चिरंजीव छाबड़ा,
स्किन स्पेशियलिस्ट एंड एस्थेटिक फिजीशियन
स्किनअलाइव क्लीनिक्स

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