कमर दर्द के 7 कॉमन मिथ्स

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back pain

तकरीबन 80% लोगों का सामना कभी न कभी कमर दर्द से जरूर होता है। यह दर्द चाहे तेज चुभन के रूप मे हो या हल्के दर्द के रूप मे, आपके डेली रूटीन को पूरी तरह से डिस्टर्ब कर देता है। यह समस्या जितनी आम है, इसको लेकर लोगों मे उतना ही ज्यादा मिथ यानि गलत धारणा भी है। शायद यही वजह है कि अधिकतर मामलों मे दिक्कत कम होने के बजाय बढ़ जाती है। हम आपको दे रहे हैं ऐसे ही 7 सबसे कॉमन मिथ्स और उनसे जुड़े सही फैक्ट्स की जानकारी:

मिथ: हमेशा पीठ सीधी करके बैठना चाहिए।
इसमे कोई दो राय नहीं है कि आगे कि तरफ झुककर बैठना गलत है। लेकिन पूरा सीधा बैठे रहना और काफी देर तक इसी पोजीशन मे रहना भी कमर मे खिंचाव की वजह बन सकता है। अगर आप लगातार बैठकर काम करते हैं तो ये ट्राई करें: बीच मे कभी-कभी अपनी कुर्सी पर पीछे की तरफ पूरा लेट जाएं और पैर फर्श पर सीधा फैला कर रखें। या इससे भी बेहतर है कि जब भी आप फोन पर बात करते हैं या कुछ पढ़ रहे होते हैं तब कुर्सी से उठकर खड़े हो जाएँ या टहलें।

मिथ: कोई भारी चीज नहीं उठानी चाहिए:
यह सच है कि आपको उतना वजन बिलकुल नहीं उठाना चाहिए, जितना कि आपकी क्षमता से अधिक हो। मगर यह बात भी ध्यान मे रखें कि आप कितना वजन उठा रहे हैं, इसके साथ-साथ यह समझना भी जरूरी है कि आप भार को उठा कैसे रहे हैं। आप जब भी वजन उठाएँ, सामान के करीब कुछ इस तरह झुकें कि आपकी कमर सीधी और सिर ऊपर कि ओर हो। वजन को पैरों के सहारे ऊपर उठाते हुए खड़े हो जाएँ। वजन उठाते समय अपने शरीर को मोड़ें, घुमाएँ नहीं, वरना कमर मे दर्द हो सकता है।

मिथ: बेड रेस्ट है बेस्ट इलाज:
यह सही है कि चोट या खिंचाव से होने वलर कमर दर्द मे आराम करने से राहत मिल सकती है। लेकिन यह एक मिथ है कि आपको हर समय बेड पर रहना चाहिए। एक-दो दिन भी बेड पर पड़े रहने से आपका कमर दर्द बुरी हालत मे पहुँच सकता है।

मिथ: दर्द कि वजह सिर्फ चोट होती है।
ऐसा नहीं है। कमर दर्द की वजह डिस्क के डीजनरेशन, चोट, बीमारी, इन्फेक्शन और यहाँ तक कि पारिवारिक इतिहास के चलते भी हो सकता है।

मिथ: ज्यादा वजन यानि ज्यादा कमर दर्द
फिट रहकर कमर दर्द से बचा जा सकता है। लेकिन इसका मतलब यह बिकुल नहीं है कि पतले लोगों को कमर दर्द नहीं होता। खासतौर से उन लोगों को जिन्हें एनोरेक्सीया होता है। न्यूत्रिशन की कमी के चलते उनकी हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं और आसानी से फ्रैक्चर हो जाता है या वर्टीब्रा (रीढ़ की हड्डी के जोड़) टूट जाते हैं।

मिथ: रेग्युलर एकसरसाइज से नहीं होता बैक पेन नहीं होता
रेग्युलर एकसरसाइज से कमर दर्द से बचा जा सकता है। लेकिन अगर किसी को गंभीर चोट्ट के चलते कमर के निचले हिस्से मे दर्द है तो डॉक्टर आपको इसके अनुकूल एक्सरसाइज बताएँगे, जिसकी शुरुआत हल्के एक्सरसाइज से की जाती है और धीरे-धीरे इंटेन्स एक्सरसाइज की तरफ बढ़ा जाता है। एक बार दर्द ठीक हो जाने के बाद नियमित एक्सरसाइज दर्द को वापस लौटने से रोक सकती है।

मिथ: हार्ड बिस्तर पर सोना बेस्ट है
एक स्पैनिश स्टडी के मुताबिक, ऐसे लोगों मे जिन्हें देर तक खड़े होने से या अनिश्चित टाइप का कमर दर्द होता है उन्हें मीडियम हार्ड बिस्तर पर सोने से राहत मिलती है। बेस्ट है कि आप हार्ड और सॉफ्ट के 10 पॉइंट स्केल मे अपने लिए 5.6 रेटेड गद्दे का इस्तेमाल करें। स्टडी मे पाया गया कि ऐसे गदद्दों का इस्तेमाल करने वालों को अन्य कि तुलना मे कम बैक पेन होता है। हालांकि कमर दर्द के लिए काफी हद तक सोने का तरीका भी जिम्मेदार होता है। अलग-अलग लोगों को लिए अलग-अलग गद्दे बेहतर साबित हो सकते हैं।

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