मैं भी एक सरदार हूँ!

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हाल ही मे मैं अपने एक दोस्त की बेटी की शादी मे गया हुआ था। शादी के टाइम पर वहाँ मुझे भी सिख पगड़ी बांधनी थी। ऐसा इसलिए क्योंकि दूल्हा सिख है। बाई चांस,जब तक मैं शादी मे पहुंचा,तब तक आरिजिनल पंडित जो कि सबको पगड़ी पहना रहे थे,वहाँ से जा चुके थे। ऐसे मे बचे हुए लोगों को टर्बन बांधने का काम एक अन्य सीनियर कार्डियोलोजिस्ट को सौंप दिया गया था, जो खुद भी सिख हैं।

सिख टर्बन पहनकर मैं बहुत एक्साइटेड फील कर रहा था तो मैंने कुछ फोटो भी क्लिक कराई। इसके बाद अचानक,मेरे अन्तःमन से एक आवाज आई,“क्या मैं सरदार नहीं हूँ”?

कुछ दशक पहले भी इसी तरह का ख्याल मेरे मन मे आया था,जब मैंने रोटरी क्लब जॉइन किया था,और मुझे यह रियालाइज हुआ कि मैं तो रोटरी क्लब जॉइन करने से पहले भी एक रोटेरियन से कहीं ज्यादा था।

मेरे हिसाब से असली सरदार होने का मतलब है सिख प्रेयर के सही मतलब को समझना है,जो मैं मेरी समझ से कुछ इस तरह है:

  1. इक ओंकार- जिसका मतलब है,ईश्वर एक है और वह मेरे भीतर है। ऐसे मे मेरे लिए अपने भगवान के संपर्क मे रहना संभव है।
  2.  अपने भगवान तक पहुँचने और उनके संपर्क मे रहने के लिए मुझे अगली तीन लाइने फॉलो करने की जरूरत है-सत नाम और कर्ता पुरख’,जिसका मतलब है,मुझे हर स्थिति मे सत्य का रास्ता अपनाना है और निस्वार्थ कर्म करना है। मेरे लिए सच्चाई का मतलब, जो भी मैं सोचता हूँ, कर्ता हूँ या बोलता हूँ, उसका पर्यायवाची है और निःस्वार्थ कर्म का मतलब है, बिना किसी आकांक्षा के कर्म करना। और जब मैं ये दोनों रास्ते अख़्तियार कर आगे बढ़ता हूँ, मैं अपने भगवान के संपर्क मे होता हूँ।
  3. मैं यह कैसे जान सकता हूँ कि अपनी चेतना मे मैं अपने भगवान के संपर्क मे हूँ, इसके लिए मुझे आगे की दो लाइनें समझने की जरूरत होटी है,“निर्भय और निर्विकार” इसका मतलब है कि मैं एक निर्भीक जीवन जीना शुरू कर दूंगा और फिर मेरे दुश्मन भी धीरे-धीरे मेरे मित्र बनने लगेंगे।
  4. और जब मैं ऐसा कर लेता हूँ तब अपनी चेतना, भगवान को अगली दो लाइनों से समझता हूँ,“अकाल मूरत अजूनी साईंभ” जिसका मतलब है वह सर्वोपरि,अंतर्यामी और सर्वव्यापी है। वह न तो कभी जन्म लेता है और न ही मरता है, स्वतः ही नया रूप लेता है।
  5. सिख प्रेयर की अगली लाइन यह बताती है कि जो ये सिद्धान्त अपनाकर चलते हैं वे ही असली सरदार हैं। ऐसे मे, मैं यह सोचने लगा कि 100% न सही, मगर सरदार की कुछ विशेषताएँ तो मेरे अंदर भी हैं।
  6. ऊपर कही सारी बातें सत्य थीं, सत्य हैं और हमेशा सत्य रहेंगी क्योंकि ऐसा गुरु नानक जी ने कहा था, और उन्होने कभी झूठ नहीं बोला।

 

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