जानिए तपती गर्मी को छकाने के ‘ऑड- इव्न’

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beat the heatफ्री स्टाइल मुक्केबाजी में माहिर विजेंद्र सिंह या उसके जैसा कोई भी पेशेवर बॉक्सर गहन व्यायाम करने के बाद गर्मी से तवे की तरह तपे अपने शरीर को गर्म कपड़े से ढक लेते हैं। आड यानी अटपटा सा लगता है ना। लेकिन यह इव्न है यानी बराबर है। वर्क आउट करने के तत्काल बाद वे अगर ठंडे पानी का शोअर लेने लगें तो समझिए मुक्केबाजी का बेरा गर्क।

तपती गर्मी से घर आकर तत्काल आप गर्म गर्म चाय पी लें तो कोई बात नहीं लेकिन अगर बर्फ मारा हुआ कोक यह सोच कर गटक जाएं कि तपते शरीर को राहत मिलेगी तो आप जोखिम उठा रहे हैं। क्षण भर के लिए भले थोड़ी शीतलता का एहसास हो लेकिन यह आदत आपको बीमार बहुत बीमार बना देगा। इसलिए दो चरम तापमानों के बीच जगह बदलने की बारीकी को समझना बेहद जरुरी है।

दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए सरकार द्वारा चलाए गए ‘आड इव्न’ कार्यक्रम के बारे में इधर आपने दिन रात सुना होगा। इससे प्रदूषण कम हुआ या नहीं , इस पर भारी विवाद है। लेकिन हीट को बीट करने के ‘ऑड इव्न’ को अगर आप आत्मसात कर लें तो जीवन भर शीतल और सुरक्षित भी बने रहेंगे। आपने बीट को हीट करने के मंसबे बांध रखें हैं तो नीचे कुछ नामचीन विशेषज्ञों की नीचे दी हुई कुछ बारीक बातों की अनदेखी ना करें।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की पूर्व डायिटिशियन प्रमुख एवं डायबिटिज फाउंडेशन ऑफ इंडिया की अध्यक्ष डॉ. रेखा शर्मा कहती हैं कि यह सही है कि प्यास लगे या ना लगे हीट को बीट करने के लिए शरीर को द्रव पदार्थ से तर (हाइड्रेट) रखना जरुरी है। जो द्रव पदार्थ लें उसमें चीनी और नमक की मात्रा भी जरुर हो लेकिन शरीर को तर रखने में कुछ बातों का ध्यान बेहद आवश्यक है। नहीं तो उल्टा हो सकता है। अफरातफरी में गर्मी से अचानक ठंड में या ठंड से अचानक गर्मी में निकल आने के जोखिम का खयाल ही नहीं रहता लेकिन सुरक्षित रहने के लिए ठिठकने की अदा सीखनी भी जरुरी है।

शर्मा कहती हैं-तपती गर्मी के बीच अगर आप जिस ठंडी चीज से अपने शरीर को बाहर या अंदर से तर कर रहे हैं उसका तापमान अगर आपके शरीर के तापमान से बहुत कम है तो फिर आप जोखिमभरा काम कर रहे हैं। अच्छा यह होगा कि आप कुछ देर अपने शरीर को भी ठंडाने दें।

गर्मी में एयरकंडीशन अब कोई लक्जरी नहीं है। आमफहम आदमी भी अब एसी लगा रहे हैं। लेकिन चिलचिलाती धूप से बचने के लिए एसी कमरे में बंद रहना जोखिम भरा भी है।

वैशाली स्थित मैंक्स अस्पताल में प्रीवेंटिव हेल्थ प्रोग्राम की प्रमुख डॉ. रूबी बंसल ने कहा कि एसी त्वचा को ड्राइ करने के साथ साश फंफूद संक्रमण का कारण भी बनता है। एसी हवा की नमी पूरी तरह से सोख लेता है । इस सूखी हवा से सांस की नली में जलन पैदा हो सकती है। एसी का फिल्टर अगर पुराना हो गया है तो वह बैक्टीरिया और फंफूद का घर बन जाता है जो पूरे कमरे में घूमता रहता है।

इसलिए बीच बीच में एसी को बंद करना और एसी के बिना रहना सीखना भी श्रेयस्कर है। और घर से निकलना हो तो कुछ देर के लिए एसी को बंद कर अपने को तपती धूप में जाने लायक गर्म कर लें तो बराबर है।

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