बाजारों मे नकली दवाओं की भरमार

Share:

भारत में नकली दवाओं का कारोबार बढ़ता जा रहा है और ये दवाएं देश में धड़ल्ले से बेची जा रही हैं। नकली दवाओं में एंटीबायोटिक को सबसे ज्यादा बेचा जाता है। इन दवाओं के सेवन से मौत होने तक की नौबत आ जाती है। देश में मौजूद दवाओं में करीब 12%-25%  तक नकली दवाएं बेची जा रही हैं। क्योंकि इनसे मोटा मुनाफा कमाया जाता है।

देश में बिकने वाली नकली दवाएं
देश में बिकने वाली नकली दवाओं में सबसे ज्यादा एंटीबायोटिक दवाएं हैं। इनकी बाजार मे बिकने वाली दवाओं मे हिस्सेदारी 0.1%-0.3% है। वहीं चार से पांच फीसदी दवाएं ऐसी हैं जो अपने मानकों पर खरी नहीं उतरतीं।

केंद्र सरकार के राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में ये तथ्य सामने आए हैं। दिल्ली में शुरू हुए इंटरनेशनल ऑथेंटिकेशन कांफ्रेंस में केंद्रीय मानक नियंत्रण संगठन के उपनिदेशक रंगा चंद्रशेखर ने बताया कि नकली दवाओं के विश्वसनीय आंकड़ों पर अब तक सर्वेक्षण नहीं हुआ था।
चंद्रशेखर ने बताया कि सरकार ने देशभर से 47 हजार नमूने एकत्र किए। नकली दवाओं में एंटीबायोटिक के बाद एंटीबैक्टीरियल दवाओं का स्थान है। उन्होंने कहा निर्यात से पहले सभी दवाओं की जांच होती है। ऐसी दवाओं के लिए ड्रग ऑथेंटिकेशन एंड वेरिफिकेशन एप्लिकेशन (दवा एप) भी बनाया है। सरकार घरेलू बाजार के लिए भी यह एप लागू करने पर विचार कर रही है।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नकली दवाओं का बाजार
भारत में 1.10 लाख करोड़ रुपए का दवाओं का बाजार है। देश में दिल्ली, यूपी, गुजरात, हरियाणा, बिहार और एमपी नकली दवाओं के बड़े बाजार हैं।
दुनियाभर में करीब 90 अरब डॉलर का नकली दवाओं का कारोबार है। चीन, जापान, पाक, कनाडा, मैक्सिको और ब्राजील जैसे देश नकली दवाओं के लिए सबसे ज्यादा चर्चित हैं।

लगाम क्यों नहीं
बिकने वाली दवाओं का कोई भी कॉपीराइट नहीं होता है। कंपनियां का रजिस्ट्रेशन भी नहीं होता है। जिसके अंतर्गत दवाओं का लैब में परीक्षण हो सके।

ऐसे रहें सजग
बाजारों मे चारकोल से बनी दर्द निवारक दवाएं, जहरीले आर्सेनिक वाली भूख मिटाने की दवा बेची जाती है। ऐसी दवाओं से भी मौत हो सकती है। नकली दवाओं से बचने के लिए इन बातों का ख्याल रखें।
-सस्ती दवाओं को बिल्कुल भी न खरीदें।
-दवाएं सिर्फ रजिस्टर्ड दुकानों से ही खरीदें।
-रैपर पर दवा का नाम और कंपनी अच्छी तरह से जांच कर लें।
-लंबे समय इस्तेमाल के बाद भी असर न हो रहा हो तो दवा नकली हो सकती है।
-कुछ कंपनियों ने बार कोड और ग्लोसाईन का भी इस्तेमाल शुरु किया है।

Share:

Leave a reply