3 दिनों की तकलीफ पर भारी पड़ी एक मुस्कान

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carelessness could be dangerous for childrenसुबह के 11बजे थे। उस दिन ऑफिस में ही थी, घर से पापा का फोन आया कि ईरा  की तबियत खराब है, घर आ जाओ। मम्मी पापा छोटी-छोटी बात के लिए ऐसे कभी घर नहीं बुलाते। आज उनका ऐसा कहना अजीब लग रहा था। खैर, बॉस से इजाजत लेकर घर के लिए निकल गई। रास्ते भर यही सोचती रही कि बार-बार पूछने पर भी यही कह रहे थे नहीं, कुछ नहीं हुआ, बस थोड़ा रो रही है और याद कर रही है। ऐसा तो ईरा रोज करती है, तो फिर आज क्यों आने के लिए कहा। घर पहुंची, तो असली बात का पता चला।

ईरा, मेरी 2 साल की बेटी, मेरी मम्मी यानी अपनी नानी के साथ किचन में थी। मम्मी खाना बना रही थीं। ईरा को कुछ खाने के लिए दिया और वहीं किचन की स्लैब पर बिठा लिया। जैसे ही कूकर की सीटी ने खाना पकने का सिग्नल तेज आवाज के साथ दिया, नन्ही ईरा घबरा गई और स्लैब के ऊपर खड़ी हो गई। ईरा का चेहरा दीवार की तरफ था। वह ऐसे डिस्बैलेंस हुई कि पीठ की ओर से नीचे गिर गई। उसका सिर तेज आवाज के साथ फर्श पर लगा। मम्मी ने 55 साल की उम्र में भी उसे उठाने में जो फुर्ती दिखाई, वह काबिल-ए-तारीफ थी। लेकिन वह उसे बचा पातीं, इससे पहले ही ईरा का सिर फर्श को छू चुका था। दर्द से ईरा बदहवास चिल्ला रही थी। उसके चिल्लाने से ज्यादा उसके नाना-नानी को उसके सिर से निकली एक भी बूंद से सख्त परहेज था। जब अच्छी तरह तसल्ली हो गई कि खून नहीं निकला है, तो उसे गले लगाकर चुप कराना शुरू किया। कुछ देर रोने के बाद ईरा चुप हो गई। अब तक आधा घंटा बीत चुका था।

पापा ने उसे अभी गोद में ही लिया हुआ था कि अचानक उसे उल्टी हो गई। गिरने से पहले उसने जो भी खाया, वह उसे उलट चुकी थी। मम्मी को मालूम था कि गिरने के बाद अगर बच्चा उल्टी कर दे, तो बात चिन्ता की होती है। इसलिए घर में रखी होम्योपैथिक गोली आर्निका मोल्ड की 4-5 गोलियां उन्होंने उसे दे दी। लेकिन यह क्या, कुछ ही देर में दूसरी उल्टी हो गई। इसके बाद तो हर 20-25 मिनट पर उसे उल्टी होने लगी। मैं घर पहुंची, तो मुझे देखते ही रोने लगी। मम्मी ने बताया कि सुबह से जो खाया था, बाहर निकल गया है। पेट खाली है उसका। इस पर मैंने फीड कराने की कोशिश की। लेकिन पीते-पीते उसने दूध भी उलट दिया। अब मेरी चिंता बढ़ रही थी। घर के पास एक चाइल्ड स्पेशलिस्ट का क्लीनिक था, जो शाम को 5 बजे खुलता था। वक्त पर हम ईरा को वहां ले गए। पहला नंबर चल रहा था और हमारा नंबर तीसरा था। इस बीच ईरा को एक उल्टी और हो गई। नंबर आने पर डॉक्टर ने चेक किया। उन्होंने बताया कि यूं तो बच्चे की एक्टिविटी ठीक लग रही है, पर 48 घंटे तक कुछ भी कहना मुश्किल है। उन्होंने सिर को ठीक से चेक किया और अपने पास से दवाई दे दी। हम ईरा को घर ले आए।

उसका मन कुछ ठीक हो, इसलिए मैं उसे बाहर कॉलोनी में ही घुमाने लगी। आसपास काफी बच्चे खेल रहे थे। ईरा भी गोद से नीचे उतर गई और थोड़ा खेली। मुझे लगा, चलो राहत मिली। रात 9 बजे तक उसकी उल्टियां कंट्रोल में थीं। लगा जैसे दवाई असर कर रही है, लेकिन 10 बजते-बजते उसने फिर उल्टी की। एक के बाद एक, सुबह 4 बजे तक उल्टियों का सिलसिला जारी रहा। चिंता में घड़ी की सुइयां धीरे- धीरे चलती महसूस हो रही थीं। बस किसी तरह सुबह होने का इंतजार था। कमजोरी के कारण ईरा चुपचाप बिस्तर में आंखें बंद किए लेटी थी। सुबह होते ही हम तुरंत उसे अस्पताल लेकर दौड़े। नंबर आते-आते 2 घंटे लग गए। डॉक्टर ने देखते ही कहा, एडमिट करवा दो। सिटी स्कैन कराना पड़ेगा। उसके बाद ही कुछ कह सकते हैं। ईरा की हालत ही ऐसी थी, कि एडमिट कराने की बात पर मुझे कोई हैरानी नहीं हुई। उसे एडमिट कर लिया गया। चाइल्ड वार्ड में ईरा जैसे बहुत से छोटे बच्चे एडमिट थे, जो किसी न किसी परेशानी से जूझ रहे थे। नर्स उसे ड्रिप लगा चुकी थी। नन्हें हाथों में बैंडेज देखकर दिल बाहर को आ रहा था। किसी तरह खुद को संभाला। ईरा के सामने स्माइल करना ही था। सिटी स्कैन कराते-कराते रात हो गई। सुबह 11 बजे तक उसकी रिपोर्ट आई। इस बीच रातभर ईरा को ड्रिप के सहारे दवाइयां दी गईं। पर रात को भी उसे उल्टी हुई। बमुश्किल वह सो सकी।

सुबह डॉक्टर के राउण्ड लेने से पहले ईरा के सिटी स्कैन की रिपोर्ट आ चुकी थी। चाइल्ड स्पैशलिस्ट ने रिपोर्ट को ध्यान से देखा और बोली, रिपोर्ट में सिर में थोड़ी सूजन के बारे में लिखा है। बाकी एक बार न्यूरोसर्जन का ओपिनियन लेना जरूरी है। उसके बाद शायद वह अपनी दवाई बताए। अब न्यूरोसर्जन को कन्सल्ट किया गया। पता लगा, वह अभी बिजी हैं। कल सुबह राउण्ड लेने आएंगे, तभी बात हो पाएगी। एक दिन और अस्पताल में रुकने के बारे में सोचकर माथे पर सिलवटें आ गईं। शाम को उस न्यूरोसर्जन की दो असिस्टेंट हमारे पास ईरा की रिपोर्ट लेने आईं, तो पता चला कि हमारी चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. बिन्दु ने फोन पर न्यूरोसर्जन से इस केस के बारे में डिस्कस किया था। मुझे खुशी हुई कि देहरादून के एक ट्रस्ट हॉस्पिटल में भी डॉक्टर्स इतना सिनसियरली काम करते हैं। मैंने उन्हें रिपोर्ट दे दी। वे रिपोर्ट लेकर चली गईं और करीब 1.5 घंटे बाद मुझे आकर बताया कि सर ने कहा है, सब ठीक है। सुनते ही मैंने कहा, लेकिन रिपोर्ट में तो लिखा है, सूजन है। फिर सब ठीक कैसे है?  मैंने कहा, मुझे उनसे पर्सनली मिलना है। कब मिल सकते हैं। जवाब मिला, सुबह 8 बजे। रात उनसे मिलने के इंतजार में कटी। अब तक ईरा की तबियत में काफी सुधार आ चुका था। वह खेल भी रही थी, बात भी कर रही थी। लेकिन उसने कुछ खाया नहीं था, बस फीड पर थी।

सुबह-सुबह मैं और पापा न्यूरो वार्ड में ईरा को लेकर पहुंच गए। न्यूरोसर्जन डॉ. पंकज अरोड़ा पेशंट्स को देखने में बिजी थे। उनके असिस्टेंट से मीटिंग के बारे में बात की, तो डॉ. पंकज खुद हमारे पास आ गए। मैंने उन्हें सिटी स्कैन की रिपोर्ट और फिल्म दोनों दिखाए। डॉ. पंकज ने कहा, ये तो मैंने शाम को देखा था, आपका बच्चा बिल्कुल ठीक है। मैंने तुरंत कहा, लेकिन सर, रिपोर्ट में तो लिखा है कि सिर में सूजन है। उनका जवाब बड़ा हैरान करने वाला था। उन्होंने कहा, कि सिटी स्कैन चैम्बर में नए-नए लड़के बैठे होते हैं, उन्हें कुछ न कुछ तो लिखना ही होता है। फिल्म में सब ओके है। आप यकीन रखिए, आपका बच्चा बिल्कुल ठीक है।

कुछ देर तक सोचती रही, ये सब क्या है? खैर, डॉक्टर की बात मानने के अलावा कोई चारा नहीं था। उन्होंने अब कोई मेडिसिन उसके लिए नहीं लिखी थी। लिहाजा, उनका धन्यवाद कह हम वापस घर की राह पकड़ चुके थे। ईरा की मुस्कान ने पिछले तीन दिनों की थकान को फुर्र कर दिया था।

ध्यान रखेः- घर में खेलते वक्त अक्सर बच्चे गिर जाते हैं। कभी अपनी गलती से, तो कभी हम बड़ों की गलतियों से। लेकिन परेशानी की बात तब होती है, जब ऊंचाई ज्यादा हो। ऐसे में ध्यान रखें, यदि 24 घंटे के अंदर-अंदर बच्चा उल्टी करे, तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं और सिटी स्कैन आदि कराकर पूरी तसल्ली कर लें। सिर में लगी चोट, आज नहीं तो कल, कभी भी सिर उठा सकती है। इसलिए लापरवाही कतई न करें।

 

 

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3 comments

  1. NARESH KAMAL 22 February, 2016 at 16:42

    आपका लेख अच्छा लगा। अपनी बेटी के प्रति आपकी चिंता स्वाभाविक थी। सभी माता-पिता को यह लेख पढ़नाचाहिए।

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