डियोड्रेंट: खुशबू तक सीमित नहीं है असर!

Share:

deo

एक व्यक्ति को कितना पसीना आता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसकी कितनी स्वेट ग्लैंड यानी पसीना छोड़ने वाली ग्रंथियां सक्रिय हैं। लेकिन ऐसा देखा गया है कि एक स्वस्थ पुरूष को एक स्वस्थ महिला की तुलना में ज्यादा पसीना आता है। एक समान स्वेट ग्रंथियां सक्रिय होने के बावजूद महिलाओं को कम पसीना आता है। एक फिट व्यक्ति को वर्जिस के दौरान ज्यादा पसीना आता है लेकिन उनके शरीर का तापमान इस दौरान कम रहता है, वहीं अगर एक मोटापाग्रस्त व्यक्ति उतनी ही देर मेहनत करता है तो उसके शरीर का तापमान ज्यादा बढ़ जाता है और पसीना भी ज्याद आता है। इतना ही नहीं एक मोटे व्यक्ति को सामान्य वजन वाले व्यक्ति की तुलना में वैसे भी पसीना ज्यादा आता है, क्योंकि उनके शरीर का फैट उष्मारोधी की तरह काम करता है और इसके चलते शरीर का मूल तापमान बढ़ जाता है:

हाइपरथर्मिया
कुछ लोगों को बहुत ही ज्यादा पसीना आता है, यह एक आम समस्या है जिसे हाइपरथर्मिया कहते हैं। इससे पीड़ित लोगों की हथेली, पैर, पीठ और चेहरा हमेशा पसीने से डूबा रहता है, यहां तक कि ठंडे मौसम में भी। अगर ऐसी समस्या है तो तुरंत इलाज के विकल्प जानने के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।

डियो और एंटी पर्सपिरेंट में फर्क
डियो-शरीर से दुर्गंध आने का मुख्य कारण होता है पसीने के साथ बैक्टीरिया का मिलना, जो कि प्राकृतिक रूप से हमारे शरीर पर जीवित रहते हैं और पसीने के साथ मिलकर तेजी से बढ़ते हैं। डियो इन बैक्टीरिया को प्रभावित करता है। यह पसीना आने से नहीं रोकता। यूएस एफडीए के मुताबिक, त्वचा पर नुकसान के साथ-साथ इसका एक बड़ा खतरा भी देखा गया है, जिसके बारे में शायद ही कोई जागरूक है। यूएस एफडीए ने के मुताबिक गुर्दे की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए इसका नियमित इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है। डियो में इस्तेमाल होने वाला एल्युमिनियम उनके लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में गुर्दे की समस्या से पीड़ित लोगों को एल्युमिनियम वाले उत्पाद के इस्तेमाल के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

ऐसे काम करता है एंटीपर्सपिरेंटः
एंटी पर्सपिरेंट हमारे शरीर की स्वेट ग्लैंड को बंद करके त्वचा तक पसीना पहुंचने से रोकने के लिए डिजाइन किए गए हैं। अधिकतर एंटी पर्सपिरेंट में पाया जाने वाला सबसे आम सक्रिय तत्व है एल्युमिनियम। एल्युमिनियम शरीर के पोरछिद्र बंद कर देता है ताकि पसीना इनसे बाहर न आ सके। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे काफी दावे किए गए हैं कि एल्युमिनियम का संबंध ब्रेस्ट कैंसर और अल्जाइमर से हैं, मगर इसकी पुष्टि के लिए और रिसर्च की जरूरत है। एल्युमिनियम वाले कई एंटी पर्सपिरेंट से कपड़ों पर पीले दाग दिखते हैं। हम अक्सर किसी दोस्त अथवा घर के सदस्य के कपड़ों को देखकर हैरान होते हैं कि यह पीलापन आया कहां से। तो अगर आपके दिमाग में भी इस तरह का सवाल उठता है तो एल्युमिनियम कॉम्प्लेक्स को पसीने के साथ मिलाइये, जवाब खुद ब खुद मिल जाएगा।

अल्कोहल बेस्ड स्प्रे से रहें दूर
डियोडरेंट पसीने की नमी में पनपने वाले बैक्टीरिया से आने वाली दुर्गंध को रोकते हैं। चूंकि एल्युमिनियम कंपाउंड्स और अल्कोहल त्वचा पर जल्दी सूखते हैं और ठंडक देते हैं ऐसे में अधिकतर डियोडरेंट में इनका इस्तेमाल होता है। कुछ लोगों में इन चीजों से एलर्जी होती है, जिससे बड़ी समस्या हो सकती है। इससे अंडरआर्म में जलन होती है और त्वचा अन्य स्प्रे के लिए भी सेंसेटिव हो जाती है। अगर आपको भी ऐसी कोई दिक्कत हो रही है तो तुरंत किसी डर्मेटोलॉजिस्ट से संपर्क करें।

समझें डियो और परफ्यूम का फर्क
बाजार में उपलब्ध अधिकतर डियोडरेंट में अल्कोहल और एंटीबैक्टीरियल होते हैं, यही वजह है कि ये बदबू से बचाते हैं। परफ्यूम से ऐसा नहीं होता, लेकिन उसकी खुशबू लंबे समय तक रहती है। वहीं दूसरी ओर डियोडरेंट की खुशबू थोड़ी देर बाद ही उड़ जाती है। लगभग सभी तरह के सस्ते महंगे डियोडरेंट में 6 से 15 पर्सेंट खुशबू वाले ऑयल 80 पर्सेंट अल्कोहल के साथ मिले होते हैं। वहीं दूसरी तरफ परफ्यूम में 15 से 25 पर्सेंट खुशबू वाले ऑयल मिले होते हैं।

इन केमिकल्स से रहें दूर
-एल्युमिनियम बेस्ड डियोडरेंट आपकी पसीने वाली ग्रंथि को बंद कर सकते हैं ताकि पसीना त्वचा की परत तक न पहुंचे। कई स्टडी में यह भी पता लगा है कि कई एल्युमिनियम त्वचा के भीतर जाकर ब्रेस्ट की कोशिकाओं में एस्टृजन रिसेप्टर में बदलाव कर देते हैं।
-मिथाइलपैराबीन, प्रोपाइलपैराबीन, इथइलपैराबीन जैसे केमिकल जो कि बहुत सारे कॉस्मेटिक प्रॉडक्ट में इस्तेमाल होते हैं, इनसे ब्रेस्ट कैंसर का खतरा होने की आशंका पर रिसर्च हो रही है।

दुर्गंध से बचाव में प्राकृतिक तरीके भी हैं कारगर
सर्दी के दिनों में कम से कम एक बार और गर्मी में दो बार जरूर नहाएं। इससे न सिर्फ पसीना धुल जाएगा बल्कि शरीर पर पनपने वाले बैक्टीरिया भी। हर बार साफ धुले हुए कपड़े पहनें। पसीना अपने आप में दुर्गंध रहित होता है। जब शरीर पर पनपने वाले माइक्रोस्कोपिक बैक्टीरिया इसके साथ मिलते हैं तब दुर्गंध पैदा होती है। ऐसे में पसीना आने वाली जगहों को बार-बार अच्छे से धोना दुर्गंध से बचाव में कारगर हो सकता है।

बेकिंग सोडा भी है विकल्प
बेकिंग सोडा एक प्राकृतिक क्लींजर और डियोडरंट है। कांख की दुर्गंध से बचाव के नुस्खे के तौर पर इसका काफी इस्तेमाल होता रहा है। इसका सोडियम बाईकार्बोनेट पसीना आने से नहीं रोकेगा लेकिन इसमें दुर्गंध पनपने से जरूर बचाएगा। नहाने से पहले अपने अंडरार्म में थोड़ा बेकिंग सोडा छिड़कें और असर देखें। आप इसे एक साफ वॉशक्लाथ पर भी छिड़क सकते हैं और जरूरत पड़़ने पर इससे अंडरार्म पोछ सकते हैं।

ये नुस्खे भी हो सकते हैं कारगर
एलोवेरा-एलोवेरा त्वचा की सेहत सुधारता है। यही वजह है कि तमाम अच्छे सौंदर्य उत्पादों में इसका इस्तेमाल होता है। यह त्वचा को पर्याप्त नमी और पोषण देता और नए स्किन टिश्यू को जल्दी बनने में मदद करता है। ज्यादातर लोग एलोवेरा के बाहरी इस्तेमाल से परिचित होते हैं, जबकि एलोवेरा जूस पीने से रक्त की असुद्धियां दूर होती हैं और त्वचा में प्राकृतिक निखार आता है। यह त्वचा की सेहत दुरूस्त कर दुर्गंध वाले बैक्टीरिया के पनपने को नियंत्रित कर सकता है।
कपूर-डियोडरंट की जगह कपूर का इस्तेमाल करें। यह आपके स्वेट ग्लैंड को प्रभावित न करते हुए पसीने की दुर्गंध को रोकेगा।
गुलाब जल-नहाने के पानी में गुलाब जल की कुछ बूंदें डालें। यह लंबे समय तक आपको ताजगी का एहसास कराएगा और डियोडरंट के प्राकृतिक विकल्प का काम करेगा।

खान-पान में बदलाव भी है जरूरी
-शरीर की गंध का संबंध हमारे खान-पान से भी होता है। प्रॉसेस्ड फूड जैसे कि रिफाइंड शुगर, मैदा और वनस्पति घी जैसी चीजें दुर्गंध का कारण हो सकती हैं, ऐसे में इनसे परहेज करना चाहिए। रेड मीट, लो फाइबर वाली चीजें, अल्कोहल, कैफीन, जीरा और लहसुन जैसी चीजें कम खाएं।
-साबुत अनाज, हरी सब्जियां, फल, सोया प्रॉडक्ट, अंकुरित अनाज और बादाम आदि खाएं। अपने नियमित के खान-पान में मूली शामिल करें।
-शरीर में मैग्नीशियम या जिंक की कमी और मीट, अंडा, फिश लिवर, बींस, प्याज, लहसुन, तली हुई और फैटी चीजों का ज्यादा इस्तेमाल भी शरीर का दुर्गंध बढ़ा सकता है।
-कुछ मसाले भी सांस और शरीर की दुर्गंध का कारण बन सकते हैं। काफी तेज खुशबू वाले मसाले शरीर में जाकर आमतौर पर ये सल्फर गैसें बनाते हैं, जो कि खून में घुल जाते हैं और फेफड़े व रोमछिद्र के जरिए बाहर निकलते हैं। उदाहरण के तौर पर लहसुन, प्याज।

इन बातों का भी रखें ध्यान
-अगर आपके पास कई बार नहाने का टाइम नहीं है तो सिंक में पानी भरें और इसमें 4 चम्मच बेकिंग सोडा डालें। इसमें एक स्पॉंज या वॉशक्लॉथ डुबाएं और इससे रगड़कर पसीने वाली जगहों को साफ कर लें।
-अगर आपके पैरों से दुर्गंध आती है तो ओडोर-एब्जॉर्बिंग इंसोल अपने फुटवियर में रखकर पहनें। नहाते समय पैरों को स्क्रब करें और नहाने के बाद इन्हें अच्छे से सुखाएं।
-कॉटन जैसे नेचुरल फाइबर से बने कपड़े ही पहनें। इसमें हवा आसानी से पास होती है। सिंथेटिक, नायलॉन या लाइक्रा जैसे फैब्रिक पहनने से बचें, इनमें वेंटिलेशन ठीक से नहीं होता है।
-सीधे धूप में बैठने से बचें।
-योगा को अपने नियमित दिनचर्या में शामिल करें। इससे तनाव कम होगा। गर्मी से तनाव बढ़ता है और इससे पसीना अधिक आता है। ऐसे में योगा फायदेमंद हो सकता है।

Share:

Leave a reply