एक ही जिगर के दो टुकड़े लेकर अलग हुईं बहनें

6175
0
Share:

First Indian conjoint twins with a common liver successfully separated
एक लीवर के साथ पैदा हुई आपस में जुड़ी जुड़वां बहनों को अति दुर्लभ सर्जरी से सफलतापूर्वक अलग किया गया
10 दिन पहले मेदांता में डॉक्टरों ने एक अति दुर्लभ ऑपरेशन को अंजाम दिया, जब उन्होंने 2 महीने की जुड़वां बहनों- सबूरा और सफूरा को सफलतापूर्वक अलग किया, जिनके पेट आपस में जुड़े थे और जन्म से दोनों का एक ही लीवर था (तकनीकी तौर पर ऐसा मामला ऑम्फेलोपेगस कहलाता है)। यह जुड़वां बच्चों का अति दुर्लभ मामला है, जो लीवर से जुड़ीं हैं और उन्हें सफलतापूर्वक अलग किया गया हो।

इस ऐतिहासिक सर्जरी को अंजाम देने वाली लगभग 40 डॉक्टरों की टीम का नेतृत्व करने वाले लीवर इंस्टिच्यूट के अध्यक्ष व मुख्य लीवर सर्जन, डॉ. ए एस सोइन ने कहा, “एक लीवर सर्जन के तौर पर यह दो कारणों से मेरी जिंदगी की एक सबसे चुनौतीपूर्ण सर्जरी थी। पहला अज्ञानता का डर- किन्हीं दो इंसानों द्वारा एक ही लीवर की साझेदारी किये जाने के मामले में न तो कोई शारीरिक रचना का वर्णन है और न ही अलग करने की कोई मानक तकनीक। जुड़वां बच्चियों द्वारा साझा किये जा रहे अंग को अलग करने में अत्यधिक ब्लीडिंग का रिस्क था। और किसी एक या दोनों बच्चियों के अलग किये गए अंगों के सही ढंग से काम नहीं करने का खतरा था। यहां पर हमने रक्तहीन लीवर सर्जरी के अपने अनुभव एवं बारीकियों पर नजर रखने के लिए ऑपरेशन के पहले और उसके दौरान आधुनिक 3-डायमेन्शनल स्कैन पर भरोसा किया।

दूसरी और बड़ी चुनौती, यह तथ्य थी कि ऑपरेशन के पहले दोनों बच्चियां उस स्थिति में स्वस्थ और खुश थी तथा वे और उनके माता-पिता उनके जुड़े हुए अस्तित्व के आदी हो चुके थे। एक पल की चूक स्थिति को बदतर बना सकती थी। उन्होंने आगे कहा, “सर्जरी के पहले मैं इस विषय पर डरावने तथ्य को खंगालने के लिए बैठा कि तब, जब कि इस सर्जरी से दोनों बच्चियों की जान को जोखिम है, क्या प्रकृति के संतुलन को छेड़ना ठीक है और इस सवाल को लेकर मैं पूरी रात परेशान रहा।”

पेडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एंड लीवर ट्रांसप्लांट की निदेशक, डॉं नीलम मोहन, जिनकी टीम नें ऑपरेशन के पहले और बाद में बच्चियों की देखभाल की, वह कहती हैं, आपस में जुड़े जुड़वां बच्चों का पैदा होना दुर्लभ है और 1,00,000 बच्चों के जन्म लेने पर सिर्फ एक मामला ऐसा होता है और उनमें हर चार में से तीन मामले लड़कियों के होते हैं। इस मामले में बच्चियों को ऑपरेशन के लिए तैयार करना भी एक चुनौती थी, उनका हमेशा एक साथ होना, यहां तक कि खून के नमूने, एक्सरे और स्कैन जैसी बहुत मामूली प्रक्रियाओं के लिए भी उनके लिए विशेष व्यवस्था बनानी पड़ती थी। महत्वपूर्ण संरचनाओं का पता लगाने के लिए उनकी चार अलग-अलग प्रकार की शारीरिक जाँच जरूरी थी- एक ट्राइफेसिक सीटी स्कैन, एक न्यूक्लियर आइसोटॉप हेपेटॉबिलरी स्कैन, एक हाई रिजॉल्यूशन चेस्ट स्कैन और उनकी आंतों का एक अलग डाई स्टडी। लीवर से अलग, दिलों व उनकी भित्तियों, फेफड़ों व आँतों की भित्तियों को नुकसान पहुंचने की संभावनाओं को भी नकारना जरूरी था, जिनकी वजह से सर्जन द्वारा अंजाम दिये वाले ऑपरेशन की सारी योजना ही पूरी तरह से बदल सकती थी।”

ऑपरेशन की संभावनाओं पर टिप्पणी करते हुए डॉ. सोइन ने कहा, “हालांकि इस तरह की जुड़वां बच्चियों का पैदा होना ही दुर्लभ है, तब जब कि दोनों ही जुड़वां बच्चियों के एक लिवर है, इनके सफलतापूर्वक अलग किये जाने की संभावना 5 करोड़ में से एक थी।”

डॉ. नीलम मोहन ने आगे बताया कि जब उन्हें अलग किया गया तो उनका आईसीयू मैनेजमेंट भी मुश्किल काम था क्योंकि उनके शरीर को साझा मेटाबॉलिज्म की अचानक समाप्ती के अनुरूप ढलने में समय लगा। एनेस्थेसिया के प्रमुख डॉ. विजय वोहरा ने बताया कि यह मामला बड़ा जटिल था, क्योंकि दोनों को एक ही ऑपरेशन टेबल पर रखा जाना था लेकिन उन्हें दो अलग-अलग एनेस्थेसिया मशीनों, दो वेंटीलेटर से जोड़ना था और फिर दो एनेस्थेसिया टीम की निगरानी में रखना था। एक को दी जाने वाली दवा का दूसरे पर कैसा असर होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल था, क्योंकि उनके सिस्टम लीवर के जरिये आपस में जुड़े हुए थे।

सर्जरी के दौरान बीच में जब दोनों जुड़वां बच्चियों को अलग कर दिया गया, एक बच्ची को दूसरे ऑपरेशन कक्ष में पहुंचाया गया ताकि प्लास्टिक सर्जन उनके पेट के क्षतिग्रस्त हिस्से को दोबारा जोड़ने के लिए अलग-अलग काम कर सकें। डॉ. आर खजांची ने प्लास्टिक सर्जरी की टीम का नेत़ृत्व किया, जिन्होंने दोनों बच्चियों के पेट के निशान भरा ताकि कम-से-कम निशान रहे।

मेदांता हॉस्पिटल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सुप्रसिद्ध हार्ट सर्जन, डॉ. नरेश त्रेहन ने कहा कि यह एक जीवंत उदाहरण है कि कैसे कम-से-कम 6 विभागों वाले अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ अत्याधुनिक तकनीक द्वारा एक-दूसरे को मदद करते हुए सबूरा और सफूरा को अपनी-अपनी स्वतंत्र जिंदगी दिलाने में कामयाब हुए।
First Indian conjoint twins with a common liver successfully separated

Share:
0
Reader Rating: (0 Rates)0

Leave a reply