80 का ये फॉर्मुला दिलाएगा 80 साल का जीवन

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healthy lifestyle लंबी और सेहतमंद जिंदगी कौन नहीं चाहता है। इसे पाना कोई मुश्किल काम भी नहीं है,लेकिन आपको इतना तो याद रखना ही पड़ेगा कि इस दुनिया  मे कोई भी अच्छी चीज बिना मेहनत के नहीं मिलती है। वैसे ही अच्छी सेहत के लिए कि  अच्छी जीवनशैली अपनाने, हेल्थ पैरामीटर को आइडियल स्तर पर रखने की जरूरत होती है, और इस टारगेट तक पहुँचने मे आपकी मदद करता है 8- का फॉर्मूला। जी हाँ, 80 साल जीने के लिए 80 का फॉर्मूला। यानी, आपको अपना फस्टिंग ब्लड शुगर(fasting blood sugar)(mg%),फस्टिंग एलडीएल बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL bad cholesterol)(mg/dL) लोवर ब्लड प्रेशर (lower blood pressure) (mm Hg)और पेट की चौड़ाई (cm), यह सबकुछ 80 से नीचे रखना होगा। ऐसे लोग जिन्हें कोई बीमारी नहीं है वे अगर 80 के इस फॉर्मूले पर कायम रहें तो 100 से ज्यादा वर्षों तक जीवित रह सकते हैं।

कमर (Waist) का घेरा

पेट की चौड़ाई सामान्य से अधिक (central adiposity)होने का सीधा संबंध  का सीधा संबंध अश्वस्थता या मृत्यु का खतरा बढ़ने से है। ऐसे मे बॉडी मास इंडेक्स (body mass index) मापने के साथ-साथ कमर का घेरा भी जरूर मापें, ताकि पेट के मोटापे का आंकलन लगता रहे। पेट के मोटापे वाले मरीज (जिसे central adiposity, visceral, android, or male-type obesityभी कहते हैं) दिल की बीमारियों, डायबीटीज़, हाइपरटेंशन और डिसलिपिडेमिया के खतरे के दायरे मे ज्यादा रहते हैं।

अगर का पेट का मोटापा है तो कंप्युटेड टेमोग्राफी (CT) और मैग्नेटिक रिजोनेन्स (MRI)से इस बात का पता ज्यादा सही ढंग से लगाया जा सकता है कि आपके बॉडी फैट का डिस्ट्रीब्यूशन कैसा है,मगर सिर्फ इस उद्देश्य के ये टेस्ट कराना काफी खर्चीला है। सिर्फ वेस्ट-तो-हिप रेशियो (waist-to-hip ratio) का माप कमर की चौड़ाई का अनुमान लगाने का सही मापक नहीं है। सही माप के लिए एक फ्लेक्सिबल टेप से पेट के ऊपर बराबर नाप लेना चाहिए। एक एडल्ट व्यक्ति जिसका बीएमआई 23kg/m2से अधिक हो, कमर की चौड़ाई 80cmसे ज्यादा हो तो हाइपरटेंशन,टाइप 2 डायबीटीज़, डिसलिपिडेमिया और दिल की बीमारियाँ होने का खतरा रहता है।

ब्लड प्रेशर

लोवर ब्लड  प्रेशर 80 mmHg से कम रखना चाहिए। अगर लोवर ब्लड प्रेशर 80-90 mm  hgके बीच है तो प्री-हाइपरटेंशन माना जाएगा और अगर यह 90 से ऊपर है तो हाइपरटेंशन की कैटिगरी मे आ जाएगा। प्री-हाइपरटेंशन की कैटिगरी मे आने वाले व्यक्ति को हार्ट अटैक होने का खतरा तीन गुना अधिक रहता है और उन लोगों की तुलना मे जिनका लोवर ब्लड प्रेशर 80 से नीचे रहता है, दिल की बीमारियाँ होने का खतरा 1.7 गुना अधिक होता है। डायस्टोलिक या लोवर ब्लड प्रेशर वह प्रेशर है, जो आराम करते समय दिल की धड़कनों के बीच रहता है। अगर प्री-हाइपरटेंशन का सही समय पर अच्छे से इलाज कर दिया जाए तो हार्ट अटैक के 45% मामलों को रोका जा सकता है।

2007 यूनाइटेड पृवेंटिव सर्विसेज टास्क फोर्स (USPSTF) के दिशानिर्देशों के मुताबिक जिन लोगों का लोवर ब्लड प्रेशर 80 से कम हो उन्हें हर दो साल पर स्क्रीनिंग करानी चाहिए और जिन लोगों का लोवर ब्लड प्रेशर 80 से 89 के बीच हो तो उन्हें हर साल स्क्रीनिंग कराना चाहिए। प्री-हाइपरटेंशन वाले मरीजों को सामान्य ब्लड प्रेशर वालों के मुक़ाबले दिल की बीमारियां होने का खतरा कहीं ज्यादा होता है। सामान्य से अधिक कोलेस्ट्रॉल, सामान्य से अधिक वजन/मोटापा और डायबीटीज़ मे से कम से कम एक रिस्क फैक्टर होने पर व्यक्ति को सामान्य लोगों की तुलना मे प्री-हाइपरटेंशन की हालत मे पहुँचने का खतरा काफी ज्यादा होता है। प्री-हाइपरटेंशन और माइक्रोएल्ब्यूमिन्यूरिया के बीच भी संबंध होता है, जो कि कार्डियोवस्कुलर बीमारियों या कार्डियोवस्कुलर मृत्युदर के लिए जिम्मेदार एक कारक है।

ब्लड शुगर  

सामान्य ब्लड शुगर है 60-90 mg%। फास्टिंग शुगर 126 mg%से अधिक होने पर मैक्रोवस्कुलर और माइक्रोवस्कुलर दोनों तरह की बीमारियाँ होने का खातरा बढ़ जाता है और 90mg%से अधिक होने पर मैक्रोवस्कुलर बीमारियाँ (मायोकार्डियल ईंफ्रैक़शन,स्ट्रोक और पेरिफेरल वस्क्युलर बीमारियाँ) होने का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन माइक्रोवस्क्युलर बीमारियों (रेटिनोपैथी, न्यूरोपैथी और नेफ़्रोपैथी) के मामले मे ऐसा नहीं होता है। कार्डियोवस्क्युलर बीमारियों से बचाव के लिए ब्लड शुगर 80mg%या इससे कम रखना चाहिए।

डायबीटीज़ के रिस्क फ़ैक्टर हैं ≥45साल की उम्र, सामान्य से अधिक वजन (body mass index ≥23 kg/m2),पारिवारिक इतिहास, किसी नजदीक के रक्त संबंध वाले रिश्तेदार को डायबीटीज़ मेलिटस होना, शारीरिक व्यायाम न करने की आदत, 4.1 किलो से ज्यादा वजन वाले बच्चे के जन्म का इतिहास या जेस्टेशनल डायबीटीज़ मेलिटस, हाइपरटेंशन (blood pressure ≥140/90 mmHg),डिसलिपिडेमिया या सीरम ट्राईग्लिसराइड कंसंट्रेशन≥250 mg/dL (2.8 mmol/L), फास्टिंग ग्लूकोज टौलरेंस पहले से ठीक न होना,पोलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या किसी वस्कुलर डीजीज का इतिहास।

कोलेस्ट्रॉल (LDL Bad)

टोटल कोलेस्ट्रॉल लेवेल

  • 200 से कम है बेस्ट
  • 200 से 239 है हाई बॉर्डरलाइन
  • 240 या इससे अधिक होने का मतलब है आपको हार्ट डीजीज का खतरा ज्यादा

एलडीएल कोलेस्ट्रॉल लेवेल

  • हार्ट की बीमारियों का खतरा है तो 100 से नीचे है बेस्ट
  • 100 से 129 है बेस्ट के आस-पास
  • 13- से 159 है बॉर्डरलाइन हाई
  • 160 या इससे अधिक होने का मतलब है आपको हार्ट डीजीज का खतरा

एचडीएल कोलेस्ट्रॉल लेवेल

  • 40 से कम होने का मतलब है आओको हार्ट डीजीज का खतरा
  • 60 या इससे अधिक होने पर कम होने लगता है हार्ट डीजीज का खतरा

डाइट

कम कैलोरी खाने से हार्ट अटैक के खतरे मे कमी देखि गई है। औसतन एक ग्राम खाने मे 6 कैलोरी होती है। एक बार मे किसी को भी 80 ग्राम से ज्यादा खाना नहीं खाना चाहिए।

 एक्सरसाइज

-कार्डियोवस्क्युलर ट्रेनिंग एक्सरसाइजजिसमे 80 कदम प्रति मिनट चलना शामिल है।

– कार्डियोवस्क्युलर एक्सरसाइजजिसमे टारगेट 80% हार्ट रेट तक पहुंचने का टार्गेट रहे।

– रोज एक्सरसाइज और वॉकिंग मे 80 मिनट टाइम लगाना।

-अगर हर हफ्ते कोई 80 किलोमीटर दौड़ लगता है तो उसका सीरम एचडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है और सीरम एडिपोसिटी और सीरम ट्राईग्लिसराइड मे काफी गिरावट आती है  [Arch Intern Med 1997; 157:191]

-बिना स्पोर्ट वाली मनोरंजक एक्टिविटी के मामले मे 3 हफ्ते मे 80 मिनट की इन्वोल्व्मेंट की सलाह दी जाती है।

-दो दिन मे 80 मिनट वॉक करने की सलाह दी जाती है।

प्राणायाम

हर किसी को रोजाना 80 बार दोनों नासिका से प्राणायाम करना चाहिए।

अथवा रोज 80 बार ॐ का जाप करें

अल्कोहल

– स्वास्थ्य के लिहाज से,वे लोग जो सोशियली ड्रिंक करते हैं: पुरुषों को हफ्ते मे 80 ग्राम (10 grams is 30 ml 80 proof whisky)से अधिक अल्कोहल नहीं होना चाहिए। और महिलाओं मे यह लिमिट दो हफ्तों मे 80 ग्राम तक की होनी चाहिए।

-किसी को दिनभर मे 80 एमएल से ज्यादा व्हिस्की नहीं लेनी चाहिए।


 

 

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