फिट दिखने वालों को भी हो सकता है हार्ट अटैक

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heart-attack 

पूरी तरह से स्वस्थ दिखने वाले भी  हार्ट अटैक के शिकार हो सकते हैं। इस तरह की समस्या को रोकने का सिर्फ एक ही जवाब है। और वह है हार्ट अटैक के जीवनशैली संबंधी कारणों को ध्यान में रखकर उसमें बदलाव लाना, वोर्निंग साइन  पहचानना ताकि एक्यूट हार्ट अटैक के खतरे की आशंका की जांच हो सके और यदि इसकी पुष्टि होती है तो क्लॉट डिजॉल्विंग तकनीक से खून में जमे थक्के को खत्म किया जा सकता है। लक्षण दिखने के तीन घंटे के भीतर क्लॉट डिजॉल्विंग थेरपी शुरू कर देने से मौत का खतरा 30 पर्सेंट तक कम हो जाता है।

जरूरी है जानकारी

आम लोगों को हार्ट अटैक की चेतावनी के लक्षणों के बारे में जरूर पता होना चाहिए, ताकि इन्हें पहचानकर वे मरीज को 3 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचा सकें। ये लक्षण हैं, असहज दबाव महसूस होना, भारीपन, सीने के बीचोंबीच खिंचाव अथवा दर्द महसूस होना जो कि कुछ मिनटों लगातार बना रहे; दर्द का कंधे, गर्दन या बाहों तक फैलना, सीने में असहज महसूस होने के साथ सिर में हल्का चक्कर आने  जैसा एहसास होना, पसीना आना, मितली का एहसास अथवा सांस लेने में तकलीफ होना आदि शामिल है।

कराएं रिस्क फ़ैक्टर की जांच

बचाव के लिए हर किसी को रिस्क फैक्टर की जांच अवश्य करानी चाहिए। इसमें हाई कोलेस्टृॉल, हाई ब्लड प्रेशर, अनियंत्रित डायबीटीज, काफी ज्यादा नेगेटिव स्टेस और प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष धूम्रपान जैसी समस्याएं अगर हैं तो वक्त रहते जीवनशैली में बदलाव की जरूरत है। आजकल इलाज का जो सबसे अहम पहलू होता है, वह है ब्लड में कोलेस्टृॉल की मात्रा कम करना। ब्ल डमें कोलेस्टृॉल का स्तर कम होने से प्लॉक में भी कोलेस्टृॉल की मात्रा कम होती है और यह अधिक स्टेबल यानी स्थायी बनता है। ऐसा देखा गया है कि कोलेस्टृॉल की मात्रा में एक पर्सेंट की कमी से हार्ट अटैक होने का खतरा 2 पर्सेंट तक कम हो जाता है।

स्टेबल ब्लॉकेज की वजह से हार्ट अटैक का खतरा पनपने में काफी वक्त लगता है, क्योंकि यह दिल की मसल्स तक ब्लड  पहुंचाने वाली नसों में धीरे-धीरे कई सालों में रूकावट पैदा करता है। प्लॉक के टूटने की वजह से अचानक हार्ट अटैक इसलिए होता है, क्योंकि यह अचानक खून की नस मे थक्का जमाकर पूरी तरह से रूकावट पैदा कर देता है।

स्थायी प्लॉक से रूकावट वाले मामले में इसके टूटने यानी रप्चर और थक्का जमने का खतरा सिर्फ 10 पर्सेंट रहता है, जबकि दूसरे तरह के मामले यानी अस्थायी प्लॉक के मामले में इसका खतरा 80 पर्सेंट तक रहता है। ऐसे में, उस मामले में स्टेंटिंग करना जिसमें फिक्स ब्लॉकेज अधिक है, सिर्फ दिल के दर्द से राहत दिला सकता है, मगर इससे भविष्य में होने वाले हार्ट अटैक के खतरे को कम नहीं किया जा सकता है।

ऐसे में, इसका जवाब है ब्लॉकेज को स्थिर बनाने क कोशिश करना और जीवनशैली संबंधी बदलाव व प्रभावी दवाएं देकर इसके रप्चर के खतरे को कम करना। इस प्रक्रिया में वजन कम करना और कोलेस्टृॉल, ब्लड प्रेशर व शुगर को नियंत्रण में रखने के लिए नियमित एक्सरसाइज व अन्य जीवनशैली प्रबंधन संबंधी उपाय करना शामिल है।

बेवजह की एंजियोप्लास्टी भी सुरक्षित नहीं

एंजियोप्लास्टी कराने वाले 1000 क्रॉनिक मरीजों में से, दो की मौत हो जाती है, दो को प्रॉसीजर से संबंधित हार्ट अटैक आ जाता है, 60 से 90 मरीजों के लक्षणों में सुधार दिखता है और बाकी 800 में उतना ही लाभ होता है जितना डृग टृटमेंट से होता। अग्रेसिव मेडिकल और जीवनशैली थेरपी उन सभी मरीजों को दी जानी चाहिए जिन्हें स्टेबल एंजाइना हो, बशर्ते जांच में उनके अनस्टेबल होने की पुष्टि न हुई हो।

 

 

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