अधिकतर कैंसर से बचाव है आसान

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भारत में मौत की 10 सबसे बड़ी वजहों में से एक कैंसर (Cancer) बन चुका है, बावजूद इसके इस बीमारी के बारे में लोगों में जागरूकता का बेहद अभाव है। यहां तक कि जो लोग इसके परिणामों से अवगत हैं वे भी इस बीमारी के खतरे को कम करने या बचाव के उपायों को शायद ही अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाते हैं। जबकि जीवनशैली मे बदलाव (lifestyle modifications) कर हम कई प्रकार के कैंसर के खतरे को आसानी से कम कर सकते हैं:

छोटे कदम भी होते हैं कारगर

4 फरवरी को हम विश्व कैंसर दिवस मना रहे हैं, ऐसे में यह बेहद जरूरी हो जाता है कि लोगों को इस बीमारी से बचाव के उपायों, इसके खतरों और इससे बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जागरूक किया जाए। अगर लोग कैंसर के खतरे बढ़ाने वाले कारकों को लेकर जागरूक हो जाएं और इनसे बचाव के उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें तो भारत से कैंसर के बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकता है। तंकाबू का इस्तेमाल छोड़कर और अल्कोहल की मात्रा कम करके आप कैंसर के खतरे से खुद को काफी हद तक सुरक्षित कर सकते हैं। कैंसर की निरीक्षण और स्क्रीनिंग दो अन्य ऐसे उपाय हैं जो बीमारी होने पर भी जीवन बचने की संभावनाओं को बढ़ाते हैं।

क्रेजी सेल्स होते हैं कैंसर के लिये जिम्मेदार

कंसल्टेंट अंकॉलजिस्ट डॉ. इंदु बंसल कहती हैं, कैंसर असामान्य कोशिकाओं का एक समूह होता है। इन्हें ’मैड सेल्स’ अथवा वेवार्ड सेल या क्रेजी सेल्स भी कहा जाता है। सामान्य कोशिकाएं क्रजी सेल्स में बदल सकती हैं, जो अप्राकृतिक रूप बढ़ोत्तरी करने लगती हैं और शरीर की सामान्य प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं। अगर इस प्रक्रिया की जांच न की जाए तो यह शरीर के अन्य हिस्सो तक फैल सकती है।

आसान है जांच

डॉ. बंसल कहती हैं, ’’जीवनशैली में बदलाव कर मुंह के कैंसर और फेफड़े के कैंसर से बचाव संभव है और इलाज के लिए इनका शुरूआती दौर में पता लगना बेहद जरूरी है। इन दोनों तरह के कैंसर के मामलों में तेजी से बढ़ोत्तरी होती नजर आ रही है। स्तन और गर्भाशय कैंसर ऐसे दो अन्य प्रकार हैं जिनकी पहचान साधारण और सस्ते जांच से की जा सकती है, जैसे कि अल्टृासाउंड/मैमोग्राफी और एक पैप स्मियर से। लेकिन आज भी अधिकतर महिलाएं इन जांचों के महत्व के बारे में जागरूक नहीं हैं।

रिस्क फैक्टर पर नियंत्रण जरुरी

विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर के सबसे आम प्रकार के मामलों को कुछ मुख्य रिस्क फैक्टर पर ध्यान देकर नियंत्रित किया जा सकता हैः अल्कोहल का इस्तेमाल कम करके, धूम्रपान छोड़कर, स्वस्थ आहार लेकर और शारीरिक सक्रियता बढ़ाकर। इसके साथ ही, सनस्क्रीन लगाकर खुद को सूरज की अल्टृावायलेट किरणों से बचाकर रखना भी जरूरी है। अगर टीकाकरण से एबीवी और एचपीवी जैसे संक्रमण पर नियंत्रण हो जाए तो लिवर व गर्भाशय के कैंसर के बहुत सारे मामलों पर नियंत्रण हो सकता है।

पुरूषों में आम हैं ये कैंसर

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, पुरूषों में पांच जगहों के कैंसर सबसे आम हैं, इनमें फेफड़ा, प्रॉस्टेट, कोलोरेक्टम, पेट और लिवर शामिल है। वहीं महिलाओं में स्तन, कोलोरेक्टम, फेफड़ा, गर्भाशय और पेट में सबसे ज्यादा होते हैं।

कैंसर शरीर के उन जीन्स में गड़बड़ी का परिणाम होता है जो शरीर की कोशिकाओं के विकास को नियंत्रित करते हैं। इनमें बड़बड़ी के चलते कोशिकाओं को असंतुलित विकास होता है और कैंसर हो जाता है। हालांकि, जेनेटिक असामान्यता के अधिकतर मामले पर्यावरणीय कारकों के चलते जीन में होने वाली गड़बड़ी के चलते होते हैं।

ऐसे करें बचाव
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक कैंसर से होने वाली एक तिहाई मौतों के लिए पांच व्यावहारिक आदतें और खान-पान संबंधी खतरे जिम्मेदार होते हैंः हाई बॉडी मास इंडेक्स, फल व सब्जियां कम खाना, शारीरिक सक्रियता का अभाव, तंबाकू का इस्तेमाल और अल्कोहल का सेवन। ऐसे में अगर इन पांच कारणों के साथ समझदारी से निबट लिया जाए तो बीमारी के बहुत सारे मामले स्वतः ही नियंत्रित हो जाएंगे।

स्वस्थ आहार लेंः जो लोग मांस ज्यादा खाते हैं उन्हें कैंसर होने का खतरा ज्यादा होता है, हालांकि वेजिटेरियन होने का मतलब यह कतई नहीं है कि व्यक्ति को कैंसर नहीं होगा। ऐसे में अगर आप नॉन वेजिटेरियन आहार लेते हैं तब भी यह जरूर सुनिश्चित करें कि आपके खाने में फल व सब्जियां पर्याप्त मात्रा में शामिल हों। एंटी ऑक्सिडेंट कैंसर और अन्य बीमारियों के खतरों को कम कर सकते हैं।

बुरी आदतों को कहें अलविदाः यह सुनने में रूढ़िवादी बात लग सकती है, लेकिन सच यही है कि धूम्रपान और अधिक मात्रा में अल्कोहल से तौबा करके आप फेफड़े व लिवर के कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं। हर साल तंबाकू के चलते होने वाले कैंसर की वजह से 1 मिलियन लोगों की मौत होती है। कैंसर के 50 फीसदी मामलों के लिए तंबाकू जिम्मेदार है।

अपने शरीर को सही शेप में रखेंः अगर आपका वनज सामान्य से अधिक है, तो आपके पास चिंतित होने के कई कारण हैं। अतिरिक्त वजन न सिर्फ कैंसर का खतरा बढ़ाता है, बल्कि आपको डायबीटीज, दिल की बीमारी और घुटनो के आर्थराइटिस होने का खतरा भी बढ़ा देता है। ऐसे में अपने शरीर का वजन हमेशा सामान्य सीमा में रखें।

व्यायामः अगर आपके शरीर का वजन सामान्य है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको व्यायाम की जरूरत नहीं है। शारीरिक व्यायाम की कमी मोटे और पतले दोनों तरह के लोगों में कई बीमारियों की वजह है, जिनमें कैंसर भी शामिल है।

टीकाकरण एवं स्क्रीनिंगः टीकाकरण दो मुख्य प्रकार के कैंसर से बचा सकता है। ह्युमन पैपिलोमा वायरस यानी एचपीवी और हेपेटाइटिस बी वायरस यानी एचबीवी का टीका लगवाएं। इसके साथ ही नियमित रूप से कैंसर की स्क्रीनिंग कराएं ताकि कोई भी समस्या होने पर शुरूआती दौर में पता लग जाए और उपयुक्त इलाज हो सके।

 

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