‘आईटीओ’ पर दस गुना अधिक शोर

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ITO Delhi

वायु प्रदूषण के अलावा दिल्ली में अब ध्वनि प्रदूषण भी एक बड़ी समस्या बन रहा है। अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर किए अध्ययन में दिल्ली को अधिक ध्वनि प्रदूषण वाले पांच प्रमुख शहरों में दूसरे नंबर पर पाया गया है। पहले नंबर पर चीन के गुआनजाओ, दूसरे नंबर पर दिल्ली, तीसरे नंबर पर मुंबई और चौथे नंबर पर तुर्की के इंस्ताबुल शहर को रखा गया है। दोपहर के समय अकेले आईटीओ पर दिल्लीवासी दस गुना अधिक शोर को झेलते हैं। 

दिल्ली प्रदूषण नियत्रंण कमेटी के आंकड़ों के अनुसार चालीस प्रमुख जगहों पर दोपहर और रात में दोनों समय सामान्य से अधिक शोर रहता है। आईटीओ पर दोपहर 12 से 2 बजे के बीच 74 डेसीबल तक शोर दर्ज किया जाता है, जो दोपहर में शोर सहन करने के सामान्य मानक (55 डेसीबल) से अधिक है। आनंद विहार में दोपहर के समय ध्वनि प्रदूषण का स्तर 60.4 डेसीबल और रात में 41 डेसीबल दर्ज किया गया। मालूम हो कि रात में ध्वनि प्रदूषण का मानक 45 डेसीबल निर्धारित है। आवासीय क्षेत्र में भी प्रदूषण का स्तर सामान्य से चार गुना अधिक है। द्वारका में दोपहर के समय ध्वनि का स्तर 58.1 और रात में शोर का स्तर 53.7 दर्ज किया गया।

डीपीसीसी की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में दोपहर में समय औसत ध्वनि प्रदूषण 60.54 डेसीबल और रात में 55.3 डेसीबल शोर सहना पड़ता है। आईएमए के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. आरएन टंडन ने बताया कि सामान्य मनुष्य के कान कम से कम दस डेसीबल और अधिकतक 20 डेसीबल के शोर को बिना कोई नुकसान पहुंचे सुन सकते हैं, जबकि इससे अधिक शोर में नियमित रहने पर कान के सुनने की क्षमता पर फर्क पड़ सकता है।

(120 से 140 डीबी की ध्वनि कानों के लिए असहनीय होती है। जबकि 155 कान का पर्दा फाड़ सकती है।)

कब करें डॉक्टर से संपर्क

– कानों में लगातार तक घंटी बजते रहने का एहसास होना

– फोन की घंटी बजे बिना ही ऐसा लगना की फोन बज रहा है

– कानों में सन्न का एहसास होना, जिससे सुन्न् पन भी कहते हैं

– शोर की वजह से लगातार सिर में दर्द रहना या फिर एकाग्रता कम होना

 

 

 

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