आपके लिए जरुरी हैं ये टेस्ट

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पुरुषों को भी उतनी ही केयर की जरूरत होती है, जितनी कि महिलाओं को। उम्र बढ़ने के साथ ये जरूरतें और बढ़ती हैं। ऐसे मे सबसे ज्यादा जरूरी होता है अलर्ट रहना और समय रहते दिक्कतों से निबटने के उपाय करने। इसमे आपकी हेल्प करते हैं कुछ मेडिकल टेस्ट। हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे टेस्ट जिन्हें कराकर आप अपने परिवार के पुरुषों को बेफिक्र जिंदगी का उपहार दे सकते हैं:

ब्लड प्रेशर स्क्रीनिंग
अगर ब्लड प्रेशर रीडिंग में उपर का नंबर यानी सिस्टोलिक नंबर 130 से अधिक हो और बॉटम नंबर यानी डायस्टोलिक नंबर 85 से अधिक हो तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें। अगर डायबीटीज, दिल की बीमारियां, किडनी की समस्या या दूसरी ऐसी दिक्कतें हैं तो ब्लड प्रेशर की करीब से निगरानी करना जरूरी है।

कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग
35 से अधिक उम्र वाले पुरूषों को हर साल कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए। हार्ट अटैक और स्ट्रोक की सबसे बड़ी वजहों में से एक कोलेस्ट्रॉल बढ़ा होना है, लेकिन अच्छी बात यह है कि कोलेस्ट्रॉल को आप अपने खान-पान में बदलाव और कुछ दवाओं की मदद से आसानी से नियंत्रण में ला सकते हैं। इसके लिए बेहतर है कि एक लिपिड प्रोफाइल टेस्ट करा लें। इसमें एचडीएल यानी अच्छा कोलेस्टृॉल और एलडीएल यानी बुरा कोलेस्टृॉल का स्तर पता लग जाता है।

युरोलॉजिकल समस्याएं
50 साल से अधिक उम्र के पुरूषों को युरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं होती क्योंकि आजकल इससे जुड़ी तकरीबन सभी समस्याओं का सफल इलाज मौजूद है। डॉक्टरों के मुताबिक इन दिक्कतों को पहचानने के लिए कुछ लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है, जैसे कि बगलों और पेट के निचले हिस्से में दर्द, पेशाब में खून आना अथवा इरेक्टाइल डिसफंक्शन।
50 साल से अधिक उम्र वाले पुरूषों के रूटीन फिजिकल एग्जाम में डिजिटल रेक्टल एग्जाम यानी डीआरई और पीएसए यानी प्रॉस्टेट स्पेसिफिक एंटिजन शामिल किया गया है। अगर डीआरई अथवा पीएसए टेस्ट में कोई समस्या दिखती है तो कुछ अन्य टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। इसमें युरीन एनालिसिस, ट्रांसरेक्टल, अल्ट्रासाउंड या प्रॉस्टेट बायॉप्सी, यूरोडायनेमिक टेस्ट और एब्डोमिनल अल्ट्रासाउंड हो सकता है।

कोलोरेक्टल कैंसर स्क्रीनिंग
अगर किसी की उम्र 50 से 75 साल के बीच है तो उनकी कोलोरेक्टल कैंसर स्क्रीनिंग जरूर कराएं। इसमें ये टेस्ट शामिल हो सकते हैं:
-हर साल एक स्टूल टेस्ट
-हर पांच साल में एक स्टूल अकल्ट ब्लड टेस्ट के साथ फ्लेक्सिबल सिग्मॉइडोस्कोपी कराएं
-हर 10 साल में कोलोनोस्कोपी कराएं
अगर किसी को कोलोन कैंसर का खतरा है, जैसे कि अल्सरेटिव कलाइटिस, कोलोरेक्टल कैंसर का कोई पारिवारिक इतिहास है तो हर साल कोलोनोस्कोपी कराने की जरूरत हो सकती है।

प्रॉस्टेट कैंसर स्क्रीनिंग
प्रॉस्टेट कैंसर बुजुर्ग पुरूषों में कैंसर के सबसे खतरनाक मामलों में प्रॉस्टेट कैंसर होता है। इससे बचने के लिए 40 साल से अधिक उम्र के पुरूषों को हर साल रेक्टल यानी गुदा संबंधी जांच करानी चाहिए। इसके तहत डॉक्टर प्रॉस्टेट की असामान्यता जैसे कि सूजन या कठोरपन की जांच करता है। इसकी स्क्रीनिंग के दौरान एक पीएसए ब्लड टेस्ट भी करा सकते हैं, इसमें किसी भी तरह के बदलाव का लक्षण काफी पहले पता लग जाता है।

आंखों की जांच
आंखों की बीमारियां, जैसे कि मस्क्युलर डीजनरेशन] मोतियाबिंद, ग्लॉकोमा आदि उम्र बढ़ने के साथ आने वाली एक आम समस्या है। ऐसे में बचाव के उपाय करने के लिए 60 साल की उम्र से पहले हर दो साल में और इसके बाद हर साल आंखों की जांच कराएं। अगर किसी को पहले से समस्या है अथवा वह खतरे के दायरे में आता है तो हर छह महीने में टेस्ट कराएं।

कानों की जांच
60 साल से अधिक उम्र वाले तकरीबन 30 पर्सेंट लोगों को सुनने की समस्या होती है। इनमें से कुछ लोगों की दिक्कत इलाज से ठीक हो सकती है। इसके लिए साल में एक बार हियरिंग टेस्ट कराएं ।

डेंटल एग्जाम
मसूड़ों की बीमारियां आपके संपूर्ण स्वास्थ्य का आईना हो सकती हैं। ऐसे में आपके दांत, मसूड़े, मुंह और गले की नियमित जांच हर साल होनी चाहिए। इसके साथ ही सालाना दांतों की सफाई भी कराएं।

वजन को न छोड़ें फ्री
जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, मसल की जगह फैट लेने लगता है,क्योंकि शरीर का मेटाबोलिजम स्लो होने लगता है। यह फैट धीरे-धीरे कमर तक पहुंचता है, क्योंकि आप पहले की तरह कैलोरी बर्न नहीं कर पाते। ऐसे में उम्र बढ़ने के साथ शरीर को अपने हाल पर छोड़ने के बजाय रेग्युलर एक्सरसाइज और पौष्टिक खान-पान का ध्यान रखें।

हड्डियों का भी रखें ध्यान
उम्र बढ़ने के साथ हमारी हड्डियां भी कमजोर होने लग जाती हैं। ऐसे में अगर पौष्टिकता की कमी, शारीरिक व्यायामक का अभाव, सेक्स हार्मोन में कमी और कुछ दवाओं के चलते समस्या तेजी से बढ़ने लगती है। ऐसे में हड्डियों की समस्या से बचने के लिए अपने डॉक्टर से बोन स्कैन और पौष्टिक आहार के बारे में पूछें। मगर ज्यादातर पुरूष हड्डियों की समस्या पर बात तभी करते हैं जब उन्हें कोई तकलीफ या फ्रैक्चर आदि हो।

इनका भी रखें ध्यान
-कैल्शियम और विटामिन डी
-हड्डियों को मजबूत रखने के लिए नियमित व्यायाम
-अगर आपका विटामिन बी12 कम है तो इसका सप्लिमेंट
-धूम्रपान बंद करें, अल्कोहल का इस्तेमाल बेहद कम करें, इसकी लिमिट दो पेग प्रतिदिन से कम रखें
-कम नमक, सोडियम की मात्रा 1500 एमजी प्रतिदिन से कम रखें

डॉ. विनीत मल्होत्रा, युरोलॉजिस्ट
डॉ. प्रवीण बंसल, मेडिकल ऑंकोलॉजिस्ट
डॉ. राज आनंद, आई स्पेशियलिस्ट
डॉ. विवके लोगानी, जॉइंट रीकंस्ट्रक्शन एक्सपर्ट

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