मॉडर्न लाइफस्टाइल का फर्टिलिटी पर असर

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आजकल प्रजनन की उम्र वाले हर 10 में से एक जोड़े को गर्भधारण में समस्या आती है। महानगरों में यह अनुपात तेजी से बढ़ रहा है, जहां ऐसे जोड़ों की अधिकता है जिनमें दोनों ही पार्टनर कामकाजी हैं:

जिम्मेदार वजहें
इसके लिए अलग-अलग वजहें जिम्मेदार हैं। आजकल अधिकतर महिलाएं अपने कैरियर को लेकर संजीदा हैं जो अपने कैरियर में खुद को पूरी तरह स्टैब्लिश कर लेने के बाद ही शादी करने का फैसला लेती हैं। इस वजह से उनकी शादी में देरी हो जाती है और अधिकतर मामलों में शादी होते-होते लड़कियां 30 साल की उम्र तक पहुंच जाती हैं।

बायलोजिकल क्लॉक है अलग
महिलाओं का शरीर इस तरह बना होता है जिससे उनके शरीर में प्रजनन योग्य एग्स के उत्पादन की क्षमता 30 की उम्र के बाद कम होने लगती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हर महिला एग्स के एक फिक्स बैंक के साथ जन्मी होती है। किसी भी लड़की की माहवारी की शुरूआत के समय उसके शरीर में 300,000 से 500,000 तक एग्स होते हैं और माहवारी खत्म होने की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते उसके शरीर के सारे एग्स नष्ट हो चुके होते हैं। पुरूषों के विपरीत महिलाओं में हर महीने अंडाणुओं का उत्पादन नहीं होता, ये सिर्फ मैच्योर होते हैं। 35 साल की उम्र के बाद प्रजनन क्षमता में तेजी से गिरावट आने लगती है, ऐसे में एग्स की क्वालिटी खराब होने की वजह से बहुत सारी महिलाओं को गर्भधारण में समस्या आती है।

टाइप ए पर्सनैलिटी मे समस्या ज्यादा
इस श्रेणी में आने वाले अधिकतर जोड़े टाइप ए पर्सनैलिटी के तहत आते हैं जिनमें खास तरह की विशेषताएं देखी जाती हैं, ये वर्कहॉलिक होते हैं, बेहद महत्वाकांक्षी होते हैं और बहुत जल्दी परेशान हो जाते हैं और तनाव में आ जाते हैं।

जबकि सफल गर्भधारण के लिए जोड़ों को तनावमुक्त रहने और नियमित रूप से शारीरिक संबंध बनाने की जरूरत होती है। अपने कार्य संबंधी उत्तदायित्वों और अत्यधिक तनाव के चलते ऐसा संभव नहीं हो पाता है। एक तनावपूर्ण जीवनशैली बहुत सारे लोगों को धूम्रपान और अल्कोहल जैसी चीजों का आदी बना देती है, जो अंततः उनके स्पर्म और एग्स की क्वालिटी में कमी लाकर प्रजनन को और कठिन बना देती है।

काम के दबाव और जीवन की अन्य जिम्मेदारियों के साथ संतुलन बनाने की कोशिशों के साथ आजकल के जोड़ों की खान-पान की आदत भी बदल गई है। वे ज्यादातर स्नैक पर निर्भर रहते हैं जिसमें फास्ट फूड की मात्रा सबसे अधिक होती है। वे सिडेंटरी जीवनशैली जीने लगे हैं जिसमें व्यायाम के लिए शायद ही कोई जगह होती है। यह अस्वस्थ जीवनशैली उन्हें मोटापा और डायबीटीज की चपेट में ले जा रही है, जिससे गर्भधारण में दिक्कत आती है, अगर गर्भधारण हो जाता है तो एबार्शन का खतरा बना रहता है और अगर बच्चे का जन्म होता है तो उसे जन्मजात बीमारियों की आशंका भी काफी ज्यादा रहती है।

समाधान है आसान
इन सारी समस्याओं का एक समाधान है, प्रकृति की ओर वापस लौटना। एक महिला की शारीरिक बनावट संसार के सबसे महत्वपूर्ण और सम्माननीय कार्य के अनुकूल होती है। और इस प्रकृति प्रदत्त खासियत का लाभ उठाने के लिए यह जरूरी है कि परिवार बनाने की शुरूआत ट्वेंटीज़ में कर देनी चाहिए। अगर बहुत देरी हो तो भी 30 साल से पहले यह हो जाना चाहिए।

रिलैक्सेशन थेरेपी, योग और मेडिटेशन काफी फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि इससे तनाव कम होता है। बहुत ज्यादा धूम्रपान और अल्कोहल के इस्तेमाल से बचना चाहिए। संतुलित जीवनशैली अपनाना चाहिए जिसमें कम शुगर, कम नमक और कम फैट वाला स्वस्थ आहार शामिल हो। उपयुक्त मात्रा में फल व सब्जियां खानी चाहिए और रोज कम से कम 2 लीटर पानी पीना चाहिए। रोजाना वॉक पर जाना चाहिए और व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।

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