अज्ञानता भी बांझपन की वजह!

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modern-lifestyle-and-infertilityइसमे कोई शक नहीं है की आजकल इंफर्टिलिटी (Infertility) की समस्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन हर मामले मे कपल को इलाज (Infertility Treatment) की जरूरत हो ऐसा भी जरूरी नहीं होता है। कई बार समस्या की वजह सिर्फ अज्ञानता होती है। ऐसे मे फर्टिलिटी (Fertility) बढ़ाने के नेचुरल तरीकों (natural ways) की जानकारी काम आ सकती है:
कई कारक हैं जिम्मेदार
अगर दोनों पार्टनर फर्टाइल हैं तो एक दिन गर्भधारण जरूर होगा। प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में कई कारक अपनी भूमिका निभाते हैं। एक स्त्री को फर्टाइल होने के लिए उसके शरीर में हर माहवारी चक्र में जीवधारण योग्य अंडाणुओं (eggs) का उत्पदन जरूर होना चाहिए और पुरूषों का इसके लिए सक्षम और स्वस्थ शुक्राणुओं (sperm) के उत्पादन में सक्षम होना जरूरी होता है, जो कि अंडाणुओं को फर्टिलाइज कर सकें। संतुलित आहार, फिजिकल एक्सरसाइज और ओवरऑल हेल्थ प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है।

जाने सबसे फर्टाइल पीरियड
अगर एक महिला अपनी प्रजनन क्षमता बढ़ाना चाहती है तो उसके लिए सबसे जरूरी है यह पता लगाना कि उसका सबसे फर्टाइल समय कब होता है। जब महिला का ओवुलेशन नहीं होगा उस दौरान प्रयास करने से गर्भधारण नहीं होगा। जो कपल गर्भधारण में सफल नहीं हो पाते हैं उनमें से बहुत सारे लोग सिर्फ इसलिए ऐसा नहीं कर पाते हैं क्योंकि उन्हें गर्भाधान के लिए सेक्सुअल इंटरकोर्स के सही समय का ज्ञान ही नहीं होता है।

ऐसे कई तरीके हैं जिनके माध्यम से कोई भी अपने प्रजनन के समय का पता लगा सकता है। शरीर के बुनियादी तापमान की जांच से इसकी शुरूआत की जा सकती है। इससे महिला यह पता लगा सकती है कि उसका ओवुलेशन यानी अंडोत्सर्ग कब हो रहा है क्योंकि ओवुलेशन के समय शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ जाता है। एक फर्टिलिटी कैलेंडर मेंटेन करने से आपके लिए यह जानना आसान होगा कि आपका अंडोत्सर्ग कब हो रहा है। इन अंडाणुओं के रिलीज होने से ठीक पहले सेक्सुअल इंटरकोर्स () करने से गर्भधारण का चांस बढ़ जाता है। फैमिली प्लानिंग के कुछ अन्य प्राकृतिक तरीके भी लाभदायी हो सकते हैं। गर्भाधान के लिए संभावित तारीखों का पता लगाने के लिए आजकल बाजार में फर्टिलिटी मॉनिटर भी उपलब्ध हो गए हैं।

सेक्सुअल पोजीशन भी है महत्वपूर्ण
अगर गर्भाधान में समस्या आ रही है तो पार्टनर इंटरकोर्स के दौरान सेक्सुअल पोजीशन में बदलाव करके भी देख सकते हैं। अगर बच्चा चाहिए तो पुरूष पार्टनर को महिला के गर्भाशय के निकट शुक्रणुओं को छोड़ना होगा। पोजीशनिंग के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है, जैसे क्या करें अथवा क्या नहीं।
-कुछ लोगों को इंटरकोर्स के बाद नहाने की आदत होती है, लेकिन ऐसा करने से प्रेग्नेंसी के चांसेज कम हो जाते हैं।
-इंटरकोर्स के बाद तुरंत उठ जाने से स्पर्म बाहर निकाल सकते हैं, इससे प्रेग्नेंसी की संभावना कम होगी।
-खड़े होकर, बैठकर अथवा महिला पार्टनर को ऊपर करके इंटरकोर्स करने से शुक्राणु बाहर निकल जाते हैं।

बैलेंस्ड डाइज़ है बेहद जरूरी
प्रजनन क्षमता में सही खान-पान की भूमिका बेहद अहम है। एक संतुलित आहार आपके शरीर के हार्मोंस को ठीक रखेगा और आपके प्रजनन सिस्टम को पोषण देगा। स्वस्थ आहार लेकर आप अपने शरीर का वजन संतुलन में रख सकते हैं, जिसका प्रजनन क्षमता पर बहुत असर पड़ता है। जो महिलाएं सामान्य से अधिक अथवा सामान्य से कम वजन वाली होती हैं उन्हें गर्भधारण में बहुत समस्या आती है क्योंकि उनके शरीर का फैट सेक्स हार्मोंस जैसे कि ऐस्टृोजन और प्रॉजेस्टेरॉन के उत्पादन को प्रभावित करता है। आहार में कुछ विटामिन और मिनरल्स शामिल करना भी जरूरी है।

कैल्शियम और विटामिन डी- इन पोषक तत्वों की नियमित खुराक पुरूषों का प्रजनन स्तर बढ़ा सकती है।

जिंक- जिंक की कमी से टेस्टोस्टेरॉन और शुक्राणुओं की संख्या कम हो सकती है।

विटामिन सी और एंटीऑक्सिडेंट- इससे शुक्राणुओं में कोई खामी नहीं आती है और उनकी उत्पादकता बढ़ती है। इससे महिला के प्रजनन अंगों पर और अंडाणुओं पर दबाव भी कम होता है।

इन चीजों से करें परहेज
कुछ ऐसी चीजें भी हैं जिनके बारे में यह कहा जाता है कि अगर आप बच्चा लाना चाह रहे हैं तो इनसे परहेज करना चाहिए:

कैफीन- चाय, कॉफी, कोला और चॉकलेट में मिलने वाला कैफीन पुरूष और महिला दोनों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

अल्कोहल- अल्कोहल लेने से प्रजनन क्षमता 5% तक कम हो जाती है। इससे न सिर्फ शुक्राणुओं का उत्पादन प्रभावित होता है बल्कि उनमें खामियां भी बढ़ती हैं।

By Dr. Neera Agrawal,
Sr. Gynecologist,
Retired HOD, GB Pant Hospital,
New Delhi

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