परिवार नियोजन के तीन नये विकल्प

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Contraceptionअप्रैल से परिवार नियोजन के विकल्पों का दायरा बढ़ जाएगा। इसके लिए अब तीन नए साधन मौजूद होगें, जिसकी मदद से रोज दवाएं लेने या नसबंदी कराने की जगह तीन से चार महीने तक अनचाहे गर्भ को टाला जा सकता है। इसी क्रम में डीएमपीए इंजेक्शन को अब सरकारी योजनाओं में शामिल किया जाएगा। अब तक स्वयं सेवी संगठनों द्वारा निर्धारित शुल्क पर इंजेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। बीते वर्ष नवंबर महीने में खत्म हुए सफल परिक्षण के बाद इंजेक्शन को व्यापक स्तर पर प्रयोग किए जाने की अनुमति दी जा चुकी है। 

अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए महिलाएं डीपीएमए (डिपोट मेडॉक्सप्रोजेस्ट्रान एसिटेट) की मदद से एक इंजेक्शन के जरिए गर्भधारण को तीन महीने तक टाला जा सकता है। भारत में अभी स्वयं सेवी संगठनों की मदद से उपलब्ध कराए डीपीएमए इंजेक्शन को 0.2 प्रतिशत महिलाओं ने सही बताया है। जिसकी मदद से वह तीन से चार महीने तक गर्भ को टालने में सफल रही।

भारत सरकार के वर्ष 2020 तक जनसंख्या स्थिरता के उद्देश्य को पूरा करने के लिए ऐसे उपायों पर ध्यान दिया जा रहा है, जिससे इस्तेमाल पर महिलाओं की सेहत को अपेक्षाकृत नकारात्मक प्रभाव कम पड़े। गर्भनिरोधक इंजेक्शन डीएमपीए सहित अन्य विकल्प स्वास्थ्य केन्द्रों पर निशुल्क उपलब्ध होगें। पहली बार सरकार परिवार नियोजन में निजी अस्पताल और स्वास्थ्य केन्द्रों को भी शामिल करेगी, जो नियोजन के विकल्प और इसे इस्तेमाल करने में लोगों की काउंसलिंग करने में मदद करेगें। पीपीपी मॉडल के आधार पर निजी अस्पताल प्रसव पहले महिलाओं को परिवार को सीमित रखने के उपायों पर दम्पति की काउंसलिंग करेगें।

कैसे काम करेगें नये विकल्प

डीएमपीए- संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने 1992 में डीएमपीए को परिवार नियोजन के लिए प्रमाणित किया था। गर्भनिरोध के इस विकल्प का सबसे अधिक इस्तेमाल अफ्रीका में किया जा रहा है। इस विकल्प में महिलाओं के शरीर में बनने वाले प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन को तीन से चार महीने तक नियंत्रित किया जाता है, जो गर्भ नहीं ठहरने देता। परिक्षण के दौरान 21 प्रतिशत महिलाओं ने दो बच्चों में अंतर रखने के लिए इस विकल्प को अपनाया।

सेंटक्रोमन- केन्द्रीय औषध अनुसंधान परिषद लखनऊ द्वारा बनाए गए सेंटक्रोमन नॉन स्टेरॉयड गर्भ निरोधक गोली है। जिसे हफ्ते में एक बार इस्तेमाल करने पर ही गर्भधारण को रोका जा सकता है। यह विकल्प ऐस्ट्रोजन हार्मान को नियंत्रित करती है। सेंटक्रोमन को स्तनकैंसर और गर्भाशय के कैंसर के खतरे को कम करने के लिए भी कारगर माना गया है।

पीओपी पिल्स- यह गोलियां कई तरह के ब्रांड में मौजूद हैं, लेकिन सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल होने के बाद यह सरकार स्वास्थ्य केन्द्रों पर भी मिलेगी। इन गोलियों में भी प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन को नियंत्रित किया जाता है, जबकि ऐस्ट्रोजन पर असर नहीं पड़ता, इसलिए जब महिलाएं इसका सेवन बंद भी कर देती हैं तो दोबारा गर्भधारण में देर नहीं लगती।

प्रोजेस्ट्रान इंजेक्शन के अलावा सेंटक्रोमन व ओरल प्रोजेस्ट्रान पिल्स की मदद से परिवार नियोजन कार्यक्रम को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने की रणनीति बनाई गई है। तीनों ही विकल्प महिलाओं के लिए सुरक्षित होगें, सेंटक्रोमन इंजेक्शन ने महिलाओं में प्रजनन के लिए कारक दो प्रमुख हार्मोन में एक हार्मोन को नियंत्रित किया जाएगा, जिससे दोबारा गर्भधारण करने में भी दिक्कत नहीं होगी”

डॉ. आलोक बनर्जी,पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया और सरकार की प्रजनन स्वास्थ्य सेवा के तकनीकि कमेटी के प्रमुख

महिलाओं के भरोसे परिवार नियोजन

देश में इस समय मौजूद परिवार नियोजन के विकल्पों में सबसे अधिक 34 प्रतिशत महिलाएं नसबंदी का प्रयोग कर रही हैं। जबकि एक प्रतिशत पुरुषों की नसबंदी की जा रही है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के डीएलएचएस (जिला स्तरीय स्वास्य सेवा सर्वेक्षण) के अनुसार छह प्रतिशत लोग कंडोम के जरिए परिवार नियोजन कर रहे हैं, जबकि 46 प्रतिशत दम्पति कोई भी विकल्प नहीं ले रहे। हालांकि विशेषज्ञ पुरुषों के गर्भ निरोधक विकल्पों को बढ़ाने पर भी ध्यान दे रहे हैं।

 

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