अंगदान कानून में बदलाव के लिए याचिका

Share:

organ donerकेन्द्र सरकार यदि अंगदान के कानून में बदलाव करें तो देश में जरूरत के अनुसार लोगों को सही समय पर मानव अंग उपलब्ध हो सकेगें। इसके चलते चिकित्सकों के एक समूह ने अंगदान कानून में बदलाव के लिए याचिका दायर की। विश्व किडनी दिवस की पूर्व संध्या पर विशेषज्ञों ने कहा कि अंगदान के कानून में इस बात का प्रावधान होना चाहिए कि यदि कोई व्यक्ति के अंगदान करने के बाद भी यदि परिजन स्पष्ट सहमति न दें तो अस्पतालों के पास इस बात का अधिकार होना चाहिए कि वह अंगों को हार्वेस्ट या पुर्नसर्जित कर सकें। 

इस बावत आयोजित एक कार्यक्रम में केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौर ने अंगदान के लिए जागरुकता बढ़ाने और संगठित प्रयास करने की बात कही। बीएल कपूर अस्पताल के गुर्दारोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील प्रकाश ने बताया कि एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार हर साल दिल्ली एनसीआर में दो लाख लोग की सड़क दुर्घटना में मौत होती है। लेकिन अंगदान के प्रति जागरुकता की कमी होने के कारण दो लगभग दो लाख अंग बेकार हो जाते हैं। जिससे लोगों की जान बचाई जा सकती है। चिकित्सकों ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा कि अज्ञात और लवारिस लाशों के अंगों को इस्तेमाल करने संबंधी नियम में बदलाव के साथ ही अस्पतालों को यदि आप्ट आउट अधिकार हासिल हो जाता है तो जरूरतमंद लोगों को अंगों को आसानी से उपलब्ध कराया जा सकता है।

Share:

Leave a reply