फेसलिफ्ट से कैरियर हिट

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Cosmetic-Surgery-could-be-dangerousब अट्रेक्टिव पर्सनैलिटी और खूबसूरत चेहरा सिर्फ ग्लैमर इंडस्ट्री कि जरूरत नहीं है। कॉरपोरेट सेक्टर मे भी ब्यूटी विथ ब्रेन की डिमांड है। ब्यूटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि अच्छा दिखने से व्यक्ति का कोन्फ़िडेंस बढ़ता है और वह अपने कैरियर मे बेहतर ग्रोथ हासिल करता है। शायद यही वजह है कि आजकल फेसलिफ्ट जैसे कॉस्मेटिक प्रोसिज़र साधारण ब्यूटी ट्रीटमेंट का हिस्सा बन गए हैं।

आइये जानते हैं इन दिनों यूथ के बीच कौन-कौन से प्रोसीजर हैं सबसे ज्यादा पॉपुलर:
फेस लिफ्ट सर्जरी
फेसलिफ्ट सर्जरी एक करेक्टिव प्रोसीजर है जो नयन नक्श ठीक करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इससे चेहरे की मसल्स को उठाकर चेहरे पर आए ढीलेपन और झुर्रियों को ठीक किया जाता है, जो अक्सर उम्र का परिणाम होते हैं। तनाव और सूरज की खतरनाक किरणों के लगातार संपर्क में रहने से भी यह समस्या होती है। चेहरे के किसी खास हिस्से की बनावट में सुधार के लिए भी यह प्रक्रिया की जा सकती है।

फेशियल सर्जरी
चेहरे की बढ़ी हुई मसल्स और किसी भी तरह की असामान्यता को ठीक करना कई बार सिर्फ एक साधारण सर्जरी से ही संभव हो जाता है। चेहरे के किसी एक खास हिस्से को उभार देने के लिए भी सर्जरी की जा सकती है। लेकिन एक बात का ध्यान रहे यह एक स्थायी प्रक्रिया होती है जिसे दोबारा पुराने शेप में नहीं पहुंचाया जा सकता है।

डर्मल फिलर
कई ऐसे कॉस्मेटिक प्रॉसीजर भी हैं जिसमें छुरी के इस्तेमाल की जरूरत नहीं पड़ती और यही खासियत इन प्रॉसीजर की लोकप्रियता तेजी से बढ़ा रही है। अधिकतर लोग सर्जरी कराने में सहज महसूस नहीं करते हैं, साथ ही इसके विकल्प के तौर पर उपलब्ध मिनिमली इनवेसिव सर्जरी बेहद आसान और फायदेमंद महसूस होती है। फेस ऑग्मेंटेशन के लिए बड़ी संख्या में डॉक्टर अपने मरीजों पर फिलर का इस्तेमाल कर रहे हैं।

गालों की शेप में गड़बड़ी
फूले-फूले गाल व्यक्ति को जवां लुक देते हैं मगर किसी भी कारणवश अगर गालों में गड्ढे पड़ने लगते हैं तब ये अपना जवांपन खोने लगते हैं।

इशिरा स्किन क्लीनिक के कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट, लेजर एवं क्युटेनियस सर्जन डॉ. अमित लूथरा कहते हैं, ’’अब फिलर की उपलब्धता से गालों में उभार लाना बेहद आसान हो गया है, खासतौर से उन लोगों के लिए जो सर्जिकल प्रक्रिया कराने के लिए इच्छुक नहीं होते हैं। परलेन जैसे फिलर की सबसे खास बात यह है कि इसे मिनिमली इनवेसिव प्राक्रिया से लगाए जाते हैं और इसके लिए व्यक्ति को सर्जरी कराने की कोई जरूरत नहीं होती है। इस प्रक्रिया का एक अन्य सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसका असर कुछ समय में खत्म भी हो सकता है जिससे व्यक्ति का प्राकृतिक नयन-नक्श उसे वापस मिल सकता है।’’
होठों में उभारः आजकल होठों में उभार लाने और इसकी शेप में बदलाव की प्रक्रिया बेहद लोकप्रिय हो रही है। महानगरों में होठों में उभार लाने का चलन बेहद आम हो गया है। कॉरपोरेट कल्चर में जहां इंसान का व्यक्तित्व भी उसके कैरियर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, वहां इस तरह के प्रॉसीजर की अच्छी खासी मांग है। उभरे हुए फूले-फूले होंठों का महिलाओं में काफी क्रेज है। हालांकि अब यह प्रक्रिया पुरूषों के बीच भी लोकप्रिय हो गई है।

ठुड्डी के शेप में बदलावः बड़ी या छोटी ठुड्डी आपके नयन-नक्श को परफेक्ट दिखने से महरूम कर सकती है। अगर ठुड्डी छोटी हो तो नाक बड़ी दिखती है, वहीं छोटी ठुड्डी के चलते नाक चेहरे के स्टृक्चर के हिसाब से छोटी दिखती है। करेक्टिव प्रक्रिया के साथ, ठुड्डी से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।

झुर्रियों का इलाजः चेहरे पर बारीक लाइनें और सिलवटें चेहरे पर उभरने वाले उम्र के शुरूआती लक्षण होते हैं। समय बीतने के साथ-साथ ये रेखाएं गहरी होती जाती हैं और दूसरों को ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखने लगती हैं। नई पीढ़ी के चेहरे पर वक्त से पहले ये निशान उभरने लगे हैं। क्योंकि नई पीढ़ी पहले की तुलना में कहीं ज्यादा तनाव और अन्य दिक्कतों का सामना कर रही है।

भौहों का उभारः उम्र बढ़ने के साथ, हमारे चेहरे का प्राकृतिक सौंदर्य धूमिल होने लगता है। भौहें भी इससे अछूती नहीं रहती हैं। उम्र के साथ भौहें लटकने लगती हैं, कुछ लोगों को माथा भी लटका हुआ सा महसूस होने लगता है, जिसके साथ भौहें भी जुड़ी होती हैं।
मुंबई की जानी-मानी त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. स्वाति श्रीवास्तव कहती हैं, ’’चेहरे के नवीनीकरण की प्रक्रिया के तहत भौहों के उभार के लिए बोटॉक्स ट्रीटमेंट काफी लोकप्रिय हो रहा है। यह उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो सर्जरी नहीं कराना चाहते। इससे आसानी से आपकी उम्र असली उम्र से 5-7 साल कम दिखने लगती है। त्वचा रोग विशेषज्ञ आपकी भौहों के नीचे इंजेक्शन के जरिए बोटॉक्स का थोड़ा सा डोज देते हैं। चूंकि इस ट्रीटमेंट में इंजेक्शन लगाना शामिल होता है, ऐसे में यह प्रक्रिया थोड़े समय में ही पूरी भी हो जाती है। मरीज 20-30 मिनट में ही खाली हो जाता है और एक हफ्ते में ही उसे चेहरे पर इसका असर दिखने लग जाता है। वहीं सर्जरी में पहले टांकों के भरने का इंतजार करना पड़ता है, जिसमें लंबा समय लगता है।’’

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