विवाह के बाद सीजोफ्रेनिया दूर

Share:

schizophrenia

व्यवहार संबंधी कुछ परेशानियों को विवाह के जरिए दूर किया जा सकता है, जिसमें सीजोफ्रेनिया  (schizophrenia)भी शामिल है। इस बाबत किए गए अध्ययन में देखा गया कि ऐसे मरीज जो बीमारी के साथ अविवाहित जीवन जी रहे थे, उनकी बीमारी नियंत्रित करने में विवाहित मरीजों की अपेक्षा अधिक समय लगा। विवाह के बाद एक बेहतर पारिवारिक माहौल ने ऐसे मरीजों में जीने की इच्छा जगाई, इससे उनकी दवाओं पर निर्भरता कम हो गई।

मनोचिकित्सा विभाग लोकमान्य तिलक म्यूनिसिपल मेडिकल कॉलेज महाराष्ट्र और एम्स के मनोचिकित्सा विभाग द्वारा सीजोफ्रेनिया के (क्रानिक और एक्यूट) 101 मरीजों को तीन महीने के इस अध्ययन में शामिल होने के लिए राजी किया गया। इसमें 70 विवाहित और 31 अविवाहित मरीजों को शामिल किया गया। तीन महीने के अंतराल में 31 अविवाहित में से आठ का विवाह हुआ, जिसका अध्ययन के परिणाम में खासा असर देखा गया और मरीजों को दी जाने वाली दवाओं की मात्रा कम हो गई।

एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के डॉ. नंद कुमार ने बताया कि 30 से 40 प्रतिशत मानसिक समस्याओं को सही करने में विवाह को जिम्मेदार माना गया है, जबकि 10 से 15 प्रतिशत मानसिक समस्याएं विवाह के बाद भी हो सकती हैं। सीजोफ्रेनिया के मरीजों में यह 60 प्रतिशत सही माना गया, बशर्ते विवाह से पहले मरीज की मानसिक स्थिति को छुपाया न जाए। अध्ययन में 23-65 आयुवर्ग के पुरुषों को शामिल किया गया। यह अध्ययन जर्नल ऑफ मेंटल हेल्थ एंड ह्यूमन बिहेवियर के सितंबर महीने के अंक में प्रकाशित हुआ है।

क्या है सीजोफ्रेनिया

16 से 30 साल की उम्र में प्रभावित करने वाले सीजोफ्रेनिया को व्यवहार संबंधी दिक्कत माना जाता है, 10 प्रतिशत मामलों में इसे जेनेटिक कहा गया है। बीमारी के नेगेटिव और पॉजिटिव चरण होते हैं। नेगेटिव में बोलने की क्षमता खोना, चेहरे का मुद्राविहीन होना, निर्णय लेने की क्षमता खोना या फिर एकाग्रता में कमी आदि लक्षण दिखते हैं। वहीं, पॉजिटिव सीजोफ्रेनिया में किसी व्यक्ति विशेष पर अधिक निर्भरता और हैलोसीनेशन (बेवजह की आवाजें सुनना, भय या डर) शामिल हैं।

अध्ययन के परिणाम

– 34 प्रतिशत सफल विवाहित मरीजों को दी जाने वाली दवाएं कम हुईं

– 56 प्रतिशत अविवाहित युवाओं में दवाओं की डोज बढ़ाई गई

– अध्ययन में शामिल 23 प्रतिशत दो साल से इस बीमारी के शिकार थे

– 11 प्रतिशत सीजीफ्रेनिया के कम पढ़े लिखे मरीजों में यह प्रयोग विफल रहा

 

 

Share:

Leave a reply