खतरनाक हो सकती है खुद की डॉक्टरी

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Self Medication
समझें सेल्फ मेडिकेशन की कुछ जरुरी बातें
अक्सर लोग मामूली सिरदर्द और थकान में भी अपनी मर्जी से दवा लेकर खा लेते हैं। कई बार तो आराम करने भर से ठीक हो जाने वाली दिक्कतों के लिए भी लोग दवाई लेने से नही कतराते हैं। लेकिन वे इस बात से अनजान होते हैं कि अपनी मर्जी से की गई यह डॉक्टरी आपके लिए खतरनाक भी साबित हो सकती है। हमारे एक्सपर्ट हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के. के. अग्रवाल और मूलचंद हॉस्पिटल के इंटर्नल मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. वरिंदर आनंद दे रहें हैं कुछ टिप्स, जिन्हें अपनाकर आप सेल्फ मेडिकेशन से आने वाली बेवजह की परेशानियों से बच सकते हैं:

रखें इन बातों का ध्यान
-आप जो भी दवा लेते हैं, उसके साइड इफेक्ट के बारे में जरूर पता करें। ओटीसी यानी ओवर द काउंटर कैटिगरी में आने वाली दवाओं के भी कुछ साइड इफेक्ट होते हैं। इसकी जानकारी दवा के रैपर या बॉटल पर लिखी होती है। डॉक्टर की पर्ची देखकर मिलने वाली दवाओं के साथ भी एक पर्चा जरूर आता है, जिस पर दवा के संभावित साइड इफेक्ट लिखे होते हैं। युवाओं और पूरी तरह फिट कॉलेज स्टूडेंट्स को भी साइड इफेक्ट हो सकते हैं। कुछ लोगों को साइड इफेक्ट का खतरा ज्यादा होता है। उदाहरण के तौर पर बर्थ कंट्रोल वाली दवाएं ब्लड में क्लॉट बनने का कारण बन सकती हैं।

-आप जो दवाएं ले रहे हैं, उनके संभावित पारस्परिक प्रभाव को जानें। कई बार दवा के साथ आने वाले पर्चे पर उससे संबंधित साइड इफेक्ट के साथ दूसरी दवाओं के साथ इसके पारस्परिक प्रभाव की भी जानकारी होती है। कई दवाओं के गंभीर पारस्परिक प्रभाव दिखते हैं। कोई भी नई दवा शुरू करने से पहले जांच करें। उदाहरण के तौर पर अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिव डिस्ऑर्डर में ली जाने वाली दवा एडरआल (Adderall) कई एंटी डिप्रेशन दवाओं के साथ पारस्परिक प्रभाव छोड़ती है। पारस्परिक प्रभाव आमतौर पर दो अलग तरह की दवाओं के बीच होता है, मगर ऐसा खाने-पीने की कुछ खास चीजों और तंबाकू से भी हो सकता है। डिप्रेशन में ली जाने वाली दवा मोनामाइन ऑक्सिडेज इनहिबिटर लेने के साथ आप चीज, मीट, सोया सॉस, बीयर और वाइन आदि का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

-एनसेड जैसे इब्यूप्रोफेन (Ibuprofen) का इस्तेमाल हर समय नहीं हो सकता। एक ही तरह की दवा का बार-बार इस्तेमाल कई तरह के गंभीर साइड इफेक्ट का कारण बन सकता है। इब्यूप्रोफेन और ऐस्पिरिन जैसी ओटीसी दवाओं का एक जाना-पहचाना साइड इफेक्ट होता है। ये दवाएं आंतों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। बहुत सारी एनसेड्स, ओवर द काउंटर दवाएं (जो टाइलेनॉल या ऐस्पिरिन नही हैं) भी पेट की गंभीर समस्या का कारण बन सकती हैं। इनकी वजह से पेट का अल्सर या ब्लीडिंग हो सकती है। अगर इब्यूप्रोफेन को ज्यादा मात्रा में खाली पेट इस्तेमाल करते हं। तो गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्या हो सकती है। जहां तक हो सके अपनी मर्जी से इन दवाओं का इस्तेमाल न करें। इस तरह की दिक्कतों से बचने का एक ही तरीका है, जब तक बहुत जरूरी न हो, दवा न लें और लें तो अपने लक्षणों के हिसाब से ही लें। उदाहरण के तौर पर एसिटामिनोफेन (Acetaminophen) बुखार और फ्लू जैसे लक्षणों में ठीक रहती है जबकि इब्यूप्रोफेन दर्द से निजात के लिए ठीक है। बहुत सारे लोग इब्यूप्रोफेन का इस्तेमाल करते हैं। यह किडनी और पेट पर भारी पड़ सकता है।

-ओटीसी दवा एसिटामिनोफेन को भारत में लोग पैरासिटामॉल के नाम से जानते हैं। वायरल आदि के दर्द या बुखार से राहत के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसके भी इब्यूप्रोफेन जैसे साइड इफेक्ट देखे गए हैं। यह शरीर में जाकर अल्कोहल की तरह प्रतिक्रिया करती है। ऐसे में अगर टाइलेनॉल (tylenol) यानी मामूली दर्द निवारक दवा और अल्कोहल अगर एक समय पर लिया जाए तो लिवर को संघर्ष करना पड़ता है। यही वजह है कि अगर आप पैरासिटामॉल लेते हैं और ज्यादा मात्रा में डिंक करते हैं तो लिवर को नुकसान हो सकता है।

-खांसी को दबाने वाले सिरप खांसी आने की उत्तेजना को कम करते हैं। इसे सप्रेसेंट कहते हैं। खांसी की वजह पर असर करने वाली दवा बलगम बाहर निकालती है। इसे एक्सपेक्टरेंट कहते हैं। अगर आपको सूखी खांसी है तो सप्रेसेंट का इस्तेमाल करें और अगर बलगम वाली खांसी है तो एक्सपेक्टरेंट का। गलत दवा का इस्तेमाल आपकी तकलीफें बढ़ा सकता है। आमतौर पर खांसी की दवाएं उतनी असरदार नहीं होतीं जितना विज्ञापनों में दावा किया जाता है।

– जितना जरूरी है सही प्रकार की दवा का इस्तेमाल, उतना ही जरूरी है सही मात्रा में इस्तेमाल। ज्यादा मात्रा में दवा का इस्तेमाल शरीर के लिए नुकसानदेय है। मसलन इब्यूप्रोफेन का पेट पर असर होता है। हमेशा डॉक्टर की लिखी गई डोज का ही इस्तेमाल करें। ज्यादा मात्रा में दवा लेने का मतलब यह नहीं है कि आपकी परेशानी जल्द ठीक हो जाएगी, बल्कि इससे दवा का नुकसान ज्यादा होगा।

-एंटीबायोटिक और दूसरी दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही करें। एंटीबायोटिक महत्वपूर्ण दवा होती है। अगर आप इसका पूरा कोर्स नहीं लेंगे तो इंफेक्शन और खराब स्थिति में पहुंच सकता है। यह भी याद रखें कि एंटीबायोटिक वायरल इंफेक्शन जैसे फ्लू ठीक नहीं करता। अगर आपको फ्लू है और एंटीबायोटिक इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपको कोई फायदा नहीं होने वाला है। एंटीबायोटिक ब्रोंकाइटिस और साइनस इंफेक्शन जैसी समस्याओं के इलाज के लिए ठीक रहती हैं। बाकी दवाएं, जैसे एंटी डिप्रेशन दवा अगर तय वक्त पर नियमित रूप से न ली जाएं तो काम करना बंद कर देती हैं। डॉक्टर से पूछे बिना दवाओं और घरेलू नुस्खों को मिलाएं नहीं।

-गर्भनिरोधक गोलियां इस्तेमाल के दिन से ही काम नहीं करतीं। एक हफ्ते या कई बार एक महीने तक लगातार इस्तेमाल के बाद ही ये असर दिखाती हैं। ऐसे में इन्हें लेना शुरू करने के पहले दिन से निश्चिंत होने का दावा गलत हो सकता है। लगातार तीन महीने के इस्तेमाल के बाद ही ये गोलियां पूरी तरह असरदार होती हैं। लगातार दो या इससे ज्यादा दिन तक गोली लेना भूल जाने से इसका असर कम हो जाता है।

– एक अनुमान के मुताबिक जिंदगी में एक हजार से ज्यादा पेनकिलर्स खाने से किडनी खराब हो सकती है। अगर आपको सौ साल जीना है, तो साल में 10 गोली से ज्यादा कभी न लें। पेनकिलर्स लगातार लेते रहने से किडनी और लिवर में जहर बन सकता है। पेट में ब्लीडिंग भी हो सकती है। उबकाई आना, सुस्ती, मुंह सूखना, अचानक ब्लड प्रेशर कम होना और कब्ज जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं।

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