छोटा सा ब्लॉकेज भी हो सकता है हार्ट अटैक की वजह

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कोरोनरी आर्टरी में छोटे-छोटे ब्लॉकेज का होना बड़े ब्लॉकेज से कहीं अधिक खतरनाक होता है। यह मान लेना पूरी तरह गलत है कि जितना बड़ा  ब्लॉकेज, हार्ट अटैक का उतना अधिक खतरा।

आमतौर पर बड़े ब्लॉकेज की वजह से एंजाइनल चेस्ट पेन के लक्षण सामने आते हैं क्योंकि इसकी वजह से मेहनत का काम करते समय हार्ट तक पर्याप्त ब्लड नहीं मिल पाता है, लेकिन इस स्थिति में हार्ट अटैक नहीं होता है। दूसरी तरफ ऐसे लोगों में अचानक हार्ट अटैक आ जाता है, जो देखने में पूरी तरह स्वस्थ होते हैं, ऐसे लोगों में अक्सर दिल की मांसपेशियों में गंभीर डैमेज अथवा सडन कार्डिएक डेथ का मामला भी देखने में आता है। ऐसे अधिकतर मरीज हार्ट अटैक से पहले कभी भी एंजाइनल चेस्ट पेन जैसे लक्षण सामने आने से इनकार करते हैं। ब्लॉकेज से होने वाले हार्ट अटैक के अधिकतर मामलों में कोरोनरी आर्टरी में 50 पर्सेंट से भी कम हिस्से में रूकावट होती है। नसों में गंभीर रूकावट (70 पर्सेंट से अधिक रूकावट) का अंत अक्सर गंभीर हार्ट अटैक से नहीं होता है।

प्लॉक की वजह

ऐसे में, अगर आर्टरी में गंभीर रूकावट हार्ट अटैक की वजह नहीं है, तो आखिर वजह क्या है? इसका जवाब है,  रूकावट की गंभीरता नहीं, बल्कि इसकी प्रकृति वजह है। रूकावट प्लॉक से बनती है। प्लॉक्स, कोलेस्टृॉल, फैट, फाइबरस टिश्यू और व्हाइट ब्लड सेल्स का मिक्सचर होता है, जो धीरे-धीरे नसों की दीवारों पर चिपक जाता है। से बनता है। ये जमाव गाढ़ेपन और तोड़े जाने की प्रवृत्ति को लेकर अलग-अलग तरह के होते हैं।

अगर गाढ़ापन हार्ड होगा, तो इस प्लॉग को स्टेबल कहा जाता है और अगर इसका घनत्व मुलायम है तो इसे तोड़े जाने के अनुकूल माना जाता है, ऐसे में इसे अनस्टेबल प्लॉग भी कहते हैं। एक अस्थायी प्लॉग रूकावट की मात्रा को ध्यान में न रखते हुए, गंभीर हार्ट अटैक का एक कारण होता है। एक स्थायी यानी स्टेबल प्लॉक, जिसके रूकावट की मात्रा से कोई फर्क नहीं पड़ता, गंभीर हार्ट अटैक के लिए जिम्मेदार नहीं होता है।

स्टेबल यानी स्थायी प्लॉक धीरे-धीरे बढ़ता है, ऐसे में रक्त के प्रवाह को नई आर्टरीज का रास्ता ढूंढने का मौका मिल जाता है, जिसे कोलेटरल वेसेल  कहते हैं। ये वेसेल ब्लॉक हो चुकी आर्टरी को बाईपास कर देती हैं और दिल की मांसपेशियों तक आवश्यक रक्त और ऑक्सिजन पहुंचाती हैं। कुछ मरीजों में आर्टरी पूरी तरह से ब्लॉक हो जाने के बावजूद उनके दिल की मांसपेशियों तक सामान्य रूप से सप्लाई होती रहती है, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उनमें कोलेटरल मसल्स के विकसित होने का पूरा समय मिल जाता है।

एक अनस्टेबल यानी अस्थायी प्लॉक में, प्लॉक के टूटने पर, एक खतरनाक थक्का बन जाता है, और जैसा कि इस मामले में कोलेटरल के विकसित होने का पूरा समय नहीं मिला होता है, मरीज की मांसपेशियां गंभीर रूप से डैमेज हो जाती हैं और वह सडन कार्डिएक डेथ का शिकार हो जाता है।

हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्टृॉल, अप्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष धूम्रपान करना कुछ ऐसे कारण हैं जो प्लॉक के टूटने के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसके अन्य कारणों में नकारात्मक सोच, डीप फ्राई किया हुआ खाना आदि भी शामिल है। यही वे कारण हैं जो शरीर में गैर जरूरी तत्वों  के पैदा होने की भी वजह बनते हैं, जिससे कोलेस्टृॉल ज्यादा चिपचिपा हो जाता है और प्लॉक के टूटने की आशंका बढ़ाता है।

इस तरह के प्लॉक, आमतौर पर छोटे-छोटे होते हैं और बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक टूट सकते हैं। इस समस्या वाले मरीज आमतौर पर खुद पूरी तरह से स्वस्थ महसूस करते हैं, उनका टृडमिल टेस्ट भी नेगेटिव हो सकता है, यह भी हो सकता है कि वे पिछले कई सालों से नियमित एक मील  तक पैदल चलते आ रहे हों, और ऐसा करने में उन्हें  कभी थकान अथवा सीने में दर्द महसूस न हुआ हो। प्लॉक के टूटने और हार्ट अटैक के कारण संबंधी लक्षण सामने न आने तक मरीज पूरी तरह से सामान्य महसूस कर सकता है।

 

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