सोया प्रोटीन से बचें मीनोपाज़ की तकलीफ़ों से

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soy protein could protect from bone loss after menopause
मीनोपाज़ (menopause) यानी माहवारी खत्म होने के बाद महिलाओं मे हड्डियों से जुड़ी तकलीफ़ें बढ़ना एक आम समस्या है। बहुत सी महिलाओं को तो ऑस्टियोपोरोसिस का सामना भी करना पड़ता है जिसमे हड्डियाँ इतनी कमजोर हो जाती हैं कि हल्की चोट भी फ्रैक्चर का कारण बन जाती है। यूके के यूनिवर्सिटी ऑफ हल के रिसरचर्स ने अपनी स्टडी मे पाया है कि सोयाबीन (soy protein) वाली डाइट लेने वाली महिलाओं को इन तकलीफ़ों का सामना कम करना पड़ता है।

यह स्टडी रिपोर्ट हाल ही मे एडिनबर्ग मे हुई सोसाइटी फॉर एंडोक्रिनोलोजी की एनुअल कान्फ्रेंस मे पेश की गई। आस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसका पता तब तक नहीं चलता है जब तक कि फ्रैक्चर नहीं हो जाता। दुनिया भर मे हर 3 सेकंड मे एक व्यक्ति को इसके चलते फ्रैक्चर होता है। यह बीमारी महिलाओं मे ज्यादा होती है। मीनोपोज के बाद महिलाओं के शरीर मे एस्ट्रोजन कम मात्रा मे बनता है। यह एक सेक्स हारमोन है जो बोन लॉस से भी बचाता है।
सोयाबीन मे आइसोफ्लेवंस होते हैं, इसका केमिकल स्ट्रक्चर एस्ट्रोजन से मिलता-जुलता होता है। ऐसे मे वैज्ञानिकों का मानना है कि सोयाबीन भी हड्डियों पर एस्ट्रोजन जैसा असर दिखाएगा।

इस स्टडी मे 200 ऐसी महिलाओं को शामिल किया गया था जो मीनोपोज़ के करीब थीं। इन महिलाओं को दो ग्रुप्स मे बांटा गया। 1 ग्रुप को रोजाना 30 ग्राम सोया प्रोटीन सपलीमेंट 66 मिलीग्राम आइसोफ्लेवंस के साथ दिया गया और दूसरे ग्रुप को समान मात्रा मे सोया प्रोटीन का सप्लिमेंट दिया गया लेकिन बिना आइसोफ्लेवंस के।
6 महीने बाद इन महिलाओं की जांच की गई। जांच मे पाया गया कि जिन महिलाओं ने आइसोफ्लेवंस के साथ सोया प्रोटीन का सप्लिमेंट लिया था उनकी हड्डियों को अन्य महिलाओं की तुलना मे कम नुकसान हुआ था।

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