प्रेग्नेंसी से पहले शुरू कर दें हड्डियों की देखभाल

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हड्डियों की क्षमता (bone health) और मजबूती में गिरावट पुरूषों व महिलाओं दोनों के लिए उम्र बढ़ने की एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन महिलाओं को इसका खतरा कहीं ज्यादा रहता है, न सिर्फ बुढ़ापे में बल्कि उनके पूरे जीवन काल में। यहां तक कि जब वे 30 की उम्र में पहुंचती हैं, जो कि बोन डेंसिटी का पीक होता है, तभी से उनकी हड्डियों में कमी आने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। अपने शारीरिक संयोजन और बनावट के साथ-साथ जीवन के विभिन्न पड़ावों पर गंभीर बदलावो से गुजरने की वजह से महिलाओं को अपनी हड्डियों की देखभाल ज्यादा और जीवनभर करने की जरूरत होती है। इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण दौर होता है गर्भावस्था (pregnancy) का, क्योंकि इस दौरान महिला के शरीर से एक भ्रूण के विकास की जरूरतें भी पूरी होती हैं। बोन लॉस की प्रक्रिया ऐसे तो जीवनभर चलती है लेकिन जब आपके शरीर से एक और शरीर अपनी जरूरत का पोषण सोखने लगता है तब समस्या और बढ़ जाती है। यह समय होता है गर्भावस्था का।

प्रेग्नेंसी के दौरान चाहिए विशेष देखभाल
गर्भावस्था में आपके गर्भस्थ शिशु की हड्डियों के विकास के लिए बहुत सारा कैल्शियम चाहिए होता है, ऐसे में आपके शरीर में इसकी तेजी से कमी होती है। बच्चा अपने लिए संपूर्ण पोषण मां के आहार से लेता है। अगर आपके आहार में पर्याप्त कैल्शियम और मिनरल्स नहीं होते हैं तो बच्चा आपकी हड्डियों से ये पोषक तत्व सोखने लगता है। ऐसे में अगर आप पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम नहीं लेती हैं तो आपकी हड्डियों को काफी नुकसान होता है। यह समस्या सिर्फ गर्भावस्था तक ही नहीं चलती बल्कि उस पीरियड में चलती है जब तक आप बच्चे को अपना दूध पिलाती हैं, और बच्चे के पोषण का मुख्य स्रोत आपका दूध होता है।

ब्रेस्ट्फीडिंग के दौरान भी होता है कैल्शियम का लॉस
गर्भस्थ शिशु के विकास में सबसे ज्यादा जरूरत कैल्शियम की होती है और अगर गर्भस्थ महिला को अपने आहार के जरिए यह मिनरल पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलता है तो बच्चे की जरूरतें मां की हड्डियों से कैल्शियम लेकर पूरी होती हैं। बहुत सारी महिलाओं में बच्चे के जन्म और स्तनपान का समय खत्म होने के बाद महिलाओं की सेहत में सुधार हो जाता है, लेकिन बहुत सारी महिलाओं के लिए यह नुकसान जीवनभर के लिए साथ रह जाता है। इस स्थिति से बचाव संभव है, अगर हम अपने आहार में कैल्शियम की मात्रा का ध्यान रखें और जीवन के शुरूआती दिनों से ही अपनी सेहत को प्राथमिकता दें।

कैल्शियम की कमी ले सकती है खतरनाक रूप
लंबे समय तक लगातार चलने वाले कैल्शियम की कमी खतरनाक ऑस्टियोपोरोसिस की वजह बन सकती है। मीनोपॉज के बाद यह प्रक्रिया और तेज हो जाती है। ऑस्टियोपोरोसिस या कमजोर हड्डियां होने पर आपको फ्रैक्चर होने का खतरा भी बढ़ जाता है। चूंकि ऑस्टियोपोरोसिस एक प्रगतिशील सिंड्रोम है और इसमें सालों का समय लग जाता है, ऐसे में इसका असर अक्सर बुढ़ापे में नजर आता है। इतना ही नहीं, जब तक कोई फ्रैक्चर नहीं होता है तब तक यह पता भी नही लग पाता है कि आपको ऑस्टियोपोरोसिस हुआ है। हालांकि हम बोन लॉस को देख या महसूस नहीं कर सकते हैं लेकिन यह सुनिश्चित तो कर सकते हैं कि ऐसा न हो।

बच्चे की सेहत भी हो सकती है प्रभावित
आपके शरीर और आहार में कैल्शियम की कमी का एक अन्य खतरनाक असर यह होता है कि आपके बच्चे की हड्डियों के संपूर्ण विकास हेतु उसे पर्याप्त मात्रा में यह पोषण नहीं मिल पाता।

इन चीजों का रखें ध्यान
कैल्शियम एवं विटामिन डीः उपयुक्त मात्रा में कैल्शियम लेने की जरूरत आपको जीवनभर पड़ती है। अपने आहार में खूब सारा कैल्शियम शामिल करें। इसके लिए दूध पिएं, दही खाएं, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, ब्रोकली, सीरियल, टोफू और बादाम जैसे नट्स अपने आहार में शामिल करें। यद्यपि कैल्शियम की जरूरत आपको जीवनभर होती है, लेकिन गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान आपको इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है क्योंकि आपके और बच्चे, दोनों के पोषण का स्रोत आप ही होती हैं। यही वजह है कि गर्भावस्था में डॉक्टर कैल्शियम सप्लिमेंट लेने की सलाह देते हैं। लेकिन अपने आहार में कैल्शियम की मात्रा बढ़ाने के लिए आपको प्रेग्नेंसी तक का इंतजार नहीं करना चाहिए। अपने डॉक्टर से संपर्क करें और कैल्शियम सप्लिमेंट लें, खासतौर से तब जब आप मां बनने की तैयारी कर रही हैं।

यह भी सुनिश्चित करें कि आप पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी ले रही हैं, इससे आपकी हड्डियों को कैल्शियम सोखने में सहायता मिलेगी। अगर आप सूरज की रोशनी के पर्याप्त संपर्क में नहीं आती हैं तो विटामिन डी सप्लिमेंट भी लें।

नियमित व्यायामः हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए नियमित व्यायाम बेहद जरूरी है। वेट बियरिंग एक्सरसाइज जैसे कि सीढ़ियां चढ़ना, डांसिंग, रनिंग जैसी वो सारी एक्सरसाइज जिसमें आप खुद को गुरूत्वाकर्षण शक्ति के विपरीत चलाते हैं, हड्डियों को मजबूत बनाती हैं। ये व्यायाम आपको अपनी दिनचर्या और आदत में शामिल करने चाहिए। यहां तक कि गर्भावस्था में भी व्यायाम करना जरूरी होता है। न सिर्फ हड्डियां बल्कि इससे मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं।

धूम्रपान छोड़ेंः अत्यधिक धूम्रपान करना आपकी हड्डियों की सेहत के लिए अच्छा नहीं होता है। आजकल की महिलाएं बेहद अस्वस्थ जीवनशैली जीती हैं, जिसमें शारीरिक सक्रियता का अभाव, अस्वस्थ आहार और धूम्रपान एवं अल्कोहल पर निर्भरता आदि शामिल है। इन सभी कारणों से उन्हें उम्र से पहले ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा बढ़ गया है। अगर आप धूम्रपान करती हैं तो इसे तुरंत छोड़ दें। बेहतर है कि मां बनने की प्लानिंग से पहले इससे छुटकारा पा लें।

डॉ. विवेक महाजन,
ऑर्थोपेडिक सर्जन
इंडियन स्पाइनल इंजुरी सेंटर, नई दिल्ली

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