प्युबर्टी की उम्र करती है खास डिमांड

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प्युबर्टी की उम्र हार्मोनल बदलावों की और सबसे ज्यादा शारीरिक बदलावों की होती है। किशोरावस्था में बच्चे की एडल्ट हाइट का 20 पर्सेंट और वजन का 50 पर्सेंट विकास हो जाता है। क्योंकि ये बदलाव बेहद तेजी से हो रहे होते हैं, ऐसे में बच्चे की न्यूट्रीशनल जरूरतें भी बढ़ जाती हैं, खासतौर से प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, फोलेट और जिंक की। ऐसे मे अगर आपको कुदरत ने एक बच्ची का उपहार दिया है तो आपकी जिम्मेदारियाँ थोड़ी ज्यादा बढ़ जाती हैं, क्योंकि यह वक्त बिटिया को आने वाले जीवन की तमाम जिम्मेदारियों के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करने का होता है:

कैलोरी
-इस उम्र में आपकी बिटिया को रोजाना तकरीबन 2,200 कैलोरी की जरूरत होती है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि यह कैलोरी उसे अच्छे प्रोटीन, लो-फैट मिल्क प्रॉडक्ट, साबुत अनाज, फल और सब्जियों से मिलनी चाहिए।

प्रोटीन
शरीर के विकास और मसल्स को मेंटेन रखने के लिए टीनएज बिटिया को प्रतिदिन 45 से 50 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। जो लड़कियां नॉन वेज खाती हैं उनकी ये जरूरतें आमतौर पर मीट, फिश और मिल्क प्रॉडक्ट से पूरी हो जाती हैं, लेकिन जो वेजिटेरियन होती हैं उन्हें इसकी पूर्ति सोयाबीन, बींस और नट्स आदि से करना होता है।

कैल्शियम
किशोरावस्था में बच्चे का शरीर भविष्य में हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए अधिक से अधिक कैल्शियम सोखने के लिए तत्पर होता है, मगर अफसोस की बात है कि ज्यादातर लड़कियों को र्प्याप्त मात्रा में कैल्शियम नहीं मिल पाता है, जिसकी वजह से उनकी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और आगे चलकर उन्हें ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या होती है। यह ध्यान रखें कि आपकी टीनएज बिटिया के बोन मास में 5 पर्सेंट बढ़ोतरी उसे भविष्य में होने वाले बोन फ्रैक्चर के 40 पर्सेंट खतरे से बचाएगी। इस उम्र में लड़कियों को प्रतिदिन 700 मिलीग्राम कैल्शियम देने की सलाह दी जाती है, मगर उन्हें इसका आधा हिस्सा ही मुश्किल से मिल पाता है। बच्चों को सोडा और अन्य मीठी व प्रिजर्वेटिव वाली चीजों से दूर रखना चाहिए क्योंकि ये हड्डियों में कैल्शियम की मात्रा घटाने का काम करते हैं। उन्हें मिल्क प्रॉडक्ट, कैल्शियम वाले जूस, सीरियल और हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे कि पालक ज्यादा खिलाएं।

आयरन
आयरन खून को सभी मसल्स तक ऑक्सिजन पहुंचाने में मदद करता है। ब्रेन के फंक्शन को सामान्य रखता है और बीमारियों से लड़ने वाली रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। टीनएज लड़कियों को माहवारी में होने वाली ब्लीडिंग के चलते लड़कों से अधिक आयरन की जरूरत होती है। उन्हें रोजाना 15 मिलीग्राम आयरन की जरूरत होती है। इसके लिए रेड मीट, चिकन, बींस, नट्स, साबुत अनाज और पालक जैसी सब्जियां फायदेमंद होती हैं।

इमोशनल और साइकलॉजिकल जरूरतें
अधिकतर लड़कियों के लिए किशोरावस्था एक मुश्किल फेज होता है। यहां तक कि उनके लिए भी जिन्हें घर और स्कूल दोनों जगहों पर पूरा सहयोग और सुरक्षा मिलती है। प्युबर्टी की वजह से होने वाला शरीरिक बदलाव इसके लिए काफी हद तक जिम्मेदार होता है। टीन एज में लड़कियां अपने परिवार के सदस्यों से दूरी बनाने लगती हैं, अपनी खुद की पहचान ढूंढती हैं, अपने हमउम्र लोगों से खुद की तुलना करती हैं, वयस्क लोगों के साथ अपने रिलेशनशिप को पुनः परिभाषित करती है, सेक्सुअलिटी को एक्सप्लोर करती है, खुद के नैतिक व आचार संबंधी नियम बनाती है और वयस्कता की जिम्मेदारियों और चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करती है। ऐसे में उन्हें इमोशनल सपोर्ट की बहुत ज्यादा जरूरत होती है। ऐसे में पैरंट्स को टीनएज बच्ची पर नजर रखने और उनकी समस्याओं को जानने और उन्हें सुलझाने के लिए उनसे बात करनी चाहिए। ऐसा तभी संभव है जब आपकी बिटिया के साथ आपका व्यवहार दोस्ताना होगा।

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