टेंशन डाल रही है मातृत्व सुख में अड़ंगा

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एक मल्टीनेशनल कम्पनी में काम करने वाली 33 साल की शिखा जब संतान की इच्छा के साथ डाक्टर से मिलीं, तब वह पिछले दो साल से गर्भधारण करने के लिए प्रयासरत थीं। फर्टिलिटी टेस्ट (Fertility test) में स्त्री-पुरुष दोनों में ऐसी कोई शारीरिक कमी नहीं निकली कि वे माता-पिता न बन सकें। डॉक्टर ने उन्हें मनोवैज्ञानिक से मिलने की सलाह दी। मनोवैज्ञानिक ने देखा तो पाया कि न तो यह मामला फिजिकल हेल्थ का है, न ही मेंटल हेल्थ का। यह तो सीधा-सादा लाइफ स्टाइल (Lifestyle) से जुड़ा मामला है, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है। मनोवैज्ञानिक की सलाह मानते हुए पति-पत्नी ने रोज सुबह 20 मिनट मार्निग वॉक, हल्की एक्सरसाइज और मेडिटेशन करना शुरू किया। लाइफ स्टाइल बदलने के लिए उन्होंने माइंड बाडी प्रोग्राम ज्वाइन कर लिया। कुछ हफ्ते बाद ही शिखा प्रेग्नेंट हो गई और अब वह पांच महीने की बेटी की मां हैं।

तनाव से महिलाओं के दिमाग (Brain), पिट्यूटरी (pituitary) और ओवेरी (ovary) के बीच कम्युनिकेशन बिगड़ जाता है। मनोवज्ञानिक कहते हैं कि तनाव के दौरान शरीर में कई तरह के न्यूरोकेमिकल (Neurochemical) परिवर्तन होते हैं। इसके अतिरिक्त गर्भधारण की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण केमिकल मैसेंजर की स्थिति भी भावनाओं में परिवर्तन के साथ बदल जाती है।

यूं तो इंफर्टिलिटी (Infertility) के कई कारण हैं लेकिन उन सभी कारणों में से तनाव सबसे ज्यादा लोगों को इंफर्टिलिटी का शिकार बना रहा है और इसमें कमी न होकर बढोतरी ही हो रही है।काम के बढ़ते प्रेशर के कारण युवा जोड़ों में इन्फर्टिलिटी बढ़ी है। खासकर प्रेशर वाले जॉब्स जैसे साफ्टवेयर, मार्केटिंग आदि में यह खतरा बहुत बढ़ गया है।

महिला और पुरुष बराबर
मदर्स लैप आईवीएफ सेंटर की आईवीएफ एक्सपर्ट डाॅ. शोभा गुप्ता कहती हैं, कोई भी दंपती, जिसके विवाह को एक साल या उससे ज्यादा हो गया है और कोई कंट्रासेप्टिव इस्तेमाल नहीं करने के बावजूद गर्भधारण नहीं हो पता है तो पाटा है तो डाक्टर से सम्पर्क करें। इन्फर्टिलिटी के 40-45 प्रतिशत मामलों में समस्या महिला की तरफ से होती है और इतने ही मामलों में पुरुषों की समस्याएं इसके लिए जिम्मेदार होती हैं। बाकी मामले अनएक्सप्लेंड कारणों से होते हैं। ऐसा भी होता है कि पति-पत्नी दोनों में कोई कमी नहीं है, फिर भी इन्फर्टिलिटी है।

इन्फर्टिलिटी और तनाव
एजुकेटेड सोसाइटी और महानगरों में इस प्रकार के केस ज्यादा देखने को मिलते हैं क्योंकि यहां आपाधापी और वर्क प्रेशर रहता है। इसके अलावा पारिवारिक एकाकीपन भी अक्सर जोड़ों में डिप्रेशन व बेचैनी पैदा करता है। आजकल लड़के-लड़कियां देर से शादी करते हैं। शादी करने के तुरंत बाद वह बच्चा नहीं चाहते। इस वजह से शुरुआत में वह कई तरह की सावधानियां बरतते हैं। और फिर जब महिला जल्दी गर्भधारण नहीं कर पातीं तो चिंताग्रस्त हो जाती हैं। निरंतर दबाव में रहने के कारण वह दिन-रात बेचैन रहती हैं।
उन्हें खुद नहीं समझ आता कि पति-पत्नी दोनों स्वस्थ हैं फिर भी गर्भधारण क्यों नहीं कर पा रही। उन्हें तमाम तरह के तनाव हो जाते हैं। वे निरंतर चिंता, डिप्रेशन फ़्रस्ट्रेशन में घुलने लगती है जिसका असर उनकी सेहत पर पड़ता है। हाल में हुए एक सर्वे के अनुसार जो महिलाएं ज्यादा तनाव में रहती हैं उनमें से 40 प्रतिशत महिलाओं में बांझपन की शिकायत होती है।

दिल्ली बेस्ड, वेट लाॅस स्पेशलिस्ट, डॉ. अनु गुप्ता बताती है कि आज की दौडती-भागती जिंदगी में स्ट्रेस एक सामान्य बात है, जो कि मोटापे का भी एक बडा कारण है। अगर आप वजन कम करना चाहते है या करने की कोशिश में हैं तो तनाव इसे और भी मुश्किल बना देता है। तनाव के कारण मानव शरीर में कुछ ऐसे हार्मोन बनते हैं जो आपके वजन को और भी अधिक बढा देते हैं। असल में तनाव आपके नर्वस सिस्टम को भी बहुत हद तक प्रभावित करता है और यह खाने की भूख को अनियमित कर देता है। जिसके कारण हार्मोंस में कुछ ऐसे बदलाव होते हैं जो आपको ज्यादा खाने के लिए प्रेरित करते हैं। जिसकी वजह से आप ओवरइटिंग करने लगते हैं और इससे आपका वजन बढने लगता है।

तनाव का शरीर पर प्रभाव
शारीरिक क्रियाओं के तार मन से जुड़े होते हैं। निरंतर चिंता में रहने के कारण महिला व पुरुष दोनों के हारमोन्स असंतुलित होने लगते हैं। हमारे शरीर में केमिकल ट्रांसमीटर होता है, सेरोटोनियर और डोपामीन नामक हार्मोन मिलकर आपके दिमाग को संतुलित रखते हैं। शारीरिक स्तर पर महिलाओं में भारी अनियमित ब्लीडिंग, मासिक धर्म के दौरान थकान, पेट में मरोड़, पेडू में दर्द या कब्ज की शिकायत हो जाती है। हारमोन्स का असर आपके दिमाग से होता है। जब आप लगातार किसी दबाव में रहते हैं तो हार्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं।

मदर्स लैप आईवीएफ सेंटर की स्ट्रेस मैनेजमेंट स्पेशलिस्ट डॉ. पुष्पा गोयल बताती है की जो महिलाएं कामकाजी हैं वो ज्यादा स्ट्रेस की शिकार होती है। 30 साल की स्वाति मिश्रा जो एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करती हैं, उनका मिसकैरिज हुआ जिसका कारण तनाव था। जब वह हमारे इलाज के लिए आई थीं तब उनका तनाव चरम सीमा पर था। शुरुआती कुछ सेशन में ही पता चला कि यह तनाव उसे ऑफिस की टारगेट पूरे न होने के कारण हुआ और इसी वजह से उसका मिसकैरिज हुआ.। तनाव में शरीर का हार्मोनल बैलेंस बिगड़ जाता है। जिसका असर मानसिक और शारिरीक दोनों तौर से पड़ता है। योग, मेडिटेशन , स्ट्रेस मैनेजमेंट थरेपी, हॉलिडे पर जाना, डीप ब्रीदिंग एक्ससाइज आदि से तनाव कम किया जा सकता है।

बेवजह की चिंता से बचें
आईवीएफ विशेषज्ञ डाॅक्टर शोभा गुप्ता कहती हैं, गर्भधारण करने से कुछ महीने पूर्व आप अपने को इसके लिए मानसिक रूप से तैयार करें। हालिया शोध के मुताबिक जब किसी महिला को भावनात्मक रूप से सपोर्ट मिलता है तो वह जल्दी गर्भधारण करती है। किसी भी बेवजह चिंता को अपने दिमाग में न जगह दें। जीवन के प्रति आपका नजरिया सकारात्मक होना चाहिए, नकारात्मक व निराशाजनक बातें, मानसिक परेशानियों का कारण बनती है। रचनात्मक गतिविधियों में अपनी सक्रियता बढ़ाकर इससे बचा ज सकता है। अनुसंधान से साबित हो चुका है कि सेक्स से संतुष्ट दंपतियों के बीच तालमेल बेहतर होता है और दांपत्य जीवन भी तनाव से मुक्त रहता है।

संगीत का लें सहारा
संगीत आपके तनाव को दूर करने में मददगार साबित हो सकता है। भजन, क्सासिकल संगीत का आनंद लें।

व्यायाम व योग
यांत्रिक क्रियाएं जैसे ध्यान, आसन और प्राणायाम आदि भी तनाव दूर करने में कारगर साबित हुए हैं। अध्यात्म किसी के लिए भले ही व्यक्तिगत आस्था का विषय हो लेकिन तनावग्रस्त व्यक्ति के लिए इसकी अलग अहमियत है। अध्यात्म एक ओर जहां प्रेम, खुशी, शांति, संतोष जसे सकारात्मक गुणों को बल प्रदान करता है वहीं ईर्ष्या, क्लेश, क्रोध जैसे नकारात्मक पहलुओं को खत्म करता है। स्वस्थ तकनीकी योग, ध्यान आपके कॉफी, एल्कोहल की निर्भरता को कम कर देते हैं।

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