पुरुषों में बढ़ रहा है थायरॉइड का खतरा

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thyroid can effect men tooकई लोग ऐसा सोचते हैं कि थायरॉइड की समस्या सिर्फ महिलाओं को होती है लेकिन ऐसा नहीं है पुरुष भी इस बीमारी की चपेट में जाते हैं। हालाँकि पुरुषों में महिलाओं की तुलना में थायराइड होने की सम्भावना 8 गुना कम होती हैं फिर भी मध्यम आयु वर्ग वाले पुरुषों में इस बीमारी की आशंका अधिक रहती है। इससे पीड़ित लोगोँ का वजन अचानक बढ़ने लगता है और वे थकान और कमजोरी महसूस करते हैं। इसके अलावा कुछ ऐसे लक्षण भी हैं जो महिलाओं में नहीं होते हैं जैसे की मांसपेशियों में कमजोरी, इरेक्टाइल डिसफंक्शन और सेक्स की इच्छा में कमी होना।

अनुवांशिक हो सकती है समस्या

महिलाओं की ही तरह पुरुषों में भी यह समस्या आनुवांशिक हो सकती है। इसलिए अगर आपके परिवार में पहले से ही कोई थायराइड से पीड़ित है तो आपमें इसकी आशंका काफी बढ़ जाती है। अगर आपको थायराइड से जुड़ा कोई भी लक्षण दिखे तो आप बिना देरी किये इससे जुड़े सारे टेस्ट करवा लें। टीएसएच, फ्री टी4, फ्री टी 3 और थायराइड पेरोक्सीडेज एंटीबॉडीज ऐसे टेस्ट हैं जो थायराइड ग्रंथि में हुई गड़बड़ी का पता लगाते हैं।

तनाव ने बढाई परेशानी

आमतौर पर थायराइड अधिक उम्र वाले लोगों को ही होता है लेकिन पुरुषों में इसके कई अपवाद भी मिल जायेंगें। ख़राब जीवनशैली की वजह से आप किसी भी उम्र में इस बीमारी के शिकार हो सकते हैं। इसलिए यह ज़रूरी है की आप हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं और थायराइड ग्लैंड के कार्यप्रणाली के बारे में पूरी जानकारी रखें। अधिक स्ट्रेस के कारण भी एड्रेनल ग्लैंड ठीक से काम नहीं कर पाता है जिससे स्ट्रेस बढ़ाने वाला हार्मोन कॉर्टिसोल का उत्पादन बढ़ जाता है। इसका सीधा प्रभाव आपके थायराइड ग्लैंड पर पड़ता है।

स्वस्थ जीवनशैली है जरूरी

थायराइड ग्रंथि शरीर के मेटाबोलिक फंक्शन को भी नियंत्रित करती है जिस वजह से शरीर में थायराइड हार्मोन का बैलेंस बना रहता है। इसलिए थायराइड ग्लैंड को अगर स्वस्थ रखना चाहते हैं तो रोजाना एक्सरसाइज करना शुरू करें साथ ही डायट में अधिक से अधिक हेल्दी चीजों को शामिल करें। इन सबके अलावा डायट में आयोडीन की मात्रा का विशेष ध्यान रखें क्योंकि इसका थायराइड हार्मोन के बनने में महत्वपूर्ण रोल होता है। इसलिए यह जान लें की चाहे महिला हो या पुरुष थायरायड को सुचारू रूप से काम करने के लिए आयोडीन बहुत ज़रूरी है।

ऐसे करेँ कंट्रोल

थायरॉयड को रोका नहीं जा सकता है लेकिन इसके लक्षणों को जानकार प्रारंभिक उपचार में मदद जरूर मिल सकती है। शरीर में थायरॉयड हार्मोंस का लेवल कम होने का मतलब हाइपोथायरायडिज्म और ज्यादा होने का मतलब हाइपरथायरायडिज्म होता है। थायरॉयड के कारक यह हैं।

आयोडीन की कमी- रोजाना 150 माइक्रोग्राम आयोडीन की जरूरत होती है। आयोडीन का लेवल कम होने से हाइपोथायरायडिज्म और ज्यादा होने से हाइपरथायरायडिज्म का खतरा हो सकता है।

उम्र बढ़ना- उम्र बढ़ने के साथ इम्युनिटी सिस्टम भी कमजोर होने लगता है और बॉडी में कई हार्मोनल बदलाव होता है। इसलिए 35 साल का होने पर थायरॉयड प्रोफाइल टेस्ट जरूर कराएं।

फैमिली हिस्ट्री- अगर आपके परिवार में किसी को थायरॉयड की समस्या है, तो आपको भी इसका खतरा हो सकता है। इसलिए आपको साल में एक बार थायरॉयड टेस्ट जरूर करा लेना चाहिए।

दवाएं- इंटरफेन और कैंसर के इलाज के लिए की जाने वाली रेडिएशन थेरेपी आदि से भी थायरॉयड ग्लैंड पर असर पड़ता है। इसलिए थायरॉयड टेस्ट कराने की डॉक्टर की सलाह को अनदेखा ना करें।

ऑटोइम्यून डिजीज- इस तरह के रोगों में आपकी इम्यून सेल्स आपकी बॉडी सेल्स पर हमला करने लगती हैं जिससे आपको विभिन्न रोगों का खतरा होता है। अगर आप डायबिटीज जैसे ऑटोइम्यून रोग से पीड़ित हैं, तो हर साल टेस्ट जरूर कराएं।

तनाव- ज्यादा तनाव होने पर बॉडी में हार्मोनल का लेवल भी चेंज होता है जिस वजह से आपको थायरॉयड का खतरा हो सकता है। इससे निपटने के लिए एक्सरसाइज और योग करें।

 

 

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