ढूंढ लाना ख़ुशी….

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मैंने दिल से कहा…… ढूंढ लाना ख़ुशी…. !!
आपने बॉलीवुड का यह मशहूर गीत जरूर सुना होगा! अगर गीत को भूलकर कोई यूं ही इस लाइन को पढ़ेगा तो शायद उसे अजीब लगेगा। लेकिन हम आपको बता दें, यह ज़िंदगी का सबसे बड़ा सच है। खुशी कोई बाजार मे बिकने वाली या किसी खास जगह पर रखी हुई चीज नहीं है, जिसे हम और आप आसानी से उठाकर ला सकते हैं। यह हमारे भीतर है, जिसे ढूँढने की कला हमें खुद सीखनी होती है। एक्सपर्ट्स भी इस बात से 100% इत्तेफाक रखते हैं।

आज की आपाधापी भरी ज़िंदगी मे खुशी दुनिया भर के रिसरचर्स के लिए एक गंभीर विषय बन गई है। और कई रिसर्च इस बात की पुष्टि करते हैं कि आप कैसे खुश रह सकते हैं यह काफी हद तक आपके अपने हाथ मे होता है।

साइकलोजी की प्रोफेसर और हैपीनेस रिसर्चर सोंजा लिबोमिर्स्की लिखती हैं, आपकी खुशी का 50% हिस्सा आपके जीन पर निर्भर करता है। जीवन के वे मुद्दे जिनमे बदलाव लाना कठिन होता है, जैसे कि आपका लुक, आपकी सेहत और आपकी इनकम जैसी चीजें, इसमे सिर्फ 10% भूमिका निभाती हैं। बाकी 40% आपके हाथ मे होता है। खुश या दुखी महसूस करने के इस 40% हिस्से को आप खुद कंट्रोल कर सकते हैं।

रैजिंग हैपीनेस की लेखक क्रिस्टीन कार्टर कहती हैं, “खुश रहना एक कला है जिसे इंसान को सीखना पड़ता है और इसके लिए भी प्रैक्टिस की जरूरत होती है।” यह स्किल भी किसी विदेशी भाषा कि तरह होती है: किसी के लिए बेहद आसान होती है तो किसी के लिए थोड़ा मुश्किल, लेकिन इस पर लगातार काम करते रहने से हर किसी को बेहतर नतीजे मिलते हैं।
अन्य लोगों के साथ जुड़ें
कार्टर कहती हैं, ‘किसी भी व्यक्ति की प्रसन्नता का पूर्वानुमान उनके साथ जुड़े लोगों के आधार पर लगाया जा सकता है। जो लोग फैमिली, फ्रेंड्स, पड़ोसियों और अपने सहकर्मियों के साथ घुल-मिलकर रहते हैं वे ज्यादा खुश रहते हैं। तो अगर आप लोगों के साथ जुड़ाव नहीं रखते हैं तो अब कम से कम अपनी खुशी के लिए ऐसा करने का प्रयास करें।

• परिवार और दोस्तों के साथ ज्यादा समय बिताएँ।

• घर से बाहर निकलें और नए लोगों से मिलें।

–कोई क्लब ज्वाइन करें

–कोई हॉबी क्लास जॉइन करें

–अपनी इच्छा के अनुकूल किसी धार्मिक स्थल की तलाश करें, जहां आपको आपके इन्टरेस्ट वाले बहुत सारे लोग एक साथ मिल सकें।

कार्टर कहती हैं, सोशल मीडिया वेबसाइट पर समय बिताना इसका विकल्प नहीं है। फेसबुक यूज करने वाले 82 लोगों पर की गई एक स्टडी मे पाया गया कि जो जितना ज्यादा समय साइट पर बिता रहा था वह उतना ही ज्यादा दुखी था। वह कहती हैं सोशल मीडिया आपके वास्तविक सामाजिक दायरे को बढ़ाने के लिए होना चाहिए न कि इसके विकल्प के रूप मे होना चाहिए। अगर आप अन्य लोगों को देखकर यह महसूस कर रहे हैं कि वे आप से ज्यादा खुश हैं तो आप इन साइट्स पर कम से कम वक्त गुजारें।

अच्छी आदतें अपनाएं
शरीर को सेहतमंद बनाने वाली अच्छी आदतें भी आपको खुश रखने मे मदद करती हैं। जैसे कि अच्छी नींद और एक्सरसाइज। अगस्त 2013 मे हुई एक स्टडी मे पाया गया था कि जिन लोगों को रात मे अच्छी और लंबी नींद आती है वे अन्य लोगों के मुक़ाबले ज्यादा सेहतमंद रहते हैं। रिसर्च बताते हैं कि नियमित एक्सरसाइज भी आपकी खुशी बढ़ाता है।

अच्छा महसूस करने के लिए कोशिश करें
कार्टर कहती हैं, “अच्छा महसूस करने के लिए भी प्रैक्टिस की जरूरत होती है। लगातार कोशिश से आपको बेहतर रिजल्ट मिलता है। आपकी खुशी लगातार बढ़ती रहती है।”

• लिस्ट बनाएँ-एक डायरी लें और उसमे उन लोगों, कार्यक्रमों और कार्यों के बारे लिखें जिनसे मिलने और जिनका हिस्सा बनने से आपको सबसे ज्यादा खुशी मिलती है। इस लिस्ट मे नए लोगों और नई चीजों को भी नियमित रूप से शामिल करते रहें। साथ ही इस लिस्ट की समीक्षा भी करें।

• वैरायटी लाएँ-हमेशा कुछ खास लोगों या किन्हीं खास चीजों या आदतों के साथ चिपके रहने रहने के बजाय अपनी लाइफ मे नए लोगों और नई चीजों को जगह दें। इससे आपकी दिनचर्या मे वैरायटी आएगी। आप नए लोगों से मिलेंगे और व्यक्ति विशेष पर निर्भरता खत्म होने से आप फ्री और ज्यादा प्रसन्न महसूस करेंगे।

दूसरों का सहयोग करें
दुनिया भर मे की गई स्टडीज़ मे यह पाया गया है कि लोगों को दूसरों पर पैसे खर्चने और दान करने से खुशी मिलती है। यहाँ तक कि बच्चे भी दूसरों की सहायता करके खुश होते हैं। इसके लिए आपको ज्यादा पैसे या समय खर्चने की भी जरूरत नहीं होती है। किसी को छोटा सा गिफ्ट देकर भी आपको खुशी मिल सकती है।

• ग्रुप मे कहीं जा रहे हैं तो टोल टैक्स आप भर दें।

• दोस्तों के साथ मूवी देखने गए हैं तो सबके लिए पॉपकॉर्न अपनी तरफ से खरीद लें।

• अपने करीबी लोगों के जन्मदिन या खास ओकेजन पर और कुछ नहीं तो एक ग्रीटिंग कार्ड या अपने लॉंन से एक फूल तोड़कर ही गिफ्ट कर दें।

• कुछ भी नहीं कर सकते तो एक अच्छी सी स्माइल के साथ हाल-चाल ही पूछ लें।

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