जोड़ों का दर्द: अनदेखी नहीं, इलाज है जरूरी

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जिन लोगों को जोड़ों का आर्थराइटिस (Arthritis) होता है, तापमान में गिरावट के साथ उनका दर्द कई गुना बढ़ जाता है। आर्थराइटिस से पीड़ित जोड़ों (Arthritis joints) में जकड़न और तकलीफ का एहसास गर्मियों के मुकाबले बढ़ जाता है।हमारी हड्डियों के जोड़ों (Joints) की संरचना बेहद जटिल होती है। इसके कार्टिलेज (Cartilage) दोनों सिरों के बीच कुशन का काम करते हैं, लिगामेंट (Ligament) जोड़ों को एक दूसरे से बांध कर रखते हैं और मांसपेशियां (Muscles) इस पूरी संरचना को सहारा देती हैं। जोड़ों के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए, इसके हर हिस्से को जहां तक हो सके स्वस्थ (Healthy) रखना जरूरी होता है। चूंकि अब ठंड ने दस्तक दे दी है, ऐसे में अब आपके लिए जोड़ों के दर्द से खुद को बचाए रखने के लिए कमर कस लेनी चाहिए:

ये हैं समस्या की वजहें:  

-ठंड के दिनों में हमारे जोड़ों का ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है, क्योंकि हमारा शरीर गर्म ब्लड को हार्ट के आस-पास रखना चाहता है। ऐसे में जोड़ों में अकड़न और दर्द बढ़ जाता है।

-ठंड में दर्द बर्दाश्त करने की हमारी सीमा कम हो जाती है क्योंकि नर्व्स के सिरे इन दिनों ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं। यही वजह है कि जरा सा घाव लगने पर भी इन दिनों गंभीर चुभन का एहसास होता है। यही वजह है कि कई बार जोड़ों का दर्द भी इन दिनों गर्मियों की तुलना में ज्यादा गंभीर महसूस होता है।

-अधिकतर बुजुर्ग ठंड में घर के अंदर रहना चाहते हैं, ऐसे में उनकी शारीरिक सक्रियता कम हो जाती है। ऐसे में जोड़ों की अकड़न बढ़ जाती है।

इन्हीं कारणों से ठंड में जोड़ों के आर्थराइटिस और सूजन की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में आपको कुछ ऐसे उपाय करने की जरूरत होती है जिससे आपके जोड़ ढीले रहें, मांसपेशियां मजबूत हों और ब्लड सर्कुलेशन बढ़े ताकि आपके जोड़ों में आवश्यक नमी बनी रहे।

अपनाएं ये टिप्स:

एक्सरसाइज (exercise): इससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और गर्म खून शरीर के हर हिस्से तक पहुंचता है जिनमें शरीर के जोड़ भी शामिल हैं। हेल्दी ब्लड सर्कुलेशन आपके जोड़ों को लचीला और गर्म रखेगा ताकि आपको दर्द महसूस न हो। ठंड के दिनों में हमारे शरीर को जितना ज्यादा सक्रिय रहने की जरूरत होती है, उतना ही हम सिडेंटरी जीवन जीने लग जाते हैं। ठंड में अक्सर हम नियमित के जॉगिंग और मॉर्निंग, इवनिंग वॉक से दूर हो जाते हैं, जिसका हमारे जोड़ों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। मांसपेशियां जोड़ों को सहारा और मजबूती देती हैं। इन्हें मजबूत रखकर हम अपने जोड़ों को लंबे समय से आर्थराइटिस से मुक्त रख सकते हैं। तेज कदमों से चलें, साइकल चलाएं। ऐसा हर रोज कम से कम 30 मिनट करें।

डाइट (Diet): कोई भी मौसम हो, संतुलित आहार की जरूरत हमेशा होती है। एक संतुलित आहार लें, जिसमें फल, सब्जियां, दालें, अनाज और डेयरी उत्पाद शामिल हों। यह आपके पूरे शरीर, जोड़ों व मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी है।

विटामिन्स (Vitamins) हैं जरूरी: घुटनों के दर्द से परेशान मरीजों को विटामिंस की जरूरत होती है,  जैसे कि विटामिन डी, सी और के ताकि आपकी हड्डियों और कार्टिलेज को संपूर्ण पोषण मिलता रहे। विटामिन सी कमी के चलते जोड़ों में दर्द और इन्फ्लेमेशन हो सकता है।

तो ठंड के दिनों में, सभी मौसमी फल व सब्जियां अपने खाने में शामिल करें, जैसे कि संतरे, पत्ता गोभी, गाजर, पालक, टमाटम आदि ताकि आपको पर्याप्त मात्रा में विटामिन और खनिज मिलता रहे। विटामिन डी का पर्याप्त  उत्पादन आपके शरीर में होता रहे, इसके लिए धूप में रोज 15-20 मिनट गुजारें।

पानी (Water): अक्सर हम जोड़ों की सेहत के मामले में पानी के महत्व को नजरअंदाज करते हैं। जोड़ों के बीच के कार्टिलेज, जो कि हड्डियों के सिरों को घिसने से बचाते हैं। कार्टिलेज सेमी सॉफ्ट टिश्यू होते हैं जिन्हें हड्डियों को सुरक्षित रखने के कार्य को सही ढंग से करने के लिए मुलायम रखना जरूरी होता है। और इसकी सतह को मुलायम रखने के लिए इसमें पर्याप्त नमी की जरूरत होती है। ऐसे में आपको जोड़ों का दर्द दूर रखने के लिए भी शरीर में नमी बरकरार रखना चाहिए।ठंड के दिनों में, पानी पीना कम न करें।

नी सपोर्ट (Knee support): नी सपोर्ट, यानी घुटनों को सहयोग देने के लिए पहनी जाने वाली चीजें कमजोर जोड़ों को सहयोग करती हैं। किसी अच्छे अस्थिरोग विशेषज्ञ से मिलकर अपने लिए अच्छे नी सपोर्टिंग ब्रेस के बारे में जानकारी लें जिसे घुटनों के सहयोग और जोड़ों की स्थिरता के लिए पहना जा सकता है। गंभीर दर्द की स्थिति में ब्रेस राहत दिला सकते हैं।

फिजियोथेरेपी (Physiotherapy):ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीजों को आमतौर पर फिजियोथेरेपी की सलाह दी जाती है, इससे मांसपेशियों और पैरों की नसों को मजबूत एवं जोड़ों को लचीला बनाए रखने में मदद मिलती है। ठंड में, जब जोड़ों में अकड़न बढ़ जाती है, ऐसे में फिजियोथेरेपी और गर्माहट दर्द से राहत और गतिशीलता बढ़ाने में मदददगार हो सकती है।

कराएं जोड़ों की जांचः कभी भी अपने आर्थराइटिस वाले जोड़ों को इनके हाल पर न छोड़ें। किसी अच्छे अस्थिरोग विशेषज्ञ से मिलें ताकि वे एक्सरे आदि के माध्यम से हड़िडयों को हुए नुकसान की सीमा के बारे में जान सकें। अगर जरूरी हो तो, जोड़ प्रत्यारोपण सर्जरी भी करा सकते हैं।

 

Prof. C. S. Yadav

Orthopedic consultant 

AIIMS, New Delhi

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