जानें टॉप-10 मैनली मिथ्स के बारे मे

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men's healthइसमे कोई शक नहीं कि महिलाएं व पुरुष न सिर्फ शारीरिक रूप से बल्कि भावनात्मक रूप से भी एक दूसरे से अलग हैं। लेकिन पुरुषों (Men) के बारे मे वहुत सारी ऐसी बातें भी हैं जो पूरी तरह से मिथक (Myths) हैं। जैसे कि, मर्द को दर्द नहीं होता, लड़कों को लड़कियों की तरह रोना नहीं चाहिए, बच्चों और परिवार की देखभाल महिलाएं ही बेहतर ढंग से कर सकती हैं… आदि, आदि…….. दरअसल ऐसे मिथकों (Myths) की कोई सीमा नहीं है। हम यहाँ आपको बता रहे हैं ऐसे ही टॉप-10 मैनली हेल्थ मिथ्स (Health myths) के बारे मे:

1- हैट पहनने या ब्लो-ड्रायर के इस्तेमाल से बढ़ता है गंजापन
अब तक ऐसी कोई रिसर्च नहीं हुई है जिससे इस बात कि सत्यता साबित हो सके। दरअसल पुरुषों के बाल बचपन से ही नियमित रूप से कटते रहते हैं, धीरे-धीरे उनके हेयर फोलिकल (hair follicle) छोटे होते जाते हैं, ऐसे मे बालों की बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, फिर बाल कमजोर होने लगते हैं और गिरने लगते हैं।

2- छोटे अंडरवियर पहनने से कम हो जाते हैं स्पर्म
लगातार बेहद गर्मी के संपर्क मे रहने से स्पर्म काउंट (sperm count) पर असर पड़ सकता है लेकिन छोटे अंडर गारमेंट से स्पर्म कि संख्या पर कोई असर नहीं होता है।

3- जितनी बार शेविंग होगी उतनी घनी होगी दाढ़ी
हमारे हेयर फोलिकल का साइज और शेप बालों का टेक्सचर और उनका घनापन तय करता है। आपके बाल घने होंगे या हल्के यह इसी बात पर निर्भर है। लेकिन शेविंग करने से इस पर कोई असर नहीं पड़ता है।

4- 18 की उम्र मे पीक पर होती है पुरुषों की यौन इच्छा
इस उम्र मे पुरुषों के शरीर मे टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की सप्लाई सबसे ज्यादा होती है, लेकिन हार्मोन का उत्पादन पीक पर होने का यह मतलब नहीं है कि व्यक्ति कि सेक्सुअल परफ़ोर्मेंस (sexual performance) भी पीक पर हो।

5- बिना दर्द के कुछ हासिल नहीं होता
यह कहावत आप है, ‘नो पेन, नो गेन’, लेकिन यह बात हर जगह लागू नहीं होती है। खासतौर से आपके वर्कआउट के मामले मे। उलटे वर्कआउट के दौरान दर्द महसूस करने के लिए बेहिसाब एक्सरसाइज आपके लिए चोट लागने की वजह बन सकती है।

6- पुरुषों को नहीं होता ब्रेस्ट कैंसर
पुरुषों को भी ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है। हालांकि इस तरह के मामले रेयर होते हैं। औसतन 1000 मे से एक पुरुष मे इसका खतरा रहता है। बढ़ती उम्र, ब्रेस्ट कैंसर का पारिवारिक इतिहास, जिसमे आनुवांशिक रूप से व्यक्ति के शरीर मे एस्ट्रोजन की अधिकता रहती है, लिवर संबंधी पुरानी बीमारी, अल्कोहल का इस्तेमाल और मोटापा इसके खतरे को बढ़ाने वाले कारक हैं।

7- पुरुषों को नहीं होता ओस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis)
ओस्टियोपोरोसिस ऐसी बीमारी है जिसमे हड्डियों का ढांचा कमजोर हो जाता है और इनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है। पुरुषों मे यह समस्या आम नहीं है क्योंकि उनका शारीरिक ढांचा ज्यादा बड़ा और मजबूत होता है, उन्हें मीनोपोज़ (menopause) नहीं होता, जिसके चलते महिलाओं मे तेजी से हार्मोनल बदलाव आते हैं और हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं। इस सबके बावजूद कुछ पुरुषों मे ओस्टियोपोरोसिस होने का खतरा रहता है। बढ़ती उम्र, टेस्टेस्टेरोन हार्मोन के स्तर मे गिरावट, अल्कोहल ज्यादा लेना, स्मोकिंग, पेट संबंधी बीमारियाँ, स्टेरोइड वाली दवाओं का इस्तेमाल और शारीरिक सक्रियता की कमी आदि वजहें पुरुषों मे इसका खतरा बढ़ाती हैं।

8- बीयर से बनती है सेहत
अक्सर दुबले-पतले लड़कों को कुछ लोग यह सलाह सेते नजर आ जाते हैं कि बीयर पियो सेहत बन जाएगी। लेकिन आपको बता दें, इससे आपकी सेहत बनेगी नहीं बल्कि और बिगड़ जाएगी। क्योंकि यह आपके लिए पेट का मोटापा बढ़ाने की वजह बन सकता है। दरअसल किसी भी अल्कोहलिक ड्रिंक से आपका कैलोरी इनटेक बढ़ जाता है, ऐसे मे मोटापा बढ़ना लाजिमी होता है।

9- पुरुष नहीं होते हैं इमोशनल
इस बात मे कोई सच्चाई नहीं है। दरअसल इमोशन से पुरुष और महिला का कोई रिलेशन नहीं होता है। यह दोनों मे कम हो सकता है अथवा दोनों मे ज्यादा हो सकता है, लेकिन पुरुषों मे अपना इमोशन छिपाकर रखने की चाह अधिक होती है।

10- परिवार का जिम्मा महिलाएं ही बेहतर निभा सकती हैं
यह पूरी तरह सच नहीं है। ज़िम्मेदारी घर की हो या बाहर की, कोई भी पुरुष या महिला उसे कितना बेहतर ढंग से निभा सकता है यह काफी हद तक उसकी अपब्रिंगिंग पर निर्भर करता है। जो जिम्मेदार होगा वह घर या बाहर हर जगह जिम्मेदार व्यवहार ही करेगा। जहां तक बच्चों और परिवार के देखभाल का सवाल है तो अधिकतर भारतीय घरों मे लड़कों की परवरिश इस तरह से की जाती है कि उनके दिमाग मे यह बात बैठ जाती है कि वे सिर्फ बाहर की जिम्मेदारियाँ संभालने के लिए बने हैं। हालांकि अब यह ट्रेंड तेजी से बादल रहा है। खासतौर से बड़े शहरों मे।

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