बीमार नहीं, स्पेशल हैं हम…

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cerebral-palsy
समझें सेरिबरल पेल्सी और इसके साथ जी रहे लोगों को
8 साल की आमना का पढ़ने मे मन नहीं लगता है, लेकिन वह पेंटिंग बहुत अच्छी बनाती है। वह और बच्चों की तरह तेज दौड़ नहीं सकती लेकिन पजल्स सुलझाने मे अच्छे-अच्छों को पीछे छोड़ देती है। उसे नए-नए कपड़े पहनना, नए खिलौनों से अच्छा लगता है। मगर उसे एक बात बिलकुल समझ नहीं आती है कि सोसाइटी के बच्चे उसे अपने साथ खेलने क्यूँ नहीं देते और स्कूल मे उसके साथ कोई बेंच शेयर क्यूँ नहीं करता है? उसके ये मासूम सवाल उसकी माँ को परेशान कर देते हैं, लेकिन वह न ही इन सवालों का जवाब दे पाती हैं और न ही कोई समाधान ढूंढ पाती हैं। दरअसल आमना को सेरिब्रल पेल्सी है:

क्या है सेरिब्रल पेल्सी
सेरिब्रल पेल्सी न्युरोलॉजिकल बीमारियों का एक समूह है। यह दिमाग में लगी किसी अप्रगतिशील चोट की वजह से हो सकता है अथवा दिमागी विकास की उम्र में बच्चे में आई किसी विकृति का नतीजा हो सकता है। इसका असर नवजात उम्र अथवा बचपन में ही दिखाई देने लगता है और शरीर की क्रियाओं और मांसपेशियों के संयोजन पर स्थायी रूप से प्रभाव डालता है। ऐसा उस हालत में हो सकता है जब या तो दिमाग असामान्य रूप से विकसित हुआ हो अथवा जन्म से पहले या जन्म के समय अथवा उसके तुरंत बाद बच्चे को चोट लगी हो। सेरिब्रल शब्द ब्रेन यानी दिमाग का सूचक है, पेल्सी शब्द दिमाग के मोटर फंक्शन को हुए नुकसान अथवा विकृति का सूचक है।

सेरिब्रल पेल्सी की वजह
सेरिब्रल पेल्सी के अधिकतर मामलों में सही वजह का पता नहीं लग पाता, लेकिन इसके आम संभावित कारणों में दिमागी विकास के लिए जिम्मेदार जीन में होने वाले बदलाव, समय से पहले बच्चे का जन्म, जन्म के समय वजन बहुत कम होना, बच्चे के दिमाग में गंभीर ब्लीडिंग, गर्भावस्था में मां को होने वाला कोई इन्फेक्शन, डिलीवरी के समय कठिनाई (हालांकि जन्म के समय होने वाली कोम्प्लिकेशन सीपी के सिर्फ 10% मामलों में जिम्मेदार होती हैं)। अगर बच्चा समय से पहले जन्म लेता है तो वह संक्रमण और चोट को लेकर काफी संवेदनशील होता है। ऐसे में उसे ब्लड प्रेशर की असामान्यता, इन्फेक्शन, सांस लेने में तकलीफ जैसी दिक्कतें आने की आशंका ज्यादा रहती है और ये सारी चीजें दिमागी टिश्यू पर पड़ता है और ऐसे में दिमाग के भीतर ब्लीडिंग होने का खतरा भी रहता है।
एक साथ एक से अधिक बच्चों का जन्म जैसे कि जुड़वां या तिड़वा बच्चे होने पर सीपी का खतरा बढ़ जाता है। नवजात बच्चों को पीलिया होना आम बात है, लेकिन अगर यह गंभीर हालत में पहुंच जाए और सही इलाज न हो तो सीपी की वजह बन सकता है। बचपन में बार-बार दौरा पड़ना भी सीपी की वजह बन सकता है।

सीपी के लक्षण
जिन बच्चों को सीपी की समस्या होती है आमतौर उनका विकास धीमी गति से होता है और उनकी मसल टोन असामान्य दिखती हैं। ऐसे बच्चे जरूरी माइलस्टोन तक पहुंचने में भी ज्यादा वक्त लगाते हैं जैसे कि बिना किसी सपोर्ट के बैठने और चलने आदि में। इस बीमारी से पीड़ित अधिकतर बच्चों का मसल टोन असामान्य होता है, कुछ बच्चों में मसल टोन की कमी होती है जिसके चलते उन्हें उठाने पर लुंज-पुंज से लगते हैं और कुछ बच्चों में मसल टोन बढ़ जाती है, जिससे वे अकड़े से रहते हैं और उन्हें उठाने पर उनके पैर क्रॉस होते हैं (ऐसा लगता है जैसे उन्हें दौरा पड़ा हो)। अकड़न के चलते बच्चे को बैठने, खड़े होने और चलने में कठिनाई होती है। सीपी से पीड़ित तकरीबन 50% बच्चों को दौरे पड़ते हैं और उन्हें सीखने में दिक्कत होती है। ऐसे बच्चों को बार-बार इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है। जिन बच्चों में सीपी का मामूली असर होता है उनमें अन्य समस्याएं भी कम होती हैं और जिनमें इसका अधिक असर होता है उनमें अन्य मेडिकल समस्याएं भी गंभीर होती हैं।

4 तरह की होती है सेरिब्रल पेल्सी
सेरिब्रल पेल्सी को चार प्रमुख समूहों में बांटा जा सकता है, पहला ग्रुप होता है स्पैस्टिक डिप्लेजिया, जो कि सीपी का सबसे आम प्रकार है। यह आमतौर पर समय से पहले जन्म लेने वाले सीपी से पीड़ित बच्चों में देखा जाता है। इसमें बच्चों के पैरों की मांसपेशियों की टोनिंग बढ़ जाती है और बच्चे को चलने में तकलीफ होती है। ऐसे बच्चों की बुद्धि आमतौर पर सामान्य होती है। हेमिप्लेजिक सीपी, स्पैस्टिक क्वैड्रिप्लेजिया और एक्स्ट्रा पिरामिडल सीपी इस बीमारी के अन्य प्रकार हैं। स्पैस्टिक क्वैड्रिप्लेजिया सीपी का सबसे गंभीर प्रकार है क्योंकि इसमें बच्चे के हाथ-पैर दोनों प्रभावित होते हैं।

सीपी की जांच
सीपी की जांच के लिए स्कैन और एमआरआई दोनों की जरूरत होती है। सिर में किसी तरह की असामान्यता का पता लगाने के लिए ब्रेन का एमआरआई और सीटी स्कैन करते हैं। जिन बच्चों को दौरे पड़ते हैं उनका ईईजी और कुछ ब्लड टेस्ट किया जाता है। डॉक्टर आपसे बच्चे की मेडिकल हिस्ट्री और उसकी ग्रोथ के बारे में जानकारी लेंगे। वे बच्चे की छाया, पोश्चर, उसकी मूवमेंट और मसल टोन की स्टडी भी करेंगे।

इलाज नहीं पर सुधार संभव
सीपी का इलाज संभव नहीं है लेकिन शुरूआत में उचित इलाज हो तो बच्चे की हालत में सुधार जरूर हो सकता है। अगर उपयुक्त फिजियोथेरेपी और ऑक्युपेशनल थेरेपी दी जाए तो बच्चे की मांसपेशियां मजबूत हो सकती है और इनके कोऑर्डिनेशन में भी सुधार हो सकता है। स्पीच थेरेपी से बच्चे की बोलने की क्षमता सुधर सकती है। आजकल बाजार में कई ऐसी दवाएं भी उपलब्ध हो गई हैं जिनसे मांसपेशियों की अकड़न कम की जा सकती है। कई बार बच्चे का चलना-फिरना आसान बनानेके लिए डिवाइस या ऑर्थोपेडिक सर्जरी की भी जरूरत हो सकती है। कुछ एक्सपर्ट सीपी में स्टेम सेल थेरपी भी करते हैं, लेकिन फिलहाल इस दिशा में काफी कम रिसर्च हुई है और अब तक इस पर कोई क्लीनिकल ट्रायल नहीं किया गया है। अगर आपको अपने बच्चे के विकास में कोई कमी या समस्या दिखाई दे तो आपको तुरंत अपने बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

By Dr. Piyush K Chandel,
Consultant Neonatologist,
Jaypee Hospital, Noida

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