महिलाएं जो महिलाओं के लिए आगे आई

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womens day

हैप्पी विमंस डे

महिलाओं के बिना जीवन की कल्पना करना भी असम्भव है, पर इसके बावजूद महिलाओं को अपने अधिकारों और वर्चस्व के लिए समय-समय पर संघर्ष करना ही पड़ता है। इसी संघर्ष के कारण इतिहास से लेकर वर्तमान में कई ऐसी महिलाए सामने आई जिन्होंने अपनी पहचान बनाई। ये महिलाएं दूसरी महिलाओँ की प्रेरणास्त्रोत तो बनी ही साथ ही इन्होनें महिलाओं के लिए काम भी किया। आइए आधुनिक दौर की ऐसी ही कुछ महिलाओं से आपकी मुलाकात कराते हैं।

अदिति गुप्ता, इन्होने एक ऐसे विषय पर बात करने और जागरुगता लाने का फैसला लिया जिसके बारे मे बात करना हमारे समाज मे वर्षों से टैबू माना जाता था। महिलाओं के मासिक धर्म की सही और सटीक जानकारी किशोरियों तक पहुचाने के लिए अदिति ने मेन्सट्रुपिडिया डॉट कॉम की शुरूआत की। दरअसल इस वेबसाइट को शुरू करने से पहले अदिति ने एक कॉमिक बुक लिखी जिसमे उन्होने कहानी और चित्रों के जरिए छोटी बच्चियों को मासिक चक्र कि जानकारी दीं। जिसकी सफलता के बाद उन्होनें 2011 में बेवसाइट शुरू की और आज देश-विदेश के कई स्वयं सेवक संस्थान और स्कूल मेन्सट्रुपिडिया का इस्तेमाल करते हैं।

अपने बचपन के दिनों मे जब मंदिर और किचिन के अंदर न जाने को कहा जाता और इसके अलावा अदिति भी अपने शरीर मे हो रहे बदलावों को नही समझ पा रही थी। इससे ही अदिति को लगा देश के ग्रामीण इलाकों की छोटी लड़कियों को किस तरह की परेशानी उठानी पड़ती है। क्योंकि अदिति खुद भी झारखण्ड के एक छोटे कस्बे से हैं। तो उन्हें इस पहल की प्रेरणा मिली।

नईय्या साग्गी, इन्होनें बेबी चक्र नाम से 2014 मे एक बेवसाइट की शुरूआत की। जो कि कुछ सालों मे ही लाखों लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाने लगी है। दरअसल इस वेबसाइट पर पेरेंटिग से जुड़ी तमाम जानकारियां उपलब्ध है, और सिर्फ जानकारी ही नही बल्कि इस वेबसाइट से नजदीक मौजूद पेरेंटिग सुविधाओं का भी पता लगाया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर आपके घर के पास मेटरनिटी अस्पताल या फिर पीडियाट्रीशियन यानी बच्चों का डॉक्टर। तो इस तरह नए पेरेंट्स के लिए यह वेबसाइट एक ही जगह पर हर जानकारी मुहैया कराती है।

नईय्या साग्गी ने 2012 मे हार्वड बिजनेस स्कूल से एमबीए किया। जिसके बाद चार साल इन्होनें बोस्टन मे काम मे काम किया। इसी दौरान जब इनके कई दोस्त पेरेंट बने और उन्हें होने वाली रोज की स्वास्थ समस्याओं से जुझते देखा तब उन्हें बेबी चक्र शुरू करने का सोचा।

रिचा कार, रिचा ने देश मे महिलाओं की बुनियादी जरूरतों मे से एक उनके lingerie अंतवस्त्रों को खरीदने और बेचने के तरीके के साथ-साथ सोच को ही बदल दिया। देश मे अमूमन जहां महिलाए सिर्फ जरूरत के तौर पर इनका इस्तेमाल किया करती थी। कई बार देखा गया कि गलत साईज या डिजाइन की ब्रा के कारण महिलाओं को स्वास्थ समस्याओं का सामना करना पड़ता है। Zivame जिवामे के आने के बाद अब महिलाएं अपने स्वास्थ के अनुरुप ब्रा घर बैठे खरीद सकती हैं। रिचा कार ने जिवामे को 2011 मे शुरू किया और यह भी एक ecommerce इकॉमर्स वेबसाइट है। जहां से आज लगभग पांच मिलियन महिलाएं खरीदारी करती हैं।

रिचा का जन्म जमशेदपुर मे हुआ, उन्होनें बिटस पिलानी से इंजिनियरिंग की और 2005 मे NIMIMS  से एमबीए की डिग्री ली।

दीपा रेड्डी, एक उम्र के बाद महिलाएं अपना ख्याल रखना, सुंदर दिखना या सुंदर कपड़े पहनने की चाह खो देती हैं। पर यदि कोई महिला सुंदर कपड़े पहनना भी चाहे तो बाजार मे उनके लिए ज्यादा विकल्प भी नही मौजूद होते। इसी नब्ज को पकड़ते हुए दिपा रेड्डी ने ऑपन ट्रंक नाम का स्टार्ट अप शुरू किया और इनके इस स्टार्ट अप की विशेषता है कि ये केवल 50 वर्ष से अधिक की महिलाओं के लिए कपड़े डिजाइन करते हैं। ऑपन ट्रंक 80 साल तक की महिलाओं के कपड़े भी बनाते है। बात सिर्फ यही खत्म नही होती ऑपन ट्रंक मे इंडियन के साथ-साथ वेस्टर्न और इंडो वेस्टर्न स्टाइल के विकल्प भी मौजूद हैं। इसके अलावा ऑपन ट्रंक मे मार्केटिंग कैंपेन के लिए खास फिगर वाली मॉडलस की जगह असली ग्राहक को रखते हैं। जो इन उम्रदराज महिलाओं को कॉफिडेंस देता है। आपको बता दें कि यह भी एक ecommerce इकॉमर्स साइट ही है।

शैरी चहल, इन्होनें sheroesशीरोस  की शुरूआत की। दरअसल शीरोस एक ऐसा प्लेटफॉर्म है,  जहां केवल महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर मौजूद हैं। इस प्लेटफॉर्म के जरिए बिजनेस को फिमेल एम्पलॉय, पार्टनर, ग्राहक और बिजनेस मालिक ढ़ुढने मे मदद मिलती है। जो कि अपनी तरह का देश मे पहला ऐसा प्लेटफॉर्म है, जो महिलाओं की कॉर्पोरेट मे अपनी हिस्सेदारी के लिए काम करता है।

शैरी ने अपना करियर एक पत्रकार के रूप मे शुरू किया था। इससे पहले उन्होनें जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से इंटरेशनल रिलेशन्स मे एम फिल किया और आई एम टी गाजियाबाद से बिजनेस मेंनेजमेंट।   

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