संतान सुख के लिए खतरा है नाइट शिफ्ट

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आज के समय में महिलाओं ने सभी क्षेत्र में अपना परचम लहराया है, चाहे वो राजनीति हो या फिर प्रशासनिक सेवा। किसी मल्टीनेशनल कम्पनी के सीईओ का पदभार हो अथवा 24/7 चलने वाले कॉल सेंटर की जॉब, सभी क्षेत्रों में महिलाओं ने खुद को पुरुषों के मुकाबले बराबर साबित किया है। लेकिन ये तरक्की उनकी संतान सुख पर बुरा असर डाल सकती है। यानी की अनियमित कार्यशैली का प्रभाव उनकी मातृत्व क्षमता को झेलना पड़ता है।
शोध के जरिए चला पता
यह दावा किया गया है भारी वजन उठाने या नाईट शिफ्ट में काम करने से महिलाओं के प्रजनन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। हॉवर्ड मेडिकल स्कूल के शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसी महिलाएं जिनका काम का समय आए दिन बदलता रहता है। कभी सुबह के समय तो कभी रात के समय दफ्तर का काम निपटाना पड़ता है। इससे उनके सोने व जागने का समय परिवर्तित होता रहता है। ऐसे में इस तरह के समस्याओं से जूझ रही महिलाओं के हॉर्मोन्स भी ऊपर नीचे होते रहते है। ये समस्या केवल दफ्तर कामकाजी महिलाओं को ही नहीं बल्कि शारीरिक श्रम करने वाली महिलाओं को भी होती है।

ऐसे किया गया अध्ययन
शोध के दौरान शोधकर्ताओं ने उन महिलाओं पर शोध किया जो कही न कही बांझपन से जूझ रही थी और इलाज करा रही थी। औसतन 35 साल के उम्र तक की 500 महिलाओं पर यह शोध किया गया है। जिसके दौरान ये हैरान करने वाला नतीजा सामने आया है।

क्या कहना है शोधकर्ताओं का
शोधकर्ताओं का कहना है कि महिलाओं की जीवनशैली से जुड़े कुछ ऐसे कारण है। जिससे ये समस्या उत्तपन हो रही है। पर्याप्त मात्रा में सूरज की रौशनी न मिलने से और जरूरत से ज्यादा शारीरिक श्रम करने से हॉर्मोन्स की सक्रियता पर असर पड़ता है। इसके साथ ही शोधकर्ताओं ने देखा की काम के दौरान भारी या वजनी काम करने वाली महिलाओं में अंडाणु का निर्माण 15 फीसदी तक कम हो रहा था। इससे उनके गर्भधान में दिक्कत आ रही थी।

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