कुकिंग की ये 7 आदतें कर सकती हैं बीमार

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Cooking habit
हर महिला यह चाहती है कि वो प्लेट मे सिर्फ खाना नहीं प्यार और हेल्थ भी परोसे, ताकि उसका परिवार हमेशा हेल्दी रहे। मगर कई बार कुकिंग दे दौरान अनजाने मे ही कुछ ऐसी गलतियाँ हो जाती हैं जो खाने वाले की सेहत पर भारी पड़ सकती हैं। हम आपको दे रहे हैं ऐसी ही 7 गलतियों की जानकारी, जिनका ध्यान रखकर अपने किचन को बीमारियों से मुक्त रख सकती हैं:

धुआँ निकलने तक तेल को गर्म करना- अधिकतर इंडियन रेसिपी की शुरुआत कढ़ाई मे तेल गर्म करने से होती है। आप आंच पर बर्तन चढ़ा देते हैं, गर्म होने तक कोई दूसरा काम करते हैं, फिर इसमे तेल डालते हैं और तब तक रेसिपी की अन्य तैयारियां करते हैं जब तक कि कढ़ाई के तेल से धुआँ न निकलने लगे। यह रेसिपी के अगले चरण की शुरुआत की पहचान है। यह आपके लिए स्मार्ट कुकिंग का तरीका हो सकता है, मगर आपकी सेहत के लिए यह बिलकुल ठीक नहीं है। ना सिर्फ बहुत सारे कुकिंग ऑयल का स्वाद धुआँ निकलने तक गर्म करने से खराब हो जाता है, बल्कि ऐसा करने से इसके फायदेमंद एंटी-ऑक्सीडेंट नष्ट हो जाते हैं और इसमे नुकसानदायक तत्व उत्पन्न हो जाते हैं। इसलिए तेल को गुनगुना होने तक ही गर्म करें।

बर्तन को जरूरत से ज्यादा भरना- कभी-कभी कुकिंग मे थोड़े धैर्य की जरूरत होती है। पूरा बर्तन भरकर खाना पकाना कई बार जल्दबाजी का तरीका हो सकता है, मगर कभी-कभी यह पकने मे देरी और खाने की सूरत खराब होने वजह भी बन सकता है। अगर आप सब्जियाँ सौते कर रहे हैं तो पैन को पूरा भर देने से सब्जियों मे क्रंची टेस्ट नहीं रहेगा, ये भाप मे पकी हुई लगेंगी। ऐसे मे कई बैच मे पकाएँ।

ग्रिल से निकालकर तुरंत नॉनवेज खाना – आपको तेज भूख लगी है और आप उस स्टिक को तुरंत मुंह तक ले जाने को बेताब हैं जिसे अभी-अभी ग्रिल से बाहर निकाला है! थोड़ा रुकिए! नॉनवेज कू काटने से पहले थोड़ा आराम करने दीजिए। ऐसा करने से इसका जूस पूरे पीस मे बराबर मात्रा मे फैल जाएगा और आपको जूसी टेस्ट मिलेगा। दरअसल ग्रिल से निकालकर तुरंत काटने से मीट का जूस कटिंग बोर्ड पर फ़ेल जाता है। ऐसे मे मीट के टुकड़ों को ग्रिल से निकालने के 5-10 मिनट बाद ही काटें।

मीट से फैल सकते हैं सिंक मे बैक्टीरिया- पकाने से पहले मीट को सिंक मे धोने से इसकी चिकनाई यहाँ छूट जाती है, जिसे अछि तरह से साफ नहीं किया गया तो ऐसे बैक्टीरिया के पनपने की वजह बन सकती है, जो फूड संबंधी बीमारियों का कारण होते हैं। इससे बचने के लिए मीट को धोने से पहले इसे पेपर टॉवल मे रखकर अच्छे से साफ करें, इससे बैक्टीरिया के लिए जिम्मेदार तत्व निकल जाएंगे।

तेज आंच पर नॉनस्टिक पैन का इस्तेमाल- जब भी नॉनस्टिक पैन का इस्तेमाल करें, आंच कम रखें। तेज आंच पर नॉनस्टिक बर्तन की लाइनिंग से धुएँ के रूप मे पीएफसी यानी पर्फ़्लूरोकार्बन निकलता है। पीएफसी का संबंध लीवर डैमेज और डिवेलपमेंटल समस्याओं से होता है। जब भी नॉनस्टिक पैन खरीदें तो उसके यूजर मैनुअल पढ़कर यह पता जरूर कर लें कि निर्माता कंपनी ने इसके लिए कितने टेम्परेचर की सलाह दी है।

नॉनस्टिक पैन मे मेटल के बर्तनों का इस्तेमाल- नॉनस्टिक पैन मे मेटल की कड़छी यस चम्मच का इस्तेमाल करना ठीक नहीं होता। इससे आप अनजाने मे ही पैन के ऊपरी हिस्से को खुरच देते हैं और पीएफसी खाने के साथ पेट मे चला जाता है। ऐसे मे जब भी नॉनस्टिक पैन का इस्तेमाल करें, उसमे लकड़ी अथवा हीट-सेफ रबर के कड़छी, चम्मच का इस्तेमाल करें।

जरूरत से ज्यादा घोलना- अक्सर यह कहा जाता है कि जब आप कुछ बेक करने, पकौड़े बनाने की तैयारी कर रहे हैं तो मैदा, आटा या बेसन जितनी देर तक घोलेंगे, डिश उतनी ही बेहतरीन बनेगी। मगर हेल्थ एक्सपर्ट ने इस धारणा को अनहेल्दी साबित कर दिया है। उनके अनुसार बहुत देर तक मिक्सिंग से आटे मे ग्लूटेन बनता है, जोकि आपके पाचन तंत्र के लिए ठीक नहीं। ऐसे मे डिश बनाने से आधा घंटा पहले बैटर मिक्स करके छोड़ दें, इस अंतराल मे बैटर अपने आप फूल जाएगा और इसमे ग्लूटेन भी नहीं बनेगा।

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