बोन हेल्दी लाइफस्टाइल से रखें दर्द को दूर

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बुजुर्गों में हाथ हल्का सा मुड़ जाने अथवा सामान्य रूप से गिर पड़ने पर भी फ्रैक्चर हो जाने के मामले आमतौर पर देखे जाते हैं। कई बार तो हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि पर्दे जैसी कोई चीज खींचने के लिए भी लोग शरीर पर खिंचाव डालते हैं तब भी फ्रैक्चर हो जाता है।

आगे की ओर बढ़ना है शरीर की नेचर
इंसान का शरीर, इसके डिजाइन के चलते आगे की तरफ ही बढ़ता है। पहले बचपन और जवानी में शरीर विकास करता है और मजबूत होता है, फिर उम्र बढ़ने पर यह कमजोर और क्षीण होने लगता है। जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है उसी तरह से हमारी हड्डियां भी बुढ़ापे की ओर बढ़ती हैं। हालांकि उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तो रोका नहीं जा सकता है। लेकिन जीवन के शुरूआती दिनों से ही एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हड्डियों को गंभीर रूप से क्षीण होने से जरूर बचाया जा सकता है।

महिलाओं होती हैं ज्यादा परेशान
स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर के डायरेक्टर डॉ. दीपक चौधरी कहते हैं
कि भारतीय महिलाओं में पुरूषों के मुकाबले ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या कहीं ज्यादा होती है क्योंकि यहां अधिकतर महिलाओं को भरपूर पौष्टिक आहार नहीं मिलता और उनमें सही खान-पान को लेकर जागरूकता की भी कमी है।

30 की उम्र तक हो जाता है सम्पूर्ण विकास
डॉ. चौधरी कहते हैं, 30 की उम्र में पहुंचने तक हमारी हड्डियां अपने घनत्व (Bone density) के अधिकतम स्तर तक पहुंच जाती हैं। इस उम्र के बाद हड्डियों में कैल्शियम व अन्य खनिज पदार्थों की कमी होने लगती है। हड्डियों के क्षीण होने की प्रक्रिया इसके दोबारा बनने की प्रक्रिया से तेज हो जाती है। चूंकि यह एक प्रगतिशील प्रक्रिया है ऐसे में हड्डियों के कमजोर होने की प्रक्रिया जीवनभर चलती रहती है। जैसे ही हम अपनी उम्र के 60वें पड़ाव पर पहुंचते हैं हमारी हड्डियों का घनत्व बेहद कम हो जाता है। इससे हड्डियां बेहद कमजोर और नाजुक हो जाती हैं।

स्टेरॉयड से बढ़ जाती है दिक्कत
हड्डियों में कमजोरी की यह प्रक्रिया महिलाओं और पुरूषों दोनों में होती है लेकिन महिलाओं में माहवारी बंद होने के बाद यह प्रक्रिया तेज हो जाती है। जो महिलाएं स्वास्थ्य संबंधी किसी कारण से स्टेरॉयड का इस्तेमाल करती हैं उन्हें ऑस्टियोपोरोसिस जल्दी होने का खतरा रहता है क्योंकि स्टेरॉयड हड्डियों में खनिज पदार्थों की मात्रा कम करता है जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।

अनुवांशिक (Genetic) कारण भी जिम्मेदार
अनुवांशिक (Genetic) कारण भी इसके लिए जिम्मेदार होते हैं। अगर किसी के माता या पिता अथवा दोनों को ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या होती है, तो उसे इससे बचाव के उपायों को लेकर दोगुना अलर्ट रहने की जरूरत होती है। माहवारी बंद होने के बाद शरीर में आने वाले हार्मोंस संबंधी बदलाव भी अधेड़ उम्र की महिलाओं की हड्डियों में अधिक कमजोरी का एक कारण हैं।

बदली लाइफस्टाइल ने बढ़ा दी समस्या
चूंकि आजकल की अधिकतर महिलाएं ज्यादा अस्वस्थ जीवनशैली जी रही हैं, शारीरिक सक्रियता बेहद कम है, धूप के संपर्क में नहीं रहती हैं, बेहद अस्वस्थ आहार लेती हैं, स्मोकिंग और अल्कोहल पर निर्भरता बढ़ रही है, ऐसे में उन्हें कम उम्र में ही ब्रिटल बोन सिंड्रोम (brittle bone syndrome) होने का खतरा बढ़ गया है।

रहें अलर्ट, करें ये उपाय
-जब आप कम उम्र में हों तभी से अपने शरीर की देखभाल को लेकर सतर्क हो जाएं

-आपकी हड्डियां कितनी मजबूत हैं, यह जानने के लिए कभी-कभार बोन डेंसिटी टेस्ट भी कराएं, ताकि कोई समस्या होने पर आप समय रहते उसका इलाज कर सकें।

-अपने खाने में भरपूर मात्रा में कैल्शियम शामिल करें। दूध पिएं, दही, पनीर, अनाज और सूखे मेवे खाएं जैसे कि बादाम। डॉक्टर की सलाह से कैल्शियम के सप्लिमेंट लें, खासतौर से प्रेग्नेंसी अथवा किसी बड़ी बीमारी के बाद।

-यह सुनिश्चित करें आपकी हड्डियों को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिल रहा है। आपको अपना रंग सांवला होने की फिक्र जरूर होगी, बावजूद इसके हफ्ते में कम से कम तीन दिन 15-15 मिनट धूप में जरूर गुजारें।

-अपनी हड्डियों और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए नियमित व्यायाम करें। हड्डियों की मजबूती के लिए वजन उठाने वाले व्यायाम करें। रोज टहलें और जॉगिंग करें।

-स्मोकिंग से बचें। यह आपके शरीर के किसी भी अंग के लिए अच्छा नहीं होता।

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