जल्द खत्म होगा एंटी एजिंग दवा का इंतजार!

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बुढ़ापे को रोकने के लिए दुनिया की प्रयोगशालाओं में एंटी-एजिंग ड्रग्स का विकास काफी समय से चल रहा है लेकिन नए सबूतों से पता चलता है कि आयु बढ़ाने वाली दवाएं हमारे बीच पहले से मौजूद हैं। बायोमेडिकल साइंस बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है जिसकी बदौलत अनेक आधुनिक दवाएं और टेक्नॉलॉजी हमारे सामने आ रही हैं जो मनुष्य की उम्र में दस साल की वृद्धि कर सकती है।

सबसे ज्यादा उम्मीद जगाने वाली आयुवर्धक दवा ‘रेपामाइसिन’ नामक कंपाउंड पर आधारित है। यह दवा शुरू में ऑर्गन ट्रांसप्लांट करवाने वाले लोगों में प्रतिरोधक प्रणाली को दबाने के उद्देश्य से विकसित की गई थी। लेकिन प्रयोगों में देखा गया कि इस दवा से यीस्ट और कीड़ों का जीवन बढ़ाया जा सकता है। इसके बाद चूहों पर इसका प्रयोग किया गया। इसके नतीजे बेहद चौंकाने वाले रहे। दवा के प्रयोग से उनकी आयु में 14% की वृद्धि हो गई।

रिसर्चरों ने ‘रेपामाइसिन’ से मिलते जुलते ‘रेपालोग्स’ कंपाउंड को ज्यादा कारगर और शक्तिशाली पाया। इस कंपाउंड से ‘एवरोलिमस’ नामक कैंसर ड्रग का विकास हुआ। बाद में मनुष्यों पर किए गए ट्रायल में इस दवा से वृद्धावस्था में इम्यून सिस्टम को होने वाले नुकसान को आंशिक रूप से रोकने में सफलता मिली। इसका अर्थ यह हुआ कि इस दवा से आप वृद्धावस्था में भी स्वस्थ रह सकते हैं।

एंटी-एजिंग रिसर्चर ब्रायन कैनेडी का कहना है कि हम बहुत पहले से वृद्धावस्था का इलाज कर रहे हैं। सच बात तो यह है कि हम काफी समय से वृद्धावस्था पर रिसर्च कर रहे हैं लेकिन हमें इसकी जानकारी नहीं थी। ट्रायल के दौरान एवरोलिमस ने पार्टिसिपेंट्स की प्रतिरोधी प्रतिक्रिया या इम्यून रेस्पोंस में 20% का सुधार किया। ब्लड में एंटीबॉडीज या प्रतिरोधक तत्वों की उपस्थिति से व्यक्ति के इम्यून रेस्पोंस को नापा जाता है।

फार्मासियुटिकल रिसर्चर जोआन मैनिक ने कहा है कि अभी हमें इन दवाओं पर बहुत ज्यादा उत्साह नहीं दिखाना चाहिए। इन प्रयोगों को बार-बार दोहराने की आवश्यकता है। उन्होंने रेपामाइसिन का जिक्र करते हुए बताया कि इस ड्रग की बहुत ज्यादा खुराक लेने से डायबिटीज उत्पन्न होने का खतरा है। इस ड्रग के बारे में निर्णायक रूप से कुछ साबित नहीं होने के बावजूद विज्ञान जीवन वर्धक दवाओं के विकास के बहुत करीब पहुंच गया है।

न्यूयॉर्क में एल्बर्ट आइंस्टीन कॉलेज ऑफ़ मेडिसिन के एजिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रमुख नीर बरजिलाई के अनुसार टाइप 2 डायबिटीज में दी जाने वाली मेटफॉर्मिन नामक दवा से जानवरों की आयुसीमा में 5% की वृद्धि हुई है। यह दवा अब मनुष्यों पर ट्रायल के लिए तैयार है। एंटी एजिंग पर दुनिया में कई बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं। पिछले साल गूगल ने कैलिको नामक कंपनी का गठन किया था जिसका फोकस मानव स्वास्थ्य और खुशहाली पर है। गूगल के सीईओ लैरी पेज का कहना है कि बीमारियों और एजिंग से हमारे परिवारों पर असर पड़ता है। यदि हम हेल्थकेयर और बायोटेक्नोलॉजी को लेकर कोई दीर्घकालिक ठोस योजना बनाएं तो हम लाखों लोगों का जीवन बचा सकते हैं।

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