बच्चों को भी हो सकता है आर्थराइटिस

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arthritis in children
अब उम्र से नहीं रहा इसका संबंध, इम्यून सिस्टम है सबसे ज्यादा जिम्मेदार

अगर आपके बच्चे की उंगली के जोड़ों में सूजन, लाली, शरीर पर रैशेज और तेज बुखार जैसे लक्षण अक्सर दिखते हैं तो इसे नजरअंदाज न करें। यह आर्थराइटिस की शुुरूआत हो सकती है। इन दिनों जुवेनाइल आर्थराइटिस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। शुरुआत में इसका इलाज न होने पर दिक्कतें बढ़ जाती हैं।
हालांकि बच्चों में आर्थराइटिस की वजह का ठीक-ठीक पता अब तक नहीं लग सका है, मगर तमाम अध्ययनों से यह साफ हो गया है कि यह एक ऑटोइम्यून डिजीज है। छह हफ्ते के बच्चे से लेकर टीनएजर तक में होने वाले जुवेनाइल आर्थराइटिस में यह रोग इम्यून सिस्टम से संबंधित होता है। यह जोडों और इससे संबंधित टिश्यू में सूजन व जलन, दर्द, गतिहीनता के रूप में सामने आता है।

ये लक्षण हैं आम
ऑर्थोनोवा हॉस्टिपल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. रमणीक महाजन कहते हैं कि जुवेनाइल आर्थराइटिस 6 महीने से लेकर 16 साल की उम्र के बीच सामने आता है। कई मामलों में लक्षण कन्फ़्यूजिंग भी हो सकते हैं। लक्षणों में कलाई, उंगलियों व घुटनों के जोड़ों में सुन्नपन या दर्द शामिल हो सकता है। जोडों में अचानक सूजन भी आ सकती है। अचानक रैशेज सामने आ सकते हैं और गायब हो सकते हैं। रैशेज एक जगह से शुरू होकर शरीर के बाकी हिस्सों तक पहुंच सकते हैं। शाम के समय बुखार होने और अचानक इसके उतर जाने जैसे लक्षण र्युमेटॉइड आर्थराइटिस का अहम हिस्सा हैं। रॉकलैंड अस्पताल के सीनियर एक्सपर्ट डॉ. पी. के. दवे कहते हैं कि बच्चों के धूप में न निकलने और शारीरिक क्रियाकलापों में कमी उन्हें रिकेट जैसी समस्या का शिकार भी बना रही है। रिकेट हड्डिïयों से संबंधित ऐसी बीमारी है जो विटामिन डी व कैल्शियम की कमी से होती है। इससे बच्चों का शारीरिक विकास तो प्रभावित होता ही है, उनके घुटने, पैरों व रीढ़ में दिक्कत होने लगती है।

बचाव के लिए करें ये उपाय
इन समस्याओं से बचाव के लिए बचपन से ही रोज कम से कम 1200 से 1300 मिलीग्राम कैल्शियम लेना चाहिए। मगर आमतौर पर लोगों को 700 से 1000 मिलीग्राम कैल्शियम ही मिल पाता है। आर्थराइटिस से पीडि़त बच्चों के लिए रेग्युलर एक्सरसाइज बेहद जरूरी है। टहलना, स्विमिंग करना और साइकल चलाना बेहतर विकल्प हो सकता है। इन आदतों को शुरू से बच्चों की लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाएँ।

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