फिटनेस की चाह न पड़ जाए सेहत पर भारी

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आज के दौर में 6 पैक एब्स या गुड बिल्ट बॉडी बनाने के लिए युवाओं में जिम जाने का क्रेज काफी बढ़ा है। इस बात में कोई शक नहीं कि ग्लोबलाइजेशन की लहर में आई मल्टीनेशनल कंपनियों ने सजे-धजे मैनेजरों और एग्जीक्यूटिव रखने शुरू किए है। इसकी वजह से भी युवाओं में फिटनेस कल्चर में खुद को शामिल करने की ललक नजर आती है। इसके अलवा इसका कारण बॉलीवुड भी है आज लगभग हर बॉलीवुड स्टार ने अच्छी टोन्ड बॉडी बना रखी है। बॉडी से लुक्स तो बेहतर बनता ही है, शरीर में भी मजबूती आती है। लेकिन अगर आपकी इस एक्सरसाइज का तरीका सही नहीं हुआ तो आपको इसका नुक्सान भी झेलना पड्‍ सकता है। जानिए कैसे:

एक्सरसाइज का तरीका सही होना जरुरी
व्यायाम के तौर-तरीकों पर गौर करें, क्योंकि गलत तरीके से व्यायाम करने से शरीर के अंगों, जोड़ों में चोट आ सकती है। अकसर सिक्स पैक एब्स बनाने के चक्कर में युवा जल्दबाजी करने लगते हैं, जिसका खामियाजा उन्हें बाद में उठाना पड़ता है। बात ध्यान रखने की है कि अन्य मांसपेशियों की तरह पेट की मांसपेशियों को भी पर्याप्त आराम की जरूरत होती है। इसलिए बेहतर यही होगा कि आप एब्स की एक्सरसाइज एक दिन छोड़कर करें।

इतना ज्यादा नहीं कि…
शरीर के एक हिस्से की लगातार एक्सरसाइज करने से चोट लगने की संभावना काफी रहती है। मजबूती बढ़ाने के लिए जरूरी है कि आप व्यायाम उस सीमा तक ही करें, जहां तक आप सह सकने में सक्षम हो। यह बेहद जरूरी है कि आप मांसपेशियों को एक दिन का आराम दे। इसलिए इस बात की सलाह दी जाती है कि मांसपेशियों को थकान से बचाने के लिए उन्हें पर्याप्त आराम दें। भारी वजन उठाने का असर अकसर कमर पर पड़ता है।

गफलत में न फंसे
अकसर एक्सरसाइज को लेकर लोगों में काफी मिथक होते है। लोगों को भ्रम होता है जब आप व्यायाम करना बंद कर देते हैं, तो शरीर मोटा हो जाता है। गौर करें कि मसल और फैट दोनों के अलग गुण होते है। मसल कभी फैट में बदल नहीं सकती है और फैट कभी मसल में नहीं। जब आप व्यायाम करना बंद कर देते है, तो आपकी मसल, कसरत करने के पहले वाली अवस्था में आ जाती है।

क्या शरीर गलत सिग्नल दे रहा है ?
अकसर युवा गलतफहमी में रहते हैं कि अगर एक्सरसाइज के दौरान दर्द नहीं होगा, तो इसका मतलब है कि फायदा नहीं हो रहा है। शरीर में दर्द होना इस बात का संकेत है कि कुछ सही नहीं हो रहा। ध्यान रखें कि वर्कआउट के दौरान आपको दर्द हो रहा है, तो आप या तो कसरत बंद कर दें या उसकी गति धीमी कर दें। हालांकि आपको मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए और अपनी सहनशक्ति को बढ़ाने में थोड़ी असुविधा होगी, लेकिन अगर ये दर्द हद से ज्यादा है, तो ये सावधान रहने का सिग्नल है।

झोलाछाप ट्रेनर नहीं
ट्रेनर चुनने से पहले पूरी तस्दीक कर लें कि वह ट्रेनर कितना योग्य है। कई ट्रेनर तो ऐसे होते हैं, जिनके पास न तो कोई डिग्री होती है और न ही उन्हें फिटनेस ट्रेनिंग के बारे में सही जानकारी होती है। किसी योग्य ट्रेनर से ही प्रशिक्षण लें।

खान-पान का रखें ध्यान
पसीने के कारण शरीर में पानी की मात्रा कम होती है। ऐसे में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए खूब पानी पिएं। आप ऐसी डाइट लें, जिसमें पोषक तत्वों, फाइबर की अधिकता हो और फैट की मात्रा कम हो। विटामिन, प्रोटीन, कैल्शियम पर्याप्त मात्रा में लेते रहें।

हानिकारक सप्लीमेंट से तौबा
अकसर युवा जल्दी बॉडी बनाने के चक्कर में स्टेरॉयड सरीखे हानिकारक सप्लीमेंट लेते है, जो कि सेहत के लिए काफी नुकसान दायक होते है। डॉ. प्रतेश कौल कहते हैं कि स्टेरॉयड जैसे सप्लीमेंट लेने से मसल्स तेजी से बनती है, इस चक्कर में युवा इनका सेवन ज्यादा करते है, लेकिन ये सप्लीमेंट शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम के साथ कई दूसरे हिस्सों को हानि पहुंचाते है।

गौर करें :
– हफ्ते में तीन से पांच बार 30 से 60 मिनट व्यायाम करना चाहिए। आपकी एक्सरसाइज करने की क्षमता 45 से 80 प्रतिशत आपकी शारीरिक अवस्था, उम्र, मेडिकल हिस्ट्री पर निर्भर करती है।
– फिटनेस ट्रेनिंग के दौरान शरीर को पर्याप्त आराम दें। इससे आप मांसपेशियों में तनाव और थकान महसूस नहीं करेंगे।
– वॉर्म-अप करने से जहां मांसपेशियां बेहतर ढंग से काम करने लगती है, वहीं इससे शरीर के किसी अंग में चोट लगने की संभावना कम हो जाती है।
– हल्का व्यायाम जैसे कि चलने से आपका वजन कम हो सकता है, तनाव और ब्लड प्रेशर में आराम मिलता है।

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