जानें बर्थ कंट्रोल के बेहतरीन विकल्प

Share:

birth-controlतमाम विकल्पों के बीच अपने लिए बर्थ कंट्रोल (Birth Control) का बेस्ट ऑप्शन (best options)चुनना बेहद मुश्किल काम है। लेकिन कुछ सवालों के जवाब के साथ आप चुनाव कर सकते हैं, जैसे कि: आपको सेक्सुअली ट्रांसमिटेड बीमारियों (STD) से बचाव चाहिए? आसान इस्तेमाल और खर्च? किसका कैसा प्रभाव है? इन सवालों के जवाब के लिए यह आर्टिकल देखें और अपने लिए बेस्ट ऑप्शन के बारे मे डॉक्टर से सलाह लें: 

फर्टिलिटी अवेयरनेस: इसे नेचुरल फैमिली प्लानिंग भी कहते हैं। इसका मतलब है उस समय सेक्स करने से परहेज जब महिलाएं सबसे ज्यादा फर्टाइल रहती हैं। इसका सबसे विश्वसनीय तरीका होता है सरवाईकल म्यूकस और शरीर के तापमान की जांच करना। इस तरीके की सही जानकारी के लिए किसी हेल्थ एक्सपर्ट से ट्रेनिंग ले सकते हैं।

फ़ायदे: इसमे किसी दावा या डिवाइस की जरूरत नहीं होती है , इसलिए कोई खर्च भी नहीं आता।

नुकसान: इससे सेक्सुअल लाइफ की निरंतरता खत्म हो जाती है और 25% टिपिकल यूजर्स प्रेग्नेंट हो जाती हैं।

स्पर्मिसाइड: स्पर्मिसाइड मे एक केमिकल होता है जो स्पर्म्स को मारता है। यह फ़ोम, जेली, क्रीम अथवा फिल्म के रूप मे आता है जिसे सेक्स से पहले जननांग (vagina)  मे रखा जाता है। कुछ स्पर्मिसाइड ऐसे भी आते हैं जिन्हें सेक्स करने के टाइम से 30 मिनट पहले इस्तेमाल करना होता है। इसके ज्यादा इस्तेमाल से इरिटेशन या इन्फेक्शन भी हो सकता है। यही वजह है की आमतौर पर लोग इसे अन्य विकल्पों के साथ इस्तेमाल करते हैं।

फ़ायदे: इस्तेमाल मे आसान, सस्ता।

नुकसान: सेक्सुअली ट्रांसमिटेड बीमारियों का खतरा, 29% टिपिकल यूजर प्रेग्नेंट हो जाते हैं।

मेल कंडोम: लैटेक्स कंडोम बैरियर का एक क्लासिक तरीका है। यह न सिर्फ स्पर्म्स को महिला के शरीर मे प्रवेश को रोकता है बल्कि तमाम प्रकार की सेक्सुअली ट्रांसमिटेड बीमारियों से बचाता है। जो कपल गर्भनिरोध के लिए पूरी तरह से इस तरीके पर निर्भर होते हैं उनमे से 15% प्रेग्नेंट होते हैं।

फ़ायदे: आसानी से उपलब्ध, अधिकतर यौनिक बीमारियों से बचाव मे कारगर और सस्ता भी।

नुकसान: तभी कारगर है जब हर बार सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए। रीयूज़ नहीं हो सकता।

फ़ीमेल कोंडोम: फ़ीमेल कोंडोम एक पतला प्लास्टिक पाउच होता है जिसे जननांग मे सेक्स से पहले 8 घंटे तक इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन यह मेल कोंडोम की तुलना मे कम कारगर होता है।

फ़ायदे: आसानी से उपलब्ध, कुछ प्रकार की यौन संबंधी बीमारियों से बचाव मे सक्षम।

नुकसान: इससे आवाज आ सकती है। 21% यूजर्स प्रेग्नेंट हो जाते हैं। दोबारा इस्तेमाल नहीं हो सकता है और इसे मेल कोंडोम के साथ इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से यह फट सकता है।

डाइअफ़्रैम: यह रबर से बना एक गुंबज जैसा होता है जिसे सेक्स से पहले गर्भाशय केआर ऊपर रखना होता है। यह स्पर्मिसाइड के साथ इस्तेमाल किया जाता है। आमतौर पर इसके 16% यूजर्स प्रेग्नेंट होते हैं, जिनमे वे लोग भी शामिल है डिवाइस का इस्तेमाल सही ढंग से नहीं करते हैं।

फ़ायदे: यह थोड़ा महंगा होता है लेकिन एक डिवाइस दो साल तक इस्तेमाल की जा सकती है।

नुकसान: इसे कोई एक्सपर्ट ही फिट कर सकता है, बीमारियों से बचाव नहीं होता। पीरियड मे इस्तेमाल नहीं हो सकता क्योंकि इससे टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम का खतरा रहता है।

सर्वाइकल कैप: यह  भी डाइअफ़्रैम जैसी होती है लेकिन थोड़ी छोटी होती है। यह कैप सर्विक्स के ऊपर फिट होकर यूट्रस मे प्रवेश को रोकता है। यह स्पर्मिसाइड के साथ इस्तेमाल होता है। सर्वाइकल कैप का फेलियर रेट उन महिलाओं मे 15% है जो पहले कभी प्रेग्नेंट नहीं हुईं और अन्य महिलाओं मे 30% रहता है।

फ़ायदे: 48 घंटों तक अपनी जगह पर रह सकता है। कम खर्चीला है।

नुकसान: इसे कोई एक्सपर्ट ही फिट कर सकता है, बीमारियों से बचाव नहीं होता। पीरियड मे इस्तेमाल नहीं हो सकता।

बर्थ कंट्रोल स्पोंज: यह फ़ोम से बना होता है जिसमे स्पर्मिसाइड होता है। यह सेक्स से 24 घंटे पहले तक गर्भाशय मे फिट किया जा सकता है। यह सर्वाइकल कैप जितना प्रभावी होता है। जिन महिलाओं के पहले बच्चे नहीं हैं उनमे 16% और जिनके बच्चे हैं उनमे इससे 32% तक फेलियर रेट है। लेकिन डायअफ़्रैम या सर्वाइकल कैप की तरह इसे डॉक्टर से फिट कराने की जरूरत नहीं होती।

फ़ायदे: तुरंत प्रभावी।

नुकसान: सही ढंग से लगाना मुश्किल, एसटीडी प्रोटेक्शन नहीं। पीरियड मे इस्तेमाल नहीं हो सकता।

बर्थ कंट्रोल पिल: आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले बर्थ कंट्रोल पिल मे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टिन होता है जो ओवुलेशन को रोकता है। अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह काफी प्रभावी होता है। हालांकि इसके भी 8% टिपिकल यूजर्स प्रेग्नेंट हो जाते हैं, जिनमे वे लोग भी शामिल होते हैं जो डोज़ लेना भूल जाते हैं। इसके लि डॉक्टर के प्रेसक्रिप्शन की जरूरत होती है।

फ़ायदे: इससे पीरियड्स ज्यादा रेग्युलर और हल्के होते हैं। साथ ही पीरियड मे दर्द भी कम होता है।

नुकसान: थोड़ा महंगा, एसटीडी से कोई सुरक्षा नहीं, साइड इफेक्ट हो सकता है, जैसे कि ब्रेस्ट ज्यादा सॉफ्ट हो जाना, दाग-धब्बे, खून के थक्के जमना और ब्लड प्रेशर बढ़ना आदि।

बर्थ कंट्रोल पैच: जिन महिलाओं को डेली पिल लेना याद नहीं रहता है वे बर्थ कंट्रोल पैच ले सकती हैं। यह पैच स्किन पर लगाया जाता है। एक पैच एक हफ्ते के लिए लगाया जाता है। महीने के 3 हफ्ते पैच लगाना होता है और चौथा हफ्ता पैच फ्री होता है। पैच से भी वे ही हार्मोन्स रिलीज होते हैं जो कि पिल से होते हैं और समान प्रभाव भी छोडते हैं।

फ़ायदे: पीरियड ज्यादा रेग्युलर और लाइट होता है। साथ ही दर्द भी कम होता है। रोज पिल लेना याद नहीं रखना पड़ता है।

नुकसान: इससे स्किन इरिटेशन हो सकती है अथवा बर्थ कंट्रोल पिल से होने वाले अन्य साइड इफ़ेक्ट्स  भी हो सकते हैं। एसटीडी से सुरक्षा नहीं मिलती।

वेजाइनल रिंग: नुवारिंग एक सॉफ्ट प्लास्टिक रिंग होती है जो वेजाइना के भीतर लगाई जाती है। यह रिंग भी पिल और पैच जैसे हार्मोन रिलीज करती है। लेकिन इसे महीने मे एक बार बदलना पड़ता है।

फ़ायदे: इससे पीरियड्स ज्यादा रेग्युलर और लाइट होते हैं। सिर्फ महीने मे एक बार बदलना पड़ता है।

नुकसान: वेजाइनल इरिटेशन हो सकती है और पिल या पैच जैसे साइड इफ़ेक्ट्स हो सकते हैं। एसटीडी से सुरक्षा नहीं मिलती।

बर्थ कंट्रोल शॉट: यह एक हार्मोनल इंजेक्शन होता है जो 3 महीने के लिए प्रेग्नेंसी को रोकता है। टिपिकल कपल्स के लिए यह बर्थ कंट्रोल पिल से ज्यादा प्रभावी होता है। इसके सिर्फ 3% यूजर्स ही प्रेग्नेंट होते हैं।

फायदे: साल मे सिर्फ 4 बार लेना पड़ता है। बेहद प्रभावी होता है।

नुकसान: कुछ साइड इफ़ेक्ट्स हो सकते हैं और एसटीडी से भी प्रोटेक्ट नहीं करता है।

बर्थ कंट्रोल इंप्लांट: यह माचिस की तीली के आकार का एक रॉड जैसा होता है जिसे बांह के ऊपरी हिस्से की स्किन मे इंप्लांट किया जाता है। यह वही हारमोन रिलीज करता है जो कि बर्थ कंट्रोल शॉट मे होता है लेकिन इससे 3 साल तक सुरक्षा मिलती है। इसका फेलियर रेट 1% होता है।

फायदे: 3 साल तक काम करता है। बेहद प्रभावी होता है।

नुकसान: बेहद खर्चीली प्रक्रिया। साइड इफेक्ट का खतरा, जिसमे अनियमित ब्लीडिंग, एसटीडी से सुरक्षा नहीं देता।

आईयूडी: आईयूडी का मतलब है इंट्रायूटरीन डिवाइस। यह एक टी-शेप का प्लास्टिक पीस होता है जिसे डॉक्टर यूट्रस के अंदर लगाते हैं। कॉपर आईयूडी 10 वर्षों तक काम करते हैं। मिरेना, जो कि एक हार्मोनल आईयूडी है, 5 वर्षों के लिए लगता है लेकिन इससे पीरियड बेहद लाइट हो जाता है और दर्द भी कम होता है। लीलेटा (Liletta) और स्काइला (Skyla) ऐसे हार्मोनल आईयूडी हैं जो 3 साल तक प्रेग्नेंसी रोकते हैं। आईयूडी इस्तेमाल करने वाली औसतन 1000 महिलाओं मे से सिर्फ 8 प्रेग्नेंट होती हैं।

फ़ायदे: लंबे समय तक चलने वाला और लो मेंटेनेंस।

नुकसान: पीरियड्स अनियमित या हेवी हो सकते हैं। इसे लगवाना ज्यादा महंगा होता है। बाहर आने का खतरा रहता है और कई तरह के साइड इफ़ेक्ट्स भी हो सकते हैं।

ट्युबल लिगेशन यानि नसबंदी: अगर आपने भविष्य मे अपने बच्चे नहीं पैदा करने का फैसला कर लिया है तो आप पर्मानेंट बर्थ कंट्रोल का विकल्प अपना सकते हैं। महिलाओं के लिए उपलब्ध विकल्प है ट्युबल लिगेशन जिसे आम बोलचाल मे नसबंदी कहते हैं। इसमे सर्जन महिला के फैलोपियन ट्यूब को बांध देते हैं जिससे अंडाणु यहाँ से निकालकर गर्भाशय तक नहीं पहुँच पाते।

फ़ायदे: पर्मानेंट विकल्प, तकरीबन 100% प्रभावी।

नुकसान: इसमे सर्जरी की जरूरत पड़ती है। इसे दोबारा सामान्य नहीं किया जा सकता। एसटीडी से सुरक्षा नहीं देता।

ट्यूबल इंप्लांट: नई प्रक्रिया के जरिये बिना सर्जरी के फैलोपियन ट्यूब को ब्लॉक करना संभव हो गया है। इसके जरिये दोनों ट्यूब्स मे मेटल या सिलिकन का छोटा सा इंप्लांट लगाया जाता है। इससे सकार टिश्यू धीरे-धीरे इंप्लांट्स के आस-पास बढ़ जाते हैं और ट्यूब को पूरी तरह स्से ब्लॉक कर देते हैं। एक बार एक्सरे मे यह कनफर्म हो जाए कि ट्यूब पूरी तरह से ब्लॉक हो गया है, उसके बाद बर्थ कंट्रोल के अन्य उपाय अपनाने की जरूरत नहीं होती।

फ़ायदे: पर्मानेंट विकल्प, सर्जरी की जरूरत नहीं। तकरीबन 100% प्रभावी।

नुकसान: इसे प्रभावी होने मे कुछ समय लगया है। पेडू मे संक्रमण होने का खतरा रहता है, दोबारा सामान्य नहीं किया जा सकता और काफी खर्चीली प्रक्रिया होती है।

वैसेक्टोमी: पुरुषों के लिए बर्थ कंट्रोल के लिए कोंडोम के अलावा सिर्फ वैसेक्टोमी का विकल्प उपलब्ध है। इसके तहत टेस्टिकल से रेप्रोडक्टिव सिस्टम तक स्पर्म को ले जाने वाले ट्यूब को बंद कर दिया जाता है। इससे स्पर्म रिलीज नहीं होता है लेकिन यह प्रक्रिया उत्तेजना मे कोई कमी नहीं लाती है।

फ़ायदे: पर्मानेंट विकल्प है, ट्यूबल लिगेशन से सस्ती प्रक्रिया है। तकरीबन 100% प्रभावी है।

नुकसान: सर्जरी की जरूरत पड़ती है, तुरंत प्रभावी नहीं होता है और इसे पूर्ववत नहीं किया जा सकता है।

 

Share:

Leave a reply