अपने ‘जोड़ों’ पर न डालें मोटापे का बोझ

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bone joints and obesity
अगर किसी से पूछा जाए कि मोटापे (obesity) के कारण होने वाली बीमारियों के नाम बताइए तो बहुत संभावना है कि वह हृदय की बीमारी या डायबिटीज का नाम लेगा। पर सच्चाई यह है कि मोटापे के कारण एक और बीमारी होती है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है और वह है अर्थराइटिस। शरीर का वजन ज्यादा होने से जोड़ पर ज्यादा दबाव रहता है खासकर उन जोड़ों (joints) पर जो वजन संभालते हैं जैसे कुल्हों और घुटनों पर।

अगर आपका वजन सामान्य से ज्यादा है तो आप निश्चित रूप से उस कार्टिलेज पर ज्यादा भार डाल रहे हैं। कुल्हों, कंधों और घुटनों के जानकार डॉ. अतुल मिश्रा, (फोर्टिस हॉस्पीटल, नोएडा में कंसलटैंट नी सर्जन और ऑर्थोपेडिक्स के प्रमुख) कहते हैं, “जब आप कार्टिलेज पर ज्यादा वजन डालते हैं तो यह जल्दी खराब हो जाएगा।”

कई अध्ययनों से पता चला है कि शरीर का वजन ज्यादा होने और घुटने में दर्द होने के बीच संबंध है। अर्थराइटिस का सबसे प्रचलित रूप ऑस्टियोअर्थराइटिस है और यह भारत में विकलांगता का अग्रणी कारण है। हर साल 15 मिलियन से ज्यादा भारतीय को अपनी जकड़ में लेता है।

अच्छी बात यह है कि छोटे बदलावों से बड़ा अंतर आ सकता है। घुटने में दर्द वाले मोटे और ज्यादा वजन वाले लोगों के हाल के एक अध्ययन से पता चला कि भोजन या व्यायाम से अपना वजन कम कर पाने वाले लोगों का घुटने का दर्द भी आधा रह गया था। घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए वजन कम करना एक महत्त्वपूर्ण भाग है। वर्ल्ड्स ओबेसिटी डे (26 अक्तूबर) मनाते हुए आइए उन पांच उपायों की चर्चा करें जिससे आपको मोटापे को नियंत्रण में रखने में सहायता मिले और इस तरह आपको जोड़ों की समस्या होने की आशंका कम हो।

1.अपने डॉक्टर से सलाह करें : एकाध किलो वजन इधर-उधर ज्यादा होना एक बात है पर सामान्य वजन से 20 किलो और ज्यादा वजन होना अस्वास्थ्यकर है। इससे पहले कि आप हेवी वर्क आउट शुरू करें आपको किसी विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। अगर आपको घुटने में दर्द पहले से है तो अपने चिकित्सक से सलाह कर लें कि आपके लिए कौन सी गतिविधियां उपयुक्त रहेंगी। सलाह करने में देरी से समस्या और गंभीर हो सकती है। ना सिर्फ जोड़ को ठीक करना मुश्किल हो जाता है बल्कि नुकसान स्थायी और ऐसा भी हो सकता है कि ठीक ही ना हो।

2.जागरुक रहें : सर्जरी, अगर आवश्यक है, तो किसी भी सर्जरी का निर्णय करने से पहले मरीज और उसके परिवार के लोगों के लिए विस्तृत अनुसंधान करना बेहद महत्त्वपूर्ण है। जो मरीज समझौते का जीवन नहीं जीना चाहते हैं वे टोटल नी रीप्लेसमेंट सर्जरी के विकल्प का चुनाव कर सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों के दौरान घुटने की सर्जरी के लिए उपयोग में लाई जाने वाली टेक्नालॉजी में अच्छा खासा बदलाव आया है। प्रौद्योगिकी के लिहाज से उन्नत ऑक्सीडाइज्ड जिरकोनियम हाल के समय में लंबे समय तक चलने वाले घुटनों की पेशकश करने में सफल रहा है। यह सामग्री नी इंप्लांट तैयार करने के लिए उत्कृष्ट साबित हुई है क्योंकि सख्त और सहज होने के साथ-साथ खरोंच रोधी है। इसके जैसी उन्नत सामग्री से बेहतर प्रदर्शन और ज्यादा चलने वाले इंप्लांट बनाने में सहायता मिलती है। इसे 30 साल चलने के लिए जांचा जा चुका है (प्रयोगशाला की स्थितियों में)। इसतरह, यह सक्रिय जीवन जीने के लिए बेहद अनुशंसित प्रोसथेसिस है।

3.व्यायाम – मोटे और ज्यादा वजन वाले लोगों के लिए अच्छा व्यायाम पैदल चलना है – भले ही सुबह जब आप दिन की शुरुआत कर रहे हों उस समय यह कुछ ही मिनट के लिए हो — या फिर घर में स्थैतिक या बाहर साइकिल चलाई जाए। ज्यादा सक्रिय होइए – अपनी दिनचर्या में ज्यादा शारीरिक कार्य शामिल कीजिए। उदाहरण के लिए फोन पर बातें करते हुए चलते रहिए (आखिरकार, वे बिना तार के इसीलिए हैं!), अपने बच्चों या नाती-पोतियों के साथ सक्रियता से खेलिए, और दफ्तर में किसी काम के लिए ईमेल भेजने की बजाय वहां चले जाइए।

4.अपना वजन ठीक रखें : मोटापे का कारण अस्वास्थ्यकर भोजन और व्यायाम की कमी है। इस बीमारी से निपटने के लिए आपको हर दिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम करना चाहिए। इससे आपको ऑस्टियोअर्थराइटिस होने की आशंका कम हो जाती है और आप ज्यादा लचीले हो जाते हैं। अपना बीएमआई, कॉलसट्रॉल और वजन नियंत्रण में रखिए।

5.वही खाएं जो आपके लिए ठीक है : संतुलित भोजन करना ठीक रहता है जैसी-तैसी आहार योजनाओं की शरण में न जाएं। इससे मांसपेशियों का फटना रोकने में सहायता मिलती है और आपकी मांसपेशियों का वजन कायम रहता है। इस तरह आपको संपूर्ण और स्वस्थ जीवन हासिल होता है।

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