कमर के मोटापे से कैंसर का खतरा!

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कमर की बढ़ती चौड़ाई कैंसर का शिकार बना सकती है। लैंसेट मेडिकल जर्नल मे छपी एक स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक कमर के मोटापे और कैंसर के बीच गहरा संबंध है। इस तरह का मोटापा कैंसर के मरीजों की संख्या मे हर साल 3,500 की बढ़ोत्तरी कर सकता है। अपनी तरह की अब तक की सबसे बड़ी यह स्टडी रिपोर्ट भारतीय आबादी के एक बड़े तबके की टेंशन बढ़ा सकती है, क्योंकि यहाँ पेट का मोटापा (central obesity) आम है।

लेकिन इसी स्टडी ने वैज्ञानिकों के मन मे उम्मीद की एक नई किरण भी जगा दी है। उन्हें लगता है कि नई फ़ाइंडिंग्स लोगों को फ़िटनेस को लेकर अलर्ट करेंगी। जिससे हर साल बढ़ रहे कैंसर के 12,000 मामलों को रोका जा सकता है, और मोटापा कंट्रोल होते ही डायबीटीज़, दिल की बीमारियां और लाइफस्टाइल से जुड़ी अन्य बीमारियाँ भी कंट्रोल मे आ जाएंगी।

इस स्टडी मे यूके के 5 मिलियन लोगों को शामिल किया गया था। स्टडी के मुताबिक नॉर्मल से अधिक वजन का लिंक 10 तरह के कैंसर से होता है, जिनमे सार्विकल कैंसर (cervical cancer), ब्रेस्ट कैंसर और ल्यूकीमिया यानि ब्लड कैंसर भी शामिल है।

सबसे मजबूत लिंक गर्भाशय के कैंसर से देखा गया है, इसके 41% मामलों के लिए अधिक वजन जिम्मेदार था और पित्ताशय (gallbladder), किडनी, लिवर और और कोलन कैंसर के मामले मे मोटापा 10% से ज्यादा जिम्मेदार था।

कैंसर के कई कारण हैं-इनमे से कुछ जेनेटिक हैं तो कुछ पर्यावरण संबंधी हैं। मगर लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रोपिकल मेडिसिन (LSHTM) और फ़ार इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ इन्फॉर्मैटिक्स के वैज्ञानिकों ने दूसरे जिम्मेदार कारणों का आंकलन कर यह नतीजा निकाला है कि अगर लोग अपना वजन सामान्य रखें तो कैंसर के बहुत सारे मामलों को रोका जा सकता है।

बीएमआई मे प्रति 5kg/m की बढ़ोतरी के साथ गर्भाशय के कैंसर का खतरा 62% तक, गालब्लैडर का 31%, किडनी का 25%, सर्विक्स का 10%, थायराइड का 9% और ल्यूकीमिया होने का खतरा 9% तक बढ़ जाता है। बीएमआई बढ़ने के साथ लिवर कैंसर का 19%, कोलन कैंसर का 10%, ओवेरियन कैंसर का 9% और ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा 5% तक बढ़ जाता है। ऐसे मे वजन कंट्रोल मे रखकर कैंसर के मामलों मे जादुई गिरावट देखी जा सकती है।

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