कलियुग में अश्वत्थामा का बाण-ट्राइक्लोजन!

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महाभारत में आपने पढ़ा, सुना या देखा होगा कि अश्वत्थामा ने अपने बाण से अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भस्थ शिशु परीक्षित पर कैसे प्रहार किया था। चूंकि यह शिशु ही पांडवों के कुल का इकलौता उत्तराधिकारी था, ऐसे मे श्री कृष्ण ने अपनी दिव्य शक्तियों से उसकी जान बचाई थी। आज के समय मे ट्राइक्लोजन और ट्राइक्लोकार्बन जैसे केमिकल भी कलियुग के अश्वत्थामा के बाण कि भूमिका निभा रहे हैं। चौंकिए नहीं! यह सच है।

टूथपेस्ट, साबुन, डिटर्जेंट कारपेट, पेंट, खिलौनों और यहाँ तक कि कुछ स्टेशनरी आइटम्स मे मिलने वाला ट्राइक्लोजन और ट्राइक्लोकार्बन का एक्सपोजर गर्भस्थ शिशु के विकास को प्रभावित कर सकता है। यह तथ्य अमेरिका मे हुई एक स्टडी से सामने आया है।

सनी डाउनस्टेट स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ मे हुई एक स्टडी मे पाया गया है कि, बहुत सारी प्रेग्नेंट महिलाओं की सेहत और उनके गर्भस्थ शिशु के विकास का संबंध एंटीबैक्टीरियल के एक्सपोजर से होता है। इस स्टडी मे शामिल सभी महिलाओं के यूरिन टेस्ट मे ट्राइक्लोजन एंटीबैक्टीरियल पाया गया और 85% के यूरिन सैंपल मे ट्राइक्लोकार्बन केमिकल मौजूद था। सबसे ज्यादा चिंता वाली बात यह है कि इनमे से आधी महिलाओं के गर्भनाल यानी अंबिलिकल कॉर्ड के ब्लड सैंपल मे भी ये केमिकल पाये गए हैं, जो यह कन्फर्म करते हैं कि केमिकल कुछ गर्भस्थ शिशुओं तक भी पहुँच रहा है। इन केमिकल के हार्मोनल फंक्शन पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन भी स्टडी कर रहा है। एनिमल ट्रायल मे इसका असर पाया गया है।

स्टडी मे शामिल एक्सपर्ट्स का कहना है कि एंडोक्राइन हार्मोन पर पड़ने वाला असर भ्रूण के विकास पर असर डाल सकता है, और ट्राइक्लोजन और ट्राइक्लोकार्बन एंडोक्राइन को प्रभावित कर सकते हैं। इस स्टडी मे ब्रुकलिनन्यूयॉर्क की 184 प्रेग्नेंत महिलाओं के यूरिन और कॉर्ड ब्लड सैंपल टेस्ट किए गए थे। इस असर को देखते हुए कई बड़ी घरेलू उत्पाद कंपनियों जैसे कि, एवोन, प्रोक्टर एंड गैम्बल और जॉनसन एंड जॉनसन ने अपने प्रोडक्टस से ट्राइक्लोजन हटाने की घोषणा की है। मिनेसोटा कुछ घरेलू इस्तेमाल वाले प्रॉडक्ट मे एंटीमाइक्रोबियल के इस्तेमाल पर बैन लगाने वाला पहला स्टेट है, यह बैन जनवरी 2017 से प्रभावी होगा।

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