जीवन बचाने को तैयार हैं 1 लाख लोग

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भारत को स्वस्थ और बीमारी मुक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता के तहत हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने विश्व हृदय दिवस पर एक नया मकाम हासिल किया है। संस्था ने 1 लाख से भी ज्यादा लोगों को हैंड्स ओनली सीपीआर 10 सफलता पूर्वक सिखाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इस जीवनदायी तकनीक की मदद से सडन कार्डिएक अरेस्ट के शिकार मरीजों को पुनर्जीवित किया जा सकता है।

एक ऐसे देश में जहां 24 लाख लोग हर साल दिल की बीमारियों के चलते मर जाते हैं इनमें से भी 50% लोग सिर्फ इसलिए मर जाते हैं क्योंकि वे वक्त पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे में यहां सडन कार्डिएक अरेस्ट के शिकार मरीजों को पुनर्जीवित करने में सक्षम तकनीक हैंड्स ओनली सीपीआर के बारे में हर व्यक्ति को जानना बेहद जरूरी हो जाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए एचसीएफआई ने एक राष्ट्रीय अभियान की शुरूआत की है जिसके तहत सीपीआर 10 मंत्र तैयार किया गया और उसके माध्यम से लोगों को इस तकनीक के बारे में सिखाया जा रहा है।

इसके माध्यम से यह सिखाया जाता है कि किस तरह से आप सडन कार्डिएक डेथ के शिकार व्यक्ति को 10 मिनट के भीतर पुनर्जीवित कर सकते हैं। एक दिन में सबसे ज्यादा लोगों को यह तकनीक से सिखाने के लिए तीन लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड भी एनजीओ के नाम दर्ज हैं।

विश्व हृदय दिवस के उपलक्ष्य में पद्मश्री डीएसटी नैशनल साइंस कम्युनिकेशन और डॉ. बी. सी. रॉय राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के. के. अग्रवाल ने कहा कि भारतीयों को पश्चिमी देशों के लोगों के मुकाबले दिल की बीमारियों का खतरा ज्यादा रहता है। इसके लिए कई कारण जिम्मेदार हैं। इनमें लंबे समय तक बैठकर काम करने वाली जीवनशैली, खान-पान की गलत आदतें और रोजाना का तनाव आदि शामिल है। इन स्थितियों को देखते हुए यहां सुरक्षात्मक उपायों के बारे में लोगों को जागरूक करने की बेहद जरूरत महसूस होती है। साथ ही पहले से फैल चुकी समस्या का कारगर समाधान ढूंढना भी आवश्यक है। मौजूदा समय की जो सबसे बड़ी समस्या है वह है राष्ट्रीय सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम का अभाव। अगर इसे लागू कर दिया जाए तो हजारों लोगों की जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

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