संभव है डेंगू से बचाव और इसका मैनेजमेंट

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डेंगू (Dengue) ने एक बार फिर अपने पाँव पसार लिए हैं और इसकी दहशत ने लोगों को परेशान कर दिया है। ऐसे मे यह जानना बेहद जरूरी है की इससे बचाव (Precautions) और इसका प्रबंधन (management) कैसे किया जा सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर लोगों को बचाव, इलाज और इसके मिथ्स के बारे मे जागरूक किया जाय तो इसे बेहद आसानी से मैनेज किया जा सकता है।
बेवजह प्लेटलेट चढ़ाना हो सकता है खतरनाक
हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और आईएमए के महासचिव डॉ के के अग्रवाल का कहना है कि “डेंगू प्रिवेंटेबल और मैनेजेबल है। डेंगू के 1% से भी कम मामलों मे काम्प्लिकेशन होने का खतरा रहता है, और अगर लोगों को इसके वार्निंग सिग्नल के बारे मे पता हो तो डेंगू से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है। अगर मरीज का प्लेटलेट काउंट 10,000 से अधिक है तो उसे प्लेटलेट चढ़ाने की जरूरत नहीं होती है। बेवजह प्लेटलेट चढ़ाना फायदे के बजाय नुकसानदेय हो सकता है।”

एडल्ट के अधिकतर मामले होते हैं सिम्ट्मेटिक
एडल्ट लोगों मे 85% डेंगू इन्फेक्शन के मामले सिम्टमेटिक होते हैं और 15 साल से कम उम्र के बच्चों मे यह सिम्टमेटिक या बिना सिम्टम वाला भी हो सकता है। क्लासिक डेंगू फीवर एक गंभीर फेब्राइल इलनेस होती है, जो सिरदर्द, रेट्रोओरबिटल पेन और जोड़ों मे दर्द के साथ शुरू होता है। आमतौर पर डेंगू संक्रमित मच्छर के काटने के 4-6 दिन बाद लक्षण सामने आते हैं। इंक्यूबेशन पीरियड 3 से 14 दिनों का हो सकता है। बुखार आमतौर पर 5 से 7 दिनों तक रहता है। इसके बाद कमजोरी और बदहोशी का एहसास कई दिनों और कई बार हफ्तों तक चलता है, खासतौर से वयस्कों मे। महिलाओं मे जोड़ों व शरीर मे दर्दऔर रैश कॉमन है।
डेंगू से संबन्धित अधिकतर कोंप्लिकेशन बुखार उतरने के बाद शुरू होते हैं।

शुगर, साल्ट वाला लिक्विड है जरूरी
बुखार उतरने के बाद के दो दिन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। मरीज को ऐसा लिक्विड जिसमे नमक और शुगर हो, खूब सारा लेना चाहिए। इसमे मुख्य कोंप्लिकेशन होता है कैपिलरी का लीकेज जिसमे ब्लड चैनल्स के बाहर खून जाम जाता है और इंट्रावस्कुलर डीहाइड्रेशन हो जाता है। अगर भरपूर लिक्विड सही तरीके और सही वक्त पर दिया जय तो जानलेवा कोंप्लिकेशन से मरीज को बचाया जा सकता है।

याद रखें 20 का फॉर्मूला
डॉक्टरों को 20 का फॉर्मूला याद रखना चाहिए, जो इस प्रकार है, पल्स का 20 से अधिक बढ्न; ब्लड प्रेशर मे 20 की गिरावट; टोरनिकेट टेस्ट मे है रिस्क का पता लगने के बाद बाहों पर 20 से ज्यादा हेमरेजिक स्पॉट मौजूद होना। ऐसे मे मरीज को तुरंत मेडिकल इंटरवेंशन की जरूरत होती है।

डेंगू से बचाव पब्लिक के स्तर पर ही संभव है न कि सरकारी विभागों के स्तर पर। डेंगू के मच्छर घरों के बाहर जमा साफ पानी मे पनपते हैं, न कि नाले के गंदे पानी मे। डेंगू होने पर कभी भी ऐस्पिरिन न खाएं क्योंकि इसमे एंटी प्लेटलेट इफेक्ट होता है।

डेंगू के लक्षण
• 90% मामलों मे बुखार होता है।
• 80% मामलों मे सिरदर्द, आँखों और जोड़ों मे दर्द होता है।
• 50% मामलों के रैशेज होते हैं।
• 50% मामलों मे उल्टी और 30% मे डायरिया होता है।
• 33% मामलों मे खांसी, गले मे खरास और नाक बंद होने की समस्या होती है।

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