डेंटल चेकअप बचा सकता है ओरल कैंसर से

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Dental Check up
रेगुलर डेंटल चेकअप (dental check up) आपको ओरल कैंसर (Oral Cancer) से बचा सकता है। डिजिटल रेडियोग्राफी (Digital Radiography) जैसी आधुनिक तकनीकों ने डेंटिस्ट के लिए मुंह के कैंसर जैसी स्थितियों की पहचान करना आसान बना दिया है। इसके लिए डेंटिस्ट (Dentist) से नियमित जांच कराना बेहद जरूरी है, खासतौर से उन लोगों के लिए जो धूम्रपान करते हैं और अल्कोहल का इस्तेमाल करते हैं। एक्सिस डेंटल की डॉ. सिमिता मदान दे रही हैं इस बारे में पूरी जानकारीः

ओरल कैंसर भी हो सकता है जानलेवा
अन्य प्रकार के कैंसर के मामलों की तरह ओरल कैंसर (Oral Cancer) भी जानलेवा हो सकता है, अगर इसकी पहचान शुरूआत में न हो सके तो। कैंसर किसी खास हिस्से की कोशिकाओं का अनियंत्रित विकास है, जिसके संपर्क में आने से स्वस्थ कोशिकाएं भी डैमेज हो जाती हैं। ओरल कैंसर मुंह के किसी भी हिस्से में हो सकता है, जैसे कि होंठ, जीभ, गाल, गला अथवा कोई अन्य हिस्सा।

संकेतों को न करें नजरअंदाज
अगर मुंह में हुआ अल्सर ठीक न हो रहा हो तो तुरंत डेंटिस्ट के पास जाएं, क्योंकि यह भविष्य के खतरे का संकेत हो सकता है। यहां तक कि अगर आपको इस अल्सर से दर्द न हो रहा हो, फिर भी अगर यह जिद्दी है और ठीक होने में लंबा वक्त लगा रहा है तो डेंटिस्ट को जरूर दिखाएं। इसी तरह से, अगर मुंह में लाल या सफेद चकत्ता दखाई दे, तो भी तुरंत डेंटिस्ट के पास जाएं। मुंह का कोई भी अल्सर या चकत्ता ठीक होने में आमतौर पर दो से तीन हफ्ते का समय लगता है। अगर इतने दिन में भी समस्या ठीक न हो तो इसे नजरअंदाज बिल्कुल न करें। मुंह अथवा मुंह के आस-पास होने वाला कोई भी असामान्य इन्फ्लेमेशन, सूजन या गांठ हो तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।

मुंह के कैंसर के बड़े कारण
मुंह के कैंसर होने की कई वजहें हैं। हालांकि, यह भी संभव है कि किसी को कैंसर होने में इन कारणों का योगदान न भी हो, लेकिन ये कारण कैंसर होने का खतरा जरूर बढ़ा सकते हैं अथवा किसी को समस्या है तो उसे और गंभीर बना सकते हैं।

धूम्रपानः तंबाकू का इस्तेमाल मुंह के कैंसर के कुछ बड़े कारणों में से एक है। बहुत ज्यादा सिगरेट, सिगार या पाइप से धूम्रपान मुंह के किसी भी हिस्से में कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है। पाइप से धूम्रपान करने वालों को अक्सर होठों का कैंसर होता है। अध्ययन बताते हैं धूम्रपान करने वालों को कैंसर होने का खतरा उन लोगों की तुलना में छह गुना अधिक होता है जो धूम्रपान नहीं करते हैं। ऐसे लोगों को जिनको जीवन में कभी भी मुंह का कैंसर हुआ हो उन्हें भविष्य में कभी धूम्रपान न करने की सलाह दी जाती है।

अल्कोहल का इस्तेमालः कभी-कभार, एकाध ड्रिंक लेने तक ठीक है। लेकिन अत्यधिक मात्रा में ड्रिंक करना हानिकारक हो सकता है। यह व्यक्ति को मुंह के कैंसर के खतरे के दायरे में ला सकता है। धूम्रपान करने वालों की तरह, जो लोग ड्रिंक करते हैं उन्हें भी ओरल कैंसर () होने का खतरा उन लोगों की तुलना में अधिक होता है जो डिृंक नहीं करते हैं। जो लोग अधिक अल्कोहल के साथ धूम्रपान भी करते हैं उन्हें ओरल कैंसर का खतरा कहीं ज्यादा रहता है।

अत्यधिक सन एक्सपोजर: लगातार लंबे समय तक सीधी धूप में रहने और खतरनाक अल्टृावायलेट किरणों के संपर्क में आने से भी मुंह के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। बहुत ज्यादा समय बाहर बिताने और सूरज की हानिकारक यूवी किरणों के संपर्क में आने से त्वचा के सभी प्रकार के कैंसर को बढ़ावा मिलता है। जिसे होंठ का कैंसर है, उसकी बीमारी की वजह सूरज की रोशनी के अत्यधिक संपर्क में रहना भी हो सकता है। ऐसा भी देखा गया है कि सूरज की रोशनी के अत्यधिक संपर्क में रहने से कोशिकाओं में म्युटेशन यानी कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव भी होता है, और इन कोशिकाओं का अनियंत्रित विकास मुंह के कैंसर की वजह बन सकता है।

सुपारी: साउथ एशिया में सुपारी चबाने का चलन बेहद आम है, लोग हर समय इसे मुंह में रखने के आदी होते हैं, खासतौर से ग्रामीण इलाकों में। इसके अलावा, देश में तंबाकू, सुपारी व अन्य चीजों के साथ पान का बीड़ा चबाने की आदत भी आम बात है। यह मुंह का कैंसर बढ़ने की एक अन्य वजह है।

डेंटिस्ट के पास जाना है जरूरी
आपके मुंह की सेहत के लिए वैसे भी डेंटिस्ट के पास नियमित रूप से विजिट करना जरूरी होता है। और अगर किसी के मुंह में कोई असामान्य बदलाव जैसे कि गांठ या निशान आदि नजर आए तब डॉक्टर के पास जाने से परहेज करना बड़े खतरे को न्यौता देने जैसा हो सकता है। भारत में, डेंटिस्ट से नियमित जांच कराने को लेकर गंभीर नहीं हैं। लेकिन ऐसा करके आप आने वाले खतरों को टाल सकते हैं। ऐसे लोग जो धूम्रपान करते हैंख् अल्कोहल का इस्तेमाल करते हैं उन्हें नियमित रूप से डेंटिस्ट से जांच जरूर करानी चाहिए ताकि ऐसे किसी भी लक्षण की पहचान समय रहते की जा सके जो आगे चलकर कैंसर की वजह बन सकते हैं।

डिजिटल रेडियोग्राफी के क्षेत्र मे हुए नए विकास से अब समस्याओं की सही और वक्त पर पहचान संभव हो गई है। बड़े डेंटल चेन में डिजिटल ओपीजी यानी डाइग्नोस्टिक डेंटल एक्सरे की सुविधा उपलब्ध है, जिससे जांच में मदद मिलती है डिजिटल ओपीजी से स्पष्ट और सही तस्वीर सामने आती है जिससे इलाज की बेहतर योजना बनाई जा सकती है।

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