डेंटल क्लीनिक भी हो सकते हैं हेपेटाइटिस का स्रोत

16539
0
Share:

dental-clinic-and-hepatitis-HIV

28 जुलाई को विश्व हेपटाइटिस दिवस के रूप में मनाया जाता है, लेकिन हममे से बेहद कम लोग यह जानते होंगे कि हेपटाइटिस एचआईवी के मुकाबले 100 गुना अधिक संक्रामक है। हर साल दुनिया भर में इसके संक्रमण से होने वाली लिवर की बीमारी से लाखो लोग अपनी जान गंवाते हैं। हेपटाइटिस के 5 प्रकारो-ए,बी,सी,डी और ई में से बी और सी सबसे अधिक खतरनाक होते हैं। इसके वायरस सीधे मरीज के लिवर पर अटैक करते हैं और अगर शुरुआती दौर में इलाज न हो तो लिवर को स्थायी नुकसान या फिर लिवर कैंसर भी हो सकता है। गम्भीर बात यह है कि हेपेटाईस बी व सी का संक्रमण रक्त के एक कण से भी फैल सकता है और इसके स्रोत संक्रमित व्यक्ति के टूथब्रश, रेजर, मेनिक्योर, पेडिक्योर टूल से लेकर डेंटल क्लीनिक के मेडिकल टूल्स भी हो सकते हैं। ऐसे में सावधा रहना बेहद जरूरी है| किसी भी क्लिनिक में जाने से पहले इन बातो पर गौर जरूर कर लेँ:  
– मरीजों की पूरी मेडिकल हिस्ट्री जानें: मरीज की जांच शुरू करने से पहले उसकी मेडिकल हिस्ट्री जानना बेहद जरूरी है। अगर आपको इसके बारे में पता होगा तो आप इलाज के दौरान ज्यादा सावधानी बरतेंगे और इलाज में इस्तेमाल किए गए औजारों की सफाई ज्यादा अच्छी तरह से करेंगे।

– औजारों की कैटिगरी के हिसाब से इन्हें स्टेरलाइज करे: औजारों के स्टेरलाइजेशन का बेहतरीन परिणाम तभी मिल सकता है जब आप गंभीरता पूर्वक इन उपकरणों की श्रेणी के हिसाब से इनका स्टेरलाइजेशन करें। इन्हें तीन श्रेणियों में बांटा गया हैः

ए. क्रिटिकल इन्स्ट्रुमेंट- ये उपकरण कोशिकाओं को भेदते हैं और रक्त ब्लड के संपर्क में आते हैं। इसके हर इस्तेमाल के बाद इसे अच्छी तरह से स्टेरलाइज करना जरूरी होता है। इसके लिए ऑटोक्लेव यानी स्टीम हीटिंग, डृाई हीट अथवा हीट/केमिकल वैपर का इस्तेमाल किया जाता है। क्रिटिकल इन्स्ट्रुमेंट में फोरसेप, स्कल्पेल और सर्जिकल बर्स आदि शामिल हैं।

बी. सेमी-क्रिटिकल इन्स्ट्रुमेंट: ये औजार, जैसे कि मिरर, दोबारा इस्तेमाल योग्य इंप्रेशन ट्रे आदि कोशिकाओं के संपर्क में नहीं आते हैं लेकिन ये खुली हुई त्वचा के संपर्क में आते हैं। ऐसे में संक्रमण फैलाने की वजह जरूर बन सकते हैं। इन्हें भी स्टेरलाइज करने की जरूरत होती है। अगर इन उपकरणों को स्टेरलाइज नहीं किया जा सकता है तो इन्हें संक्रमण मुक्त करने के लिए उच्च-कोटि के डिसइन्फेक्टेंट का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

सी. नॉन-क्रिटिकल इन्स्ट्रुमेंट: इन उपकरणों से संक्रमण के प्रसार का खतरा बेहद कम होता है क्योंकि ये शायद ही कभी खुली हुई त्वचा के संपर्क में आते हैं। इनमें एक्सरे हेड्स, पल्स ऑक्सीमीटर, ब्लड प्रेशर कफ आदि इस श्रेणी में आते हैं। लेकिन इन्हें भी डिसइनफेक्टेंट से साफ जरूर किया जाना चाहिए।

– इस्तेमाल न होने पर पैक करके रखें औजारः सभी औजारों को स्टेरलाइज करने के बाद इन्हें पाउच में पैक करके यूवी चैंबर में रखें ताकि ये दोबारा संक्रमित होने से बचे रहें। सबसे अच्छा और उपयुक्त तरीका होता है इस पाउस को मरीज के सामने खोलना ताकि वह भी इस बात को लेकर पूरी तरह संतुष्ट रहे कि यहां स्टेरलाइजेशन प्रक्रिया सही ढंग से अपनाई जाती है।

– डिस्पोजेबल चीजों का अधिक से अधिक इस्तेमालः जहां भी डिस्पोजेबल चीजों का इस्तेमाल हो सकता है वहां इन्हें ही अपनाना चाहिए। सुई, कार्टिजेज, ग्लास, पट्टी, दस्ताने आदि एक बार इस्तेमाल के बाद फेंक दिए जाने चाहिए। जितना ज्यादा डिस्पोजेबल चीजों का इस्तेमाल होगा संक्रमण का खतरा उतना कम रहेगा।

– उपयुक्त स्टेरलाइजेशन के लिए बीजाणुओं की जांचः कई बार ऑटोक्लेव सही ढंग से काम नहीं करता है। ऐसे में स्टेरलाइजेशन प्रक्रिया का कोई फायदा नहीं होता। ऐसे में क्रॉस कंटैमिनेशन और संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ जाता है। डेंटल क्लीनिकों को बीजाणु जांच जरूर करना चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि ऑटोक्लेव सही ढंग से काम कर रहा है अथवा नहीं।

By: Dr. Mahesh Verma
Director, Maulana Aazad institute of dental sciences
New Delhi

Share:
0
Reader Rating: (2 Rates)9.1

Leave a reply