बच्चे से महरूम रख सकता है मधुमेह

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संसार भर में मधुमेह रोगियों की संख्या तेजी से बढ रही है विशेष रूप से भारत में। इस बीमारी में रक्त में ग्लूकोज का स्तर  सामान्य से अधिक बढ जाता है तथा रक्त की कोशिकाएं इस शर्करा को उपयोग नहीं कर पाती। यह ग्लूकोज का बढा  हुआ लेवल खून में लगातार बना रहे तो शरीर के अंग प्रत्यंगों को नुकसान पहुँचाना शुरू कर देता है। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मधुमेह प्रजनन तंत्र की विभिन्न क्रियाओं पर प्रतिकूल असर डालता है। जैसे पुरुषों और महिलाओं  में प्रजनन क्षमता का कम हो जाना। यह समस्या अनियंत्रित रक्त शर्करा (uncontrolled blood sugar) के कारण उत्पन्न होती है।  मधुमेह से पीडित महिलाओं में फैलोपियन ट्यूब के विकारग्रस्त होने और यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) से ग्रस्त होने की  आशंकाएं काफी बढ़ जाती हैं। फैलोपियन ट्यूब का विकारग्रस्त होना देश की महिलाओं में बांझपन (infertility) का एक  प्रमुख कारण है। मधुमेह के कारण गर्भस्थ महिला के भ्रूण पर भी प्रतिकूल असर पडता है।

मधुमेह के दुष्प्रभाव स्वरूप पुरुषों में वीर्य का शीघ्र स्खलन होना या शारीरिक संबंध बनाने की क्षमता का कम होना जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। ये समस्याएं इनफर्टिलिटी का एक कारण हैं। रक्त में शर्करा (sugar) का उच्च स्तर नसों (नर्व्स)  को नुकसान पहुंचाता है और इस स्थिति के कारण पेनाइल कैपिलरीज (लिंग की रक्त वाहिकाएं) बंद हो जाती हैं। नतीजतन  पुरुषों में काम-क्रिया की इच्छा घट जाती है और उनमें उत्तेजना कम महसूस होती है। सामान्य पुरुषों की तुलना में मधुमेह से  ग्रस्त पुरुषों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता और संख्या पर प्रतिकूल असर पडता है।

पुरूषों में इंफर्टिलिटी को जन्म दे सकता है मधुमेह
मदर्स लैप आईवीएफ सेंटर की मेडिकल डायरेक्टर व आईवीएफ विशेषज्ञ डाॅक्टर शोभा कहती हैं कि मधुमेह से पीडित पुरूष का पिता बन पाना मुश्किल होता है, साथ ऐसी महिला जिसके पति को मधुमेह है में गर्भ ठहरना मुश्किल होता है। डायबटीज के कारण पीडित में आॅक्सिडेटिव स्ट्रेस का स्तर बढ जाता है जोकि शुक्राणुओं के डीएनए को प्रभावित करता है। डाॅक्टर शोभा गुप्ता ने बताया कि क्षतिग्रस्त डीएनए कोशिकाओं को प्रभावित करते है, जिसके कारण वह पुरूष स्त्री को गर्भ धारण में मदद नहीं कर पाता है।
महिलाओं में हार्मोन्स से संबंधित असंतुलन के कारण कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं। जैसे माहवारी में देरी होना, मासिक स्राव में अनियमितताएं, सबफर्टिलिटी और रजोनिवृत्ति (मीनोपॉज) का समय से पूर्व होना आदि।

डाॅक्टर शोभा गुप्ता के अनुसार जिन गर्भवती महिलाओं में टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज होती है, उनमें मिसकैरेज का खतरा बढ जाता है इसके साथ ही साथ पीडित महिला के बच्चे में विकार की संभावना भी बहुत अधिक होती है।

डायबिटीज के रोगी लायें जीवनशैली में सुधार
वो लोग जो की डायबटीज से ग्रस्त होते हैं उन्हें अपनी जीवन शैली में बदलाव की जरूरत है ताकि वे डायबटीज को नियंत्रण में रख सके।
धूम्रपान बंद कर दे। हमें धूम्रपान के सेहत पर बुरे प्रभाव के बारे में पता है। पर ये प्रभाव उन लोगो के लिए बहुत ही हानिकारक हो जाते हैं जो की डायबटीज से ग्रस्त होते हैं। धूम्रपान से कोलेस्ट्रोल की मात्रा शरीर में बढ जाती है जो की रक्त वाहिनियों को बाधित कर देता है।

शराब का सेवन है हानिकारक
ये आपकी डायबटीज की दशा को प्रभावित कर सकता है, इसके अलावा अगर आप ध्यान दे की आप शराब को मिलाने के लिए क्या इस्तमाल कर रहे हैं ।फलो के रस, कोला और अन्य मीठे द्रव्यों को शराब के साथ न मिलाए ।शराब का एक अन्य बुरा प्रभाव यह है की इसमें कई सारी अस्वस्थ्य केलोरी होती है जो की आपके वजन घटाने की प्रक्रिया में आ सकती है । इसलिए यह आपको सुझाव दिया जाता है की आप अपने शराब के सेवन की मात्रा को कम से कम रखे

एक्सरसाइज है जरूरी
वो लोग जो की डायबटीज से ग्रट्स होते हैं उन्हें अपने जीवन के रोजाना कार्यक्रम में कसरत सम्मिलित कर लेनी चाहिए क्योंकि ये आपको स्वास्थ्य रखेगी और आपमें वजन कम करने में मदद भी करेगी । रक्त-शर्करा(ब्लड शुगर) को नियंत्रित रखने के लिये नियमित व्यायाम करें। अपने डॉक्टर के परामर्श से दवाएं लें। जो लोग टाइप 1 डाइबिटीज से ग्रस्त हैं, उन्हें डॉक्टर की राय से नियमित रूप से इंसुलिन की डोज लेनी चाहिए। डायबटीज एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है जिसका की पूरी तरह इलाज नहीं किया जा सकता है और इसलिए मरीज को कुछ जरूरी बातों को हमेशा ध्यान रखना चाहिए। यह आपके लिए बहुत ही जरूरी है की आप अपनी जीवनशैली में बदलाव लाये । आप अपने अंदर एक मजबूत इच्छा शक्ति लाये ताकि आप डायबटीज से लड सकें और उसको नियंत्रण में रख सके।

Dr.Shobha Gupta, IVF Expert from Mothers Lap IVF Centre

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