डायबीटीज़ की जांच अब घर पर!

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microchio device

वैज्ञानिकों ने तैयार किया माइक्रोचिप-बेस्ड डिवाइस

अब टाइप-1 डायबीटीज़ की जांच घर पर हो सकेगी। स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी मे स्कूल ऑफ मेडिसिन के रिसरचर्स ने इसके लिए एक हाथ से चलने वाला डिवाइस तैयार किया है। यह नैनोटेक माइक्रोचिप-बेस्ड डिवाइस ऐसे लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है जिन्हें भविष्य मे टाइप-1 डायबीटीज़ होने का खतरा है। इससे यह पता लगाना आसान हो जाएगा की आने वाले टाइम मे बीमारी होने की आशंका है या नहीं। रिसर्च मे शामिल स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर ब्रायन फेल्डमन का कहना है कि यह डिवाइस न सिर्फ डायबीटीज़ को अधिक बेहतर ढंग से समझने मे डॉक्टर्स की मदद करेगी बल्कि समय पर खतरे को भाँप कर लोगों को इससे बचा पाना भी आसान हो जाएगा।
नेचर मेडिसिन जर्नल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, टाइप-1 डायबीटीज एक ऑटोइम्यून डिजीज है, जो कि शरीर के हेल्दी टिश्यू पर एक अनुपयुक्त इम्यून-सिस्टम के हमले से होती है। बीमारी की शुरुआत तब होती है जब व्यक्ति के खुद के एंटीबॉडीज (रोग-प्रतिकारक) उसकी पाचन ग्रंथि (पैनक्रियाज़) मे इंसुलिन के प्रॉडक्शन के लिए जिम्मेदार सेल्स को प्रभावित करने लगते हैं। ये ऑटो-एंटीबॉडीज टाइप-1 डायबीटीज़ वाले लोगों मे ही होते हैं, टाइप-2 डायबीटीज़ वालों मे नहीं। नया टेस्ट डिवाइस इसी बुनियादी अंतर के आधार पर बीमारी की पहचान करता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर आप को डायबीटीज़ अब तक नहीं हुआ है लेकिन आपके ब्लड मे डायबीटीज़ से संबन्धित एक भी ऑटो-एंटीबॉडी मौजूद है तो आपको भविष्य मे बीमारी होने का खतरा है। अगर कई ऑटो-एंटीबॉडीज मौजूद हैं तो खतरा 90% तक रहता है। नई माइक्रोचिप मे कोई रेडियोएक्टिविटी इस्तेमाल नहीं होती। इसे इस्तेमाल करने के लिए मामूली ट्रेनिंग की जरूरत होती है और टेस्ट का रिजल्ट मिनटों मे सामने आता है। एक चिप बनाने मे तकरीबन 1100 रुपये की लागत आती है और इससे 15 बार तक टेस्ट किया जा सकता है। इतना ही नहीं इससे जांच मे पहले की टेकनीक्स के मुक़ाबले काफी कम ब्लड की जरूरत पड़ती है।

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