वर्ल्ड हेल्थ डे: डायबीटीज से जुड़े टॉप 16 मिथ्स

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इसमे कोई शक नहीं है कि डायबीटीज़ एक लाइलाज़ समस्या है और हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का इससे सीधा संबंध है। मगर इससे भी बड़ा सच यह है कि अगर आप लाइफस्टाइल मैनेजमेंट का सही तरीका सीख जाएँ तो डायबीटीज़ के साथ भी एक सामान्य व्यक्ति से बेहतर ज़िंदगी जी सकते हैं। इसमे आपकी मदद के लिए हम बता रहे हैं डायबीटीज़ से जुड़े 16 कॉमन मिथ्स और उनके सही समाधान:

मीठा खाने से होता है डायबीटीज
सच – मीठे से डायबीटीज होने का कोई संबंध नहीं है। इसके लिए वंशानुगत और दूसरे कारण जिम्मेदार होते हैं। हालांकि डायबीटीज हो जाने के बाद मीठा खाने से शुगर अनियंत्रित हो जाती है।

अल्कोहल का ब्लड ग्लूकोज लेवल से संबंध नहीं
सच – नियमित तौर पर अल्कोहल के इस्तेमाल से शरीर में यूरिक एसिड और ट्राईग्लिसराइड बढ़ता है। साथ ही शुगर भी अनियंत्रित हो जाता है।

डायबीटीज के लिए स्पेशल खाना होता है
सच – डायबीटीज के लिए कोई स्पेशल खाना नहीं होता बल्कि बैलेंस्ड डाइट लेने की जरूरत होती है, जिसमें 50-60 पर्सेंट कार्बोहाइड्रेट, 15-20 पर्सेंट प्रोटीन और 20-25 पर्सेंट फैट और दूसरे तत्व शामिल हों।

शुगर फ्री खाना है समस्या का हल
सच – शुगर फ्री का मतलब कैलोरी फ्री नहीं होता। ऐसे में शुगर फ्री के नाम पर जमकर मिठाइयां और चॉकलेट आदि खाना नुकसानदेय हो सकता है। इनमें खोया, क्रीम आदि की कैलोरी भी शामिल होती है, जो शुगर अनियंत्रित कर सकती है।

डायबीटीज हो तो फल खाना बंद कर दें
सच – डायबीटीज में लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल जरूर खाने चाहिए। इनमें सेब, संतरा, मौसमी, अमरूद और पपीता आदि खाएं। चीकू, केला और अंगूर जैसे फल न लें।

ड्राई फ्रूट खाने से परहेज करना चाहिए

सच – बादाम और अखरोट जैसे सूखे मेवों से शरीर में अच्छा यानी एचडीएल कॉलेस्ट्रॉल बढ़ता है जो हार्ट अटैक के खतरे को कम करता है, इसलिए ये चीजें खाएं।

डायबीटीज हो तो कम खाना खाएं
सच – कम खाना खाना सही नहीं है बल्कि थोड़ा – थोड़ा बार – बार खाएं। न तो ज्यादा देर भूखे रहें और न ही एक बार में ढेर सारा खाना खाएं।

मोटे लोगों को ही होता है डायबीटीज का खतरा
सच – डायबीटीज किसी को भी हो सकती है, वह चाहे मोटा हो या पतला।

डायबीटीज में खास आहार ही है काफी
सच- अच्छा आहार वही है जिसमें 40-60 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 20 प्रतिशत प्रोटीन और 30 प्रतिशत या कम वसा है। डायबीटीज के मरीजों के आहार में कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रोट, शाक-सब्जी व फल की अच्छी मात्रा जरूरी है और आहार भी नियमित अंतराल पर लें।

टाइप 2 डायबीटीज टाइप 1 की तरह खतरनाक नहीं है
सच- यदि रोकथाम न हो तो डायबीटीज़ के दोनों रूप समस्याओं को जन्म देते हैं। दोनों मामलों में सही दवा के साथ स्वस्थ जीवनशैली जरूरी है। एक को अधिक खतरनाक बता कर दूसरे को कम नहीं आंका जा सकता है।

डायबीटीज़ एक उम्र के बाद ही होता है
सच- अब नवजात और छोटे बच्चों में भी यह समस्या दिखती है। उम्र बढ़ने के साथ टाइप 2 डायबीटीज़ की शिकायत बढ़ती है।

डायबीटीज़ का मरीज एथलीट नहीं हो सकता है
सच-ऐसे लोगों की मिसाले हैं जो डायबीटीज के बावजूद खेल-कूद में एक मकाम हासिल कर चुके हैं, जैसे ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट तैराक गैरी हॉल, क्रिकेट खिलाड़ी वसीम अकरम।

डायबीटीज़ मरीज महिला को गर्भधारण नहीं करना चाहिए
मां बनने से परहेज की कोई जरूरत नहीं है। हालांकि एक्सपर्ट की देखरेख में संतुलित जीवनशैली अपनाना जरूरी है। गर्भधारण से पहले, गर्भावस्था के दौरान और आगे भी सही शुगर लेवल मेंटेन रखना जरूरी है ताकि बच्चे के जन्म के बाद भी मां स्वस्थ रहे।

डायबीटीज़ है तो ब्लड डोनेट नहीं कर सकते
टमेरिकन रेड क्रॉस के अनुसार डायबीटीज़ के मरीज एक स्वस्थ इंसान की तरह रक्तदान कर सकते हैं बशर्ते कुछ मानकों को पूरा करते हों।

डायबीटीज़ के मरीज की उम्र कम हो जाती है
सच- अगर शुगर लेवल सही रखा जाए और जीवनशैली सही हो तो डायबीटीज के मरीज की भी लंबी आयु हो सकती है।

दवा ले रहे हों तो कुछ भी खा सकते हैं
सच-डायबीटीज़ के मरीज को आहार में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और सैचुरेटेड फैट से परहेज करने की सलाह दी जाती है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त और समय पर आहार और उचित दवा जरूरी है।

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