डिजिटल हेल्थ प्रोग्राम की शुरुआत

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digital health programmफोर्टिस हैल्थकेयर और डिजिटल, मानसिक एवं भावनात्मक सेहत का खयाल रखने वाली अमरीकी कंपनी वेफॉरवर्ड ने आजदिल्ली में एक आयोजन में भारत में एप-आधारित वेलनेस प्रोग्राम शुरू करने का ऐलान किया है। “कोच इन योर पॉकेट” नाम के इस प्रोग्राम के तहत समान्य तनाव से लेकर गम्भीर भावनात्मक व मानसिक बीमारियो का समाधान मुहैया कराया जाएगा। इसके लिए माइंड फुलनेस व सीबीटी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
इस मौके पर कई विषेशज्ञ भी मौजूद रहे जिन्होंने तनाव और मौजूदा वक्त में लोगों और संगठनों पर इसके प्रभाव के बारे में बात की। फोर्टिस हेल्थकेयर डॉ. के डायरेक्टर, मेंटल हेल्थ एंड बिहेवियरल साइंस डॉ. समीर पारेख ने कहा कि मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य से जुड़े मामले हमारे अनुमान से भी अधिक हैं। कमोबेश हर परिवार इनसे प्रभावित है जिससे लोगों और समाज पर काफी बोझ पड़ रहा है। क्लिनिकल अनुभव और षोध आंकड़े दर्षाते हैं कि तनाव से लोगों के आपसी रिश्तो पर भी बुरा असर पड़ता है और यह सेहत को भी नुकसान पहुंचाता है। मुझे भरोसा है कि यह प्रोग्राम लोगों की सेहत पर सकारात्मक असर डालेगा, इसलिए इससे संगठनों और समाज पर असर पड़ेगा।’’
इस प्रोग्राम को लॉन्च करते हुए फोर्टिस हेल्थकेयर के सीईओ भावदीप सिंह ने कहा, ’’आज के समय में कई लोग अपने पेशेवर जीवन में रोजाना के तनाव से परेशान हो जाते हैं। उनके लिए मानसिक स्वास्थ्य विषेशज्ञ से सलाह लेना भी मुश्किल होता है, क्योंकि वे ऐसा करने में शर्म महसूस करते हैं। भारत ने कई मोर्चों पर काफी तरक्की कर ली है, लेकिन तनाव एवं मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में अभी भी जागरूकता काफी कम है। इस पृश्ठभूमि में, फोर्टिस हैल्थकेयर एवं वेफॉरवर्ड द्वारा आयोजित यह एचआर कॉन्क्लेव विभिन्न पक्षों को साथ लाने के लिहाज से एक स्वागतयोग्य कदम है। डिजिटल हेल्थ प्रोग्राम हमारे अत्यंत तनावग्रस्त समाज के लिए इनोवेटिव और बेहद जरूरी सॉल्यूशन है।’’

वेफॉरवर्ड की फाउंडर डॉ. नव्या सिंह ने कहा कि हमारा मिशन यह सुनिश्चित करना कि हर किसी की पहुंच हमेशा मेंटल एवं इमोशनल हैल्थ सपोर्ट तक हो। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए हमने वैज्ञानिक रूप से स्थापित तकनीकों पर आधारित एक समाधान तैयार किया है जो यूज़र्स को उनके स्मार्टफोन के जरिए उपलब्ध हैं। अमेरिका में वेफॉरवर्ड एप का इस्तेमाल करने वालों के साथ की गई हमारी रिसर्च बताती है कि 80% से अधिक मामलों में सिर्फ 3 हफ्तों में सुधार देखने को मिला। अध्ययन से यह भी पता चलता है कि मानसिक एवं भावनात्मक सेहत के मामलों के परिणामस्वरूप अधिक खाने, नींद में परेशानी और जीवनशैली से संबंधित समस्याएं सामने आती हैं।’’
भारतीय कर्मचारियों पर टावर्स वाटसन द्वारा किए गए एशिया पैसिफिक संस्करण से सामने आया कि प्रत्येक 3 भारतीय नियोक्ताओं में से 1 ने 2013 में तनाव या परेषानी से निजात पाने के कार्यक्रमों का आयोजन किया और वर्श 2014 में भी इतने ही नियोक्ताओं ने ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए। भारत में जीवनषैली से जुड़े जोखिमों में तनाव के सबसे आगे होने की वजह से यह संख्या और भी बढ़ने की उम्मीद थी। भविश्यवाणियां सच साबित हुईं। सोसाइटी फॉर ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट एसएचआरएम द्वारा किए गए हाल के अध्ययन में स्पश्ट हुआ कि बैंकिंग/फाइनेंस क्षेत्र में काम करने वाली एक कंपनी जिसमें औसतन 5,000 कर्मचारी काम करते हों, उसे तनाव से संबंधित मामलों की वजह से उत्पादकता में 100 करोड़ रुपये का नुकसान सहना पड़ता है। 10,000 कर्मचारियों वाली एक आईटी-आईटीईएस कंपनी को तनाव को करीब 50 करोड़ रुपये और करीब 2,000 कर्मचारियों वाली यात्रा एवं आतिथ्य सत्कार वाली कंपनी को 10 करोड़ रुपये से कुछ ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ता है।

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