आंखें हैं आपकी सेहत का आईना

9992
0
Share:

eyes

आपकी आंखें सिर्फ दुनिया की रंगीनियत देखने का जरिया ही नहीं, आपकी सेहत का आईना भी हैं। शरीर में आंखें ही एक ऐसा हिस्सा हैं जिनके जरिए आर्टरी और वेंस को सीधे देख सकते हैं। इसके लिए किसी सर्जरी या कैमरे की जरूरत नहीं होती है। यही वजह है कि आंखों का डॉक्टर डाययबीटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर समस्याओं का सबसे पहले और आसानी से पता लगा लेता है। 65 पर्सेंट मामलों में आंखों के डॉक्टर मरीज मे हाई कोलेस्टृॉल के लक्षण को अन्य किसी हेल्थकेयर एक्सपर्ट की तुलना में पहले पता लगा लेते हैं। ऐसे में रेटिना की नसों में पीले-पीले धब्बे नजर आते हैं। वासन आई केयर के डॉ. जॉय भागे कहते हैं अगर आंखों की जांच नियमित रूप से कराई जाए तो कई गंभीर बीमारियों का वक्त रहते पता लगाया जा सकता है। इनमें खास हैंः

आई क्लूः आंखों की नसें सिल्वर या कॉपर कलर होना
खतराः हाईब्लड प्रेशर

हाई ब्लड प्रेशर के 20 पर्सेंट से भी ज्यादा मरीजों को इसकी जानकारी नहीं होती, जबकि हाइपरटेंशन का पता आंखों के जरिए लगाया जा सकता है क्योंकि ऐसा होने पर रेटिना की आर्टरी का रंग सिल्वर या कॉपर हो जाता है जिसे हम कॉपर वायरिंग कहते हैं। अगर इसका इलाज वक्त पर न हो तो यह स्थिति रेटिना के ब्लड वेस्सेल से होते हुए पूरे शरीर की नसों को सख्त बना सकती है जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

आई क्लूः आंखों की अंदरूनी परत में तिल
खतराः मेलानोमा

सूरज की तेज रोशनी आपकी त्वचा को डैमेज करने के साथ-साथ कुछ और भी नुकसान पहुंचा सकती है जिसमें आईबॉल के भीतर कैंसर का खतरा भी शामिल है। यह रेटिना में एक तिल या पिगमेंटेशन की सतह की तरह दिख सकता है। आंखों के मेलानोमा का शुरूआत में पता लगाना थोड़ा मुश्किल होता है। इसके अधिकतर मामलों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देता और यह चमत्कारिक रूप से जल्द ही आस-पास के टिश्यू तक फैल जाता है।

आई क्लूः ब्लड वेस्सेल्स में लीकेज
खतराः डायबीटीज

लंबे समय तक ब्लड शुगर लेवल ज्यादा होने पर रेटिना की ब्लड वेस्सेल्स डैमेज हो सकती हैं, ऐसे में वे कमजोर हो जाती हैं। डॉक्टर को रिसाव अथवा खराब नसों को रिप्लेस करने के लिए अंकुरित हो रही असामान्य नसों का पता लग सकता है। वैसे भी डायबीटीज आंखों की समस्या के लिए सामान्य तौर पर भी सबसे ज्यादा जिम्मेदार होती है और गंभीर मामलों में यह अंधेपन की स्थिति भी ला सकती है।

आई क्लूः जलन व सूजन
खतराः ऑटोइम्यून डिजीज

ऑटोइम्यून बीमारियां शरीर के हेल्दी टिश्यू पर हमले के लिए जिम्मेदार होती हैं जिनमें आंखों के अंदरूनी हिस्से भी शामिल होते हैं, इसके चलते जलन व सूजन हो सकती है। यह प्रक्रिया कुछ इस तरह होती है, मसलन आंखों के आस-पास खून जैसी लाली और आंखों की 30 से 50 पर्सेंट नसों में सूजन, लाली, खुजलाहट, आंखों से पानी आने जैसे लक्षण और मरीज की समस्या की वजह जांच आदि में पता न लग पाने वाली ऑटोइम्यून बीमारी हो, जैसे ल्युपस या र्युमेटॉइड आर्थराइटिस।

आई क्लूः अंदरूनी छाले
खतराः सीएसआर

इसमें आपकी आंखें बाहर से ठीक लगती हैं मगर आंख की पुतली के भीतर छाले हो सकते हैं। इस स्थिति को सेंट्रल सेरस रेटिनोपैथी यानी सीएसआर कहते हैं। ऐसा आमतौर पर बहुत ज्यादा दिमागी और मानसिक तनाव के चलते होता है, क्योंकि इस स्थिति में शरीर रेटिना में छाले बनाने वाला फ्ल्युइड काफी ज्यादा मात्रा में लीक होने लगता है। इसके सबसे आम लक्षणों में मरीज को धुंधला दिखाई देना और किसी एक प्वॉइंट पर फोकस करते समय लहरदार लाइनें दिखाई देने जैसे लक्षण आते हैं। ज्यादातर मामलों मे तनाव का स्तर कम कर सीएसआर को मैनेज किया जा सकता है, जिन मामलों में ऐसा नहीं हो पाता उनमें लेजर ट्रीटमेंट देते हैं।

आई क्लूः आंखों के सफेद हिस्से की नसों में सूजन
खतराः एलर्जी

पुआल, मिट्टी और जानवरों की रूसी से होने वाली एयरबोर्न एलर्जी अक्सर आंखों को प्रभावित करती है। इनसे बचाव के मकेनिजम के तहत आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता काम करती है, जो कि प्राकतिक केमिकल के रूप में होती है और बिना किसी दुष्प्रभाव के काम करती है। इस प्रक्रिया में आंखों के आस-पास के हिस्से में सूजन, खुजलाहट, जलन, लाली के अलावा आंखों से पानी आने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं

Share:
0
Reader Rating: (1 Rate)9.3

Leave a reply